रामनगर। उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के अध्यक्ष प्रभात ध्यानी को पुलिस हिरासत से रिहा कर दिया गया है। ऋषिकेश रेलवे स्टेशन पर ट्रेन से उतारकर हिरासत में लिए जाने के विरोध में शनिवार को रामनगर कोतवाली का घेराव कर विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों के कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने उनकी तत्काल रिहाई की मांग उठाई थी, जिसके बाद अगले दिन दोपहर 2 बजे उन्हें रिहा किया गया। रिहाई के बाद कार्यकर्ताओं ने एक बड़ा जुलूस निकालकर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
जंतर-मंतर प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे थे प्रभात ध्यानी
उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के अध्यक्ष देश के शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और शिक्षा व्यवस्था में सुधारों की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित एक बड़े कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। इसके लिए वे ऋषिकेश से ट्रेन द्वारा रवाना हुए थे, लेकिन रास्ते में ही उन्हें रोक लिया गया। रिहा होने के बाद कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए प्रभात ध्यानी ने कहा कि उत्तराखंड समेत पूरे देश में लोगों को जंतर-मंतर प्रदर्शन में शामिल होने से रोकना मोदी सरकार की तानाशाही को दर्शाता है। उन्होंने जनता से इस लोकतांत्रिक विरोधी कदम के खिलाफ खड़े होने और सरकार को उखाड़ फेंकने का आह्वान किया।

ट्रेन से उतारकर फोन और सामान छीना, रातभर कोतवाली में रखा
घटनाक्रम की जानकारी देते हुए प्रभात ध्यानी ने बताया कि शाम 5 बजे ऋषिकेश रेलवे स्टेशन पर कोतवाली पुलिस ऋषिकेश के एसएसआई नवीन जोशी ने जीआरपी के सिपाहियों की मदद से उन्हें अचानक ट्रेन से नीचे उतार दिया। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उनका सारा सामान और मोबाइल फोन भी जब्त कर लिया। जब उन्होंने इस कार्रवाई की वजह पूछी, तो पुलिस अधिकारियों ने बताया कि नैनीताल पुलिस से इनपुट मिला था कि उन्हें किसी भी कीमत पर दिल्ली के जंतर-मंतर जाने से रोकना है। इसके बाद उन्हें रामनगर कोतवाली लाया गया और कोतवाल सुशील कुमार के सुपुर्द कर दिया गया, जहां उन्हें रातभर पुलिस हिरासत में रखा गया।
परिजनों को नहीं दी सूचना, कानून के उल्लंघन का आरोप
प्रभात ध्यानी ने पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि हिरासत के दौरान उनके मित्रों या परिजनों को उनकी गिरफ्तारी की कोई सही सूचना नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि पुलिस का यह कदम सीधे तौर पर स्थापित कानूनी नियमों का खुला उल्लंघन है। इस अवैध हिरासत के खिलाफ अब कानूनी मोर्चा भी खोल दिया गया है। उत्तराखंड हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई है, जिस पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने पुलिस प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत इस पूरे मामले पर अगले दिन फिर से सुनवाई करेगी।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री को बर्खास्त करने और नई शिक्षा नीति वापस लेने की मांग
रामनगर कोतवाली के घेराव और प्रदर्शन के दौरान विभिन्न संगठनों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तुरंत बर्खास्त करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि देश में शिक्षा का निजीकरण तुरंत बंद होना चाहिए और सरकार को नई शिक्षा नीति को वापस लेना चाहिए। उन्होंने मांग की कि देश में अमीरों और गरीबों के लिए अलग-अलग शिक्षा पद्धतियों को पूरी तरह समाप्त किया जाए। संविधान में जरूरी संशोधन करके देश के सभी नागरिकों को निशुल्क, समान, वैज्ञानिक, गुणवत्तापूर्ण और उनकी मातृभाषा में शिक्षा पाने का कानूनी अधिकार दिया जाना चाहिए।
इन प्रमुख संगठनों और नेताओं ने किया पुलिस कार्रवाई का विरोध
इस पूरी पुलिस कार्रवाई का विरोध करने और थाने का घेराव करने वालों में भारी संख्या में सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता शामिल थे। विरोध प्रदर्शन में समाजवादी लोकमंच के मनीष कुमार, जगमोहन सिंह, गिरीश चंद्र के साथ-साथ व्यापार मंडल के संरक्षक मनमोहन अग्रवाल और देवभूमि व्यापार मंडल के अध्यक्ष मनिंदर सिंह सेठी शामिल हुए। इनके अलावा इंकलाबी मजदूर केंद्र के रोहित रुहेला, उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के मोहम्मद आसिफ, सुनील, लालमणि, किरण ने भी भागीदारी की।
महिला सशक्तिकरण और छात्र संगठनों ने भी इस दमनकारी नीति के खिलाफ आवाज उठाई। महिला एकता मंच की कौशल्या, सरस्वती, ललिता रावत और प्रगतिशील महिला एकता केंद्र की तुलसी छिंबाल व शीला शर्मा ने पुलिस कार्रवाई की निंदा की। छात्र संगठन आइसा के नेता सुमित कुमार, राज्य आंदोलनकारी पुष्कर दुर्गापाल, चंद्रशेखर जोशी, इंदर सिंह मनराल, रईस अहमद, देवेंद्र भट्ट, एडवोकेट सुरेश नैनवाल, एडवोकेट प्रकाश बिष्ट, मोहन कांडपाल, कमल करगेती, हेम जोशी और टी के खान शाहिद समेत सैकड़ों लोगों ने पुलिस थाने पहुंचकर अपना विरोध दर्ज कराया।