पिथौरागढ़:पिथौरागढ़ में चाइल्ड पोर्नोग्राफी मामले में तीन महिलाओं पर एफआईआर दर्ज की गई है। इस गंभीर मामले के सामने आने के बाद पूरे उत्तराखंड में हड़कंप मच गया है। भारत सरकार के गृह मंत्रालय के निर्देश पर हुई गहन जांच के बाद इन महिलाओं के सोशल मीडिया कारनामों का पर्दाफाश हुआ है। स्थानीय पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) और पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) के तहत मुकदमा दर्ज कर मामले की विस्तृत विवेचना शुरू कर दी है।
पुलिस से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, पिथौरागढ़ की रहने वाली ये महिलाएं लंबे समय से विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे फेसबुक, व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम के जरिए बच्चों से जुड़ी अश्लील वीडियो और तस्वीरें दूसरों को शेयर कर रही थीं। यह सिलसिला काफी समय से चल रहा था और कई लोगों तक इन प्रतिबंधित सामग्रियों को पहुंचाया जा चुका था। जब केंद्रीय गृह मंत्रालय की तकनीकी विंग और साइबर सेल की नजर इन संदिग्ध गतिविधियों पर पड़ी, तो तत्काल स्थानीय स्तर पर साइबर सेल को जांच के कड़े निर्देश जारी किए गए।
गृह मंत्रालय से निर्देश मिलने के बाद साइबर सेल पिथौरागढ़ ने सक्रियता दिखाई। टीम ने संबंधित महिलाओं के सोशल मीडिया अकाउंट्स को पूरी तरह से खंगाला और उनकी गतिविधियों पर पैनी नजर रखी। तकनीकी विश्लेषण और डिजिटल साक्ष्यों की जांच में गृह मंत्रालय द्वारा लगाए गए आरोप शत-प्रतिशत सही पाए गए। इसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपियों के मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले ले लिए हैं। इन मोबाइलों को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा जा रहा है ताकि डिलीट किए गए डेटा और नेटवर्क का पता लगाया जा सके।
इस पूरे सनसनीखेज मामले पर पुलिस उपाधीक्षक गोविंद बल्लभ जोशी ने बताया कि चाइल्ड पोर्नोग्राफी में शामिल होने के संबंध में तीनों महिलाओं के खिलाफ पर्याप्त और पुख्ता डिजिटल प्रमाण मिले हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। इस प्रकार के जघन्य और अनैतिक अपराधों में संलिप्त किसी भी व्यक्ति को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह महिला हो या पुरुष।
यह पहला मौका नहीं है जब सीमांत जनपद पिथौरागढ़ में इस तरह का घिनौना मामला सामने आया हो। इससे पहले भी जिले में चाइल्ड पोर्नोग्राफी के दो बड़े मामले उजागर हो चुके हैं। पूर्व में धारचूला के बलुवाकोट और सैणराथी में बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी अश्लील सामग्री प्रसारित करने के आरोप में दो अलग-अलग आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पुलिस और समाजशास्त्रियों के लिए सबसे ज्यादा हैरानी की बात यह है कि बलुवाकोट में पकड़े गए पिछले मामले में भी एक महिला की संलिप्तता पाई गई थी। महिलाओं का इस तरह के अपराधों में शामिल होना पुलिस प्रशासन के साथ-साथ समाज के लिए भी गहरी चिंता का विषय बन गया है। इसके अलावा पिछले महीने ही गंगोलीहाट क्षेत्र से भी साइबर पुलिस ने चाइल्ड पोर्नोग्राफी के एक मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
भारत में बच्चों के खिलाफ होने वाले डिजिटल और शारीरिक अपराधों को लेकर कानून बेहद सख्त हैं। देश में चाइल्ड पोर्नोग्राफी यानी बच्चों के यौन शोषण से संबंधित किसी भी प्रकार की अश्लील सामग्री का निर्माण करना, उसे अपने पास संग्रह करके रखना, किसी अन्य को साझा करना, देखना या इंटरनेट पर प्रसारित करना एक बेहद गंभीर और गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में आता है। यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम यानी पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) के तहत बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी हर एक सामग्री को पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया है।
इसके साथ ही देश के मजबूत तकनीकी कानून यानी सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की धारा 67B के तहत बच्चों से संबंधित किसी भी प्रकार की अश्लील सामग्री को इंटरनेट पर प्रकाशित करना, डाउनलोड करना, देखना, किसी को भेजना या डिजिटल माध्यम से प्रसारित करना पूरी तरह दंडनीय है। इस कानून का उल्लंघन करने पर पहली बार अपराध सिद्ध होने पर अधिकतम 5 वर्ष तक की कैद और 10 लाख रुपये तक के भारी-भरकम जुर्माने का प्रावधान है। वहीं अगर कोई व्यक्ति दोबारा इसी प्रकार का अपराध करते हुए पकड़ा जाता है, तो उसे अधिकतम 7 वर्ष तक की जेल और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना भुगतना पड़ता है। इसके अलावा यदि कोई व्यक्ति प्रत्यक्ष रूप से किसी बच्चे के यौन शोषण में शामिल रहता है या ऐसी सामग्री का निर्माण खुद करता है, तो परिस्थितियों की गंभीरता के आधार पर पॉक्सो एक्ट की अन्य गंभीर धाराओं में उम्रकैद या उससे भी अधिक कठोरतम सजा दी जा सकती है।