रुद्रप्रयाग नगरासू गुरुद्वारा विवाद का शांतिपूर्ण समाधान: 4 दिनों बाद छत से नीचे उतरे निहंग सिख, प्रशासन ने ली राहत की सांस
रुद्रप्रयाग (उत्तराखंड): उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के नगरासू स्थित गुरुद्वारा साहिब में पिछले चार दिनों से चला आ रहा तनावपूर्ण घटनाक्रम आखिरकार मंगलवार शाम को पूरी तरह समाप्त हो गया। संवाद, धैर्य और आपसी सहमति के बल पर इस संवेदनशील मामले का शांतिपूर्ण समाधान निकाल लिया गया है। गुरुद्वारे की छत पर डटे निहंग सिख मंगलवार शाम को सुरक्षित नीचे उतर आए और अपने धार्मिक जयघोषों के साथ बुलेट मोटसाइकिलों पर सवार होकर अपने गंतव्य के लिए रवाना हो गए। इसके साथ ही प्रशासन और स्थानीय लोगों ने बड़ी राहत की सांस ली है।
4 दिनों तक बना रहा असमंजस और तनाव का माहौल
नगरासू गुरुद्वारा विवाद ने पिछले चार दिनों से न केवल रुद्रप्रयाग बल्कि पूरे उत्तराखंड प्रदेश में सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर सुर्खियां बटोरीं। इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत शनिवार, 20 जून को हुई जब 7 निहंग सिख गुरुद्वारा परिसर में दाखिल हुए। देखते ही देखते इस मामले ने विवाद का रूप ले लिया और निहंग सिख गुरुद्वारे की छत पर डेरा जमाकर बैठ गए। इसके बाद से ही पुलिस-प्रशासन और निहंग सिखों के बीच गतिरोध लगातार बना रहा, जिससे स्थानीय निवासियों में भी गहरी चिंता और असमंजस की स्थिति पैदा हो गई थी।

क्या थी निहंग सिखों की नाराजगी की मुख्य वजह?
सूत्रों और प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस पूरे विवाद की जड़ें 16 जून को कर्णप्रयाग में हुई एक अन्य घटना से जुड़ी हैं। कर्णप्रयाग में स्थानीय लोगों और निहंग सिखों के बीच किसी बात को लेकर तीखी झड़प हुई थी, जिसके बाद पुलिस ने कुछ निहंग सिखों को गिरफ्तार कर लिया था। इस गिरफ्तारी को लेकर सिख समुदाय के एक वर्ग के भीतर गहरा आक्रोश था। इसी नाराजगी के चलते निहंग सिख नगरासू गुरुद्वारा पहुंचे थे। वे गुरुद्वारा प्रबंधन से इस मामले में अपने लिए समर्थन की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन जब प्रबंधन के साथ सहमति नहीं बन पाई, तो गतिरोध और गहरा गया।
पुलिस और जिला प्रशासन ने दिखाई बेहद सतर्कता और संयम
चार दिनों तक चले इस हाई-वोल्टेज ड्रामे के दौरान रुद्रप्रयाग जिला प्रशासन और पुलिस बल ने अत्यंत संयम, सूझबूझ और सतर्कता का परिचय दिया। स्थिति को बिगड़ने से बचाने के लिए बल प्रयोग के बजाय बातचीत का रास्ता चुना गया। इसी रणनीति के तहत रविवार, 21 जून की रात को एक निहंग सिख ने खुद आत्मसमर्पण कर दिया था। इसके अगले दिन यानी सोमवार, 22 जून को जब एक अन्य निहंग सिख भोजन लेने के लिए नीचे आया, तो पुलिस ने उसे एहतियातन हिरासत में ले लिया। इस दौरान कुछ समय के लिए माहौल काफी तनावपूर्ण भी हो गया था, लेकिन सुरक्षा बलों ने स्थिति को नियंत्रण से बाहर नहीं जाने दिया।
सिख प्रतिनिधिमंडल की मध्यस्थता से बनी बात
विवाद को पूरी तरह सुलझाने में मंगलवार, 23 जून को पंजाब और हिमाचल प्रदेश के पांवटा साहिब से पहुंचे एक वरिष्ठ सिख प्रतिनिधिमंडल ने बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस प्रतिनिधिमंडल ने सबसे पहले गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी से वार्ता की और उसके बाद छत पर मौजूद निहंग सिखों से अलग-अलग दौर की बातचीत की। कई घंटों की मैराथन बैठकों और गंभीर विचार-विमर्श के बाद दोनों पक्षों के बीच सहमति का फॉर्मूला तैयार हुआ। सहमति बनते ही गतिरोध समाप्त हो गया और शाम करीब साढ़े चार बजे छत पर मौजूद सभी निहंग सिख सुरक्षित नीचे उतर आए।

अराजकता फैलाना नहीं, आक्रोश प्रकट करना था उद्देश्य: सिख नेता
पांवटा साहिब से आए सिख प्रतिनिधि गुणगान सिंह और पंजाब से पहुंचे अजीत सिंह ने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि निहंग सिख किसी भी प्रकार की अराजकता या अशांति फैलाने के उद्देश्य से वहां नहीं आए थे। उनके भीतर कर्णप्रयाग की घटना को लेकर केवल एक स्वाभाविक आक्रोश था। उन्होंने सरकार, जिला प्रशासन और सिख समुदाय के वरिष्ठ नेताओं के सामूहिक प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि मामला पूरी तरह शांतिपूर्ण ढंग से सुलझ गया है और सभी निहंग सिख सकुशल अपने-अपने घरों के लिए लौट चुके हैं।
रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी (DM) का आधिकारिक बयान
पूरे मामले के पटाक्षेप होने के बाद रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी (DM) विशाल मिश्रा ने कहा, “नगरासू गुरुद्वारे की छत पर मौजूद सभी निहंग सिख पूरी तरह सुरक्षित रूप से नीचे उतर आए हैं। प्रक्रिया पूरी करने के बाद उन्हें उनके गंतव्य के लिए रवाना कर दिया गया है। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम की गहराई से जांच की जाएगी और सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”
प्रशासनिक संयम और सामुदायिक संवाद के इस सफल समन्वय ने एक बड़े संभावित विवाद को टाल दिया, जिससे अब क्षेत्र में पूरी तरह शांति और सामान्य स्थिति बहाल हो गई है।