बागेश्वर (उत्तराखंड)। सावन मास के पहले सोमवार को बागनाथ की नगरी बागेश्वर से एक अत्यंत हृदयविदारक और दुखद घटना सामने आई है। जनपद के कपकोट क्षेत्र में शिवालय मंदिर के समीप एक 7 वर्षीय मासूम बच्चा सरयू नदी के तेज बहाव में बह गया। यह हादसा उस समय हुआ जब बच्चा अपनी मां के साथ सरयू नदी से पवित्र जल लेने गया था। सावन के पहले दिन जहां चारों ओर भक्ति का माहौल था, वहीं इस हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। लापता बच्चे की पहचान 7 वर्षीय राकेश के रूप में हुई है, जिसकी तलाश के लिए स्थानीय प्रशासन और पुलिस की टीमें जुटी हुई हैं।
मां के साथ जल भरने गया था मासूम
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सोमवार को सावन मास का पहला दिन होने के कारण बागेश्वर और कपकोट के शिवालयों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी थी। कपकोट निवासी कमला देवी भी सावन के पहले सोमवार पर पूजा-अर्चना के लिए शिवालय मंदिर पहुंची थीं। उनके साथ उनका 7 वर्षीय बेटा राकेश भी गया था। मंदिर परिसर के पास ही सरयू नदी प्रवाहित होती है। कमला देवी जब पूजा के लिए सरयू नदी से पानी भरने के लिए घाट की तरफ बढ़ीं, तो राकेश भी उनके साथ चला गया। नदी के किनारे पर जब पानी भरने का प्रयास किया जा रहा था, तभी अचानक राकेश का पैर फिसल गया। पैर फिसलते ही वह संतुलन खो बैठा और सीधे उफनती हुई सरयू नदी के तेज बहाव में समा गया।

युवक ने नदी में छलांग लगाकर बचाने का किया प्रयास
घटनास्थल पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जैसे ही राकेश नदी में गिरा, वहां चीख-पुकार मच गई। मौके पर मौजूद रोशन गड़िया नाम के एक स्थानीय युवक ने बिना एक पल गंवाए मासूम को बचाने के लिए सरयू नदी के तेज और ठंडे बहाव में छलांग लगा दी। रोशन गड़िया ने नदी में करीब 50 मीटर तक बहते हुए बच्चे का पीछा किया और उसे पकड़ने का भरसक प्रयास किया। हालांकि, पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण इन दिनों सरयू नदी का वेग अत्यंत तीव्र है। नदी के भयानक बहाव और तेज प्रवाह के आगे युवक की कोशिशें नाकाम साबित हुईं और वह राकेश तक नहीं पहुंच सका। देखते ही देखते मासूम राकेश पानी की तेज लहरों के बीच आंखों से ओझल हो गया।
पढ़ाई के लिए कपकोट में किराए पर रह रहा था परिवार
इस हादसे के बाद राकेश की माता कमला देवी का रो-रोकर बुरा हाल है। उन्होंने अत्यंत भावुक होते हुए बताया कि उनका बेटा राकेश कक्षा 2 का छात्र था। राकेश के पिता नारायण सिंह एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं और परिवार की आजीविका चलाते हैं। इस परिवार में दो बच्चे थे, जिसमें एक बड़ी बेटी और छोटा बेटा राकेश था। यह परिवार मूल रूप से लाहुर गांव का रहने वाला है, लेकिन बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने और उनका भविष्य संवारने के लिए वे वर्तमान में कपकोट में एक किराए के मकान में रह रहे थे। किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि सावन के पावन अवसर पर बच्चों की पढ़ाई के लिए गांव से शहर आया यह परिवार इस तरह की त्रासदी का शिकार हो जाएगा।
प्रशासनिक अमला मौके पर, खोजबीन अभियान जारी
सरयू नदी में बच्चे के बहने की सूचना मिलते ही कपकोट थाना पुलिस, स्थानीय प्रशासन की टीम और आपदा प्रबंधन दल तुरंत घटनास्थल पर पहुंच गए। स्थानीय ग्रामीणों और गोताखोरों की मदद से नदी में व्यापक सर्च ऑपरेशन (खोजबीन अभियान) शुरू कर दिया गया है। समाचार लिखे जाने तक जल पुलिस और स्थानीय लोग लगातार नदी के अलग-अलग मोड़ों और घाटों पर बच्चे की तलाश कर रहे थे। पहाड़ी इलाकों में मॉनसून के कारण नदियों का जलस्तर बढ़ा हुआ है और पानी मटमैला है, जिससे रेस्क्यू ऑपरेशन में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय निवासियों ने भगवान भोले शंकर से प्रार्थना की है कि इस संकट की घड़ी में पीड़ित परिवार को संबल और दुख सहन करने की शक्ति प्रदान करें। प्रशासन ने भी नदी तटों पर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए अलर्ट जारी करते हुए सावधानी बरतने की अपील की है।