- उपराष्ट्रपति ने एम्स ऋषिकेश के छठे दीक्षांत समारोह को संबोधित किया
- उपराष्ट्रपति ने स्नातकों से सहानुभूति, सत्यनिष्ठा और राष्ट्र निर्माण के प्रति प्रतिबद्धता के साथ सेवा करने का आह्वान किया
- उपराष्ट्रपति ने बुनियादी ढांचे और सेवाओं को मजबूत करने में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व की प्रशंसा की
- पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की चुनौती को अवसर में बदलें, युवा चिकित्सक- राज्यपाल
- चिकित्सा क्षेत्र केवल एक पेशा नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का सर्वाेच्च माध्यम है, जिसे निष्ठा, संवेदनशीलता और करुणा के साथ निभाया जाना चाहिए- मुख्यमंत्री
देहरादून।भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज ऋषिकेश स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के छठे दीक्षांत समारोह को संबोधित किया। ऋषिकेश को चिंतन और उपचार का वैश्विक केंद्र होने के साथ-साथ हिमालय का प्रवेश द्वार बताते हुए उन्होंने इसके आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डाला और कहा कि ऐसा वातावरण दीक्षांत समारोह की गंभीरता को और गहरा करता है।

उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह वर्षों के अनुशासित प्रयासों और त्याग का परिणाम है, साथ ही यह समाज और राष्ट्र के प्रति बड़ी जिम्मेदारी की शुरुआत भी है। उन्होंने स्नातकों से समर्पण और उद्देश्य की भावना के साथ अपने पेशेवर कर्तव्यों का निर्वहन करने का आह्वान किया।

कोविड-19 महामारी के संदर्भ में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने सतत नवाचार और प्रतिबद्धता का परिचय दिया। उन्होंने कहा कि 14 करोड़ से अधिक नागरिकों को मुफ्त टीके लगाए गए, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं तक समान पहुंच सुनिश्चित हुई। भारतीय वैज्ञानिकों ने मानवता के कल्याण के लिए टीके विकसित किए।

उन्होंने वैक्सीन मैत्री पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके तहत 100 से अधिक देशों को टीके उपलब्ध कराए गए, जो ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना को दर्शाता है।
स्वास्थ्य अवसंरचना पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में नए एम्स संस्थानों की स्थापना से गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा शिक्षा तक पहुंच मजबूत हुई है।

एम्स ऋषिकेश की सराहना करते हुए उन्होंने इसे नैदानिक देखभाल, शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार का उत्कृष्ट केंद्र बताया। उन्होंने टेलीमेडिसिन और दूरस्थ क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की पहल की सराहना की।
उन्होंने हेली एम्बुलेंस सेवा और चारधाम यात्रा व दूरस्थ क्षेत्रों में दवा वितरण के लिए ड्रोन के उपयोग को स्वास्थ्य सेवा में नवाचार का प्रभावी उदाहरण बताया।
उन्होंने दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे सहित क्षेत्र में तेजी से हो रहे अवसंरचना विकास का उल्लेख किया और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार के प्रयासों की सराहना की।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवा एक सार्वजनिक जिम्मेदारी है और चिकित्सा पेशेवर राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने डॉक्टरों से निवारक देखभाल, ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा, अनुसंधान और नवाचार पर ध्यान देने का आग्रह किया।
इस अवसर पर राज्यपाल गुरमीत सिंह (से नि) ने उपराष्ट्रपति का स्वागत करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन से युवा चिकित्सकों को नई दिशा मिलेगी। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों के समर्पण और सेवा भावना का प्रतीक है।
उन्होंने चिकित्सा क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल हेल्थ और आधुनिक शोध की भूमिका पर प्रकाश डाला और एम्स ऋषिकेश के योगदान की सराहना की।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि चिकित्सा क्षेत्र समाज और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने उपराष्ट्रपति के व्यक्तित्व और उनके मार्गदर्शन को प्रेरणादायी बताया।
उन्होंने कहा कि एम्स ऋषिकेश प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संस्थान बन चुका है, जहां कैंसर, न्यूरोसर्जरी, रोबोटिक सर्जरी और जॉइंट रिप्लेसमेंट जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।

उन्होंने बताया कि ऊधमसिंह नगर में एम्स ऋषिकेश के सैटेलाइट सेंटर का निर्माण कार्य जारी है, जिससे कुमाऊं क्षेत्र को भी लाभ मिलेगा।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए मेडिकल कॉलेज, टेलीमेडिसिन, जन औषधि केंद्र और निःशुल्क जांच जैसी योजनाओं पर काम कर रही है।

कार्यक्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहा कि चिकित्सा पेशा मानव सेवा का सर्वोच्च माध्यम है और डॉक्टरों को नैतिकता व ईमानदारी को प्राथमिकता देनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि बदलते समय में डॉक्टरों को निरंतर सीखते रहना चाहिए और मरीजों के साथ संवाद बेहतर बनाना चाहिए, जिससे उपचार के परिणाम बेहतर हो सकें।
इस अवसर पर त्रिवेंद्र सिंह रावत, नरेश बंसल, महेंद्र भट्ट, प्रो. राज बहादुर, प्रो. मीनू सिंह, प्रो. सौरभ सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
