जीएसटी समाधान योजना: रामनगर में छोटे व्यापारियों पर पेनल्टी कार्रवाई का भारी विरोध, टैक्स बार एसोसिएशन ने खोला मोर्चा
रामनगर (उत्तराखंड)। गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) के तहत समाधान योजना (Composition Scheme) में पंजीकृत छोटे और मध्यम व्यापारियों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। सरकारी विभागों द्वारा भुगतान न किए जाने और दूसरी तरफ कर विभाग द्वारा पेनल्टी के भारी-भरकम नोटिस भेजे जाने से नाराज व्यापारियों ने अब आंदोलन का रास्ता अख्तियार कर लिया है। इसी कड़ी में, रामनगर टैक्स बार एसोसिएशन ने राज्य कर विभाग के संयुक्त आयुक्त रोशन लाल से मुलाकात की और व्यापारियों पर की जा रही पेनल्टी की कार्रवाई पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने की मांग करते हुए एक ज्ञापन सौंपा।
एसोसिएशन का कहना है कि एक तरफ जहां व्यापारियों का लाखों रुपये का सरकारी भुगतान फंसा हुआ है, वहीं दूसरी तरफ विभाग द्वारा उन पर दंडात्मक कार्रवाई करना न्यायसंगत नहीं है। इस कार्रवाई से स्थानीय व्यापारी वर्ग में भारी आक्रोश और चिंता का माहौल है।
क्या है पूरा मामला और क्यों बढ़ा व्यापारियों का गुस्सा?
रामनगर टैक्स बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों के अनुसार, यह पूरा विवाद समाधान योजना (Composition Scheme) के अंतर्गत आने वाले छोटे व्यापारियों से जुड़ा है। इन व्यापारियों ने राज्य सरकार की विभिन्न विकास योजनाओं, विशेषकर मनरेगा (MGNREGA) के तहत ब्लॉक स्तर पर निर्माण सामग्री (जैसे- सीमेंट, ईंट, बजरी आदि) की आपूर्ति की थी।
व्यापारियों ने अपना काम तो समय पर पूरा कर दिया, लेकिन सरकारी सिस्टम की लेत-लतीफी के कारण पिछले दो से तीन वर्षों से उनका भुगतान ब्लॉक और संबंधित विभागों में लंबित पड़ा हुआ है। अब स्थिति यह है कि व्यापारियों के पास न तो अपनी अगली पूंजी बची है और न ही वे विभाग के नोटिसों का वित्तीय बोझ उठाने की स्थिति में हैं।
“न आईटीसी का लाभ, न ग्राहकों से टैक्स वसूली, फिर पेनल्टी क्यों?”
टैक्स बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता पूरन चन्द्र पाण्डे ने व्यापारियों का पक्ष रखते हुए कर प्रणाली की विसंगतियों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मीडिया को बताया:
”समाधान योजना (Composition Scheme) के अंतर्गत पंजीकृत छोटे व्यापारी न तो अपनी किसी खरीद पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का लाभ लेते हैं और न ही वे बिक्री के समय ग्राहकों से किसी भी प्रकार का कर (Tax) वसूलते हैं। इसके बावजूद इन पर इस तरह की सख्त कार्रवाई करना पूरी तरह से अनुचित है।”
अधिवक्ता पाण्डे ने आगे कहा कि जब व्यापारियों को खुद सरकार से उनका पैसा नहीं मिला है, तो वे अपनी जेब से भारी जुर्माना कैसे भर सकते हैं? सरकार को पहले अपने विभागों को भुगतान सुचारू करने के निर्देश देने चाहिए।
कर निर्धारण और पेनल्टी नोटिस से सहमे व्यापारी
एसोसिएशन के उपसचिव अधिवक्ता मनु अग्रवाल ने इस मामले में कर विभाग की कार्यप्रणाली पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जिन व्यापारियों को पिछले कुछ समय में सरकारी विभागों से आंशिक या थोड़ा-बहुत भुगतान प्राप्त हुआ था, उन्होंने पूरी ईमानदारी दिखाते हुए उस राशि पर बनने वाला देय कर (Tax) तुरंत सरकारी खजाने में जमा कर दिया था।
इसके बावजूद, अभी भी बड़ी संख्या में ऐसे व्यापारी हैं जिनका लाखों रुपये का भुगतान ब्लॉक कार्यालयों और अन्य सरकारी विभागों पर बकाया है। श्री अग्रवाल ने आरोप लगाया:
- ब्लॉक से डेटा जुटाकर कार्रवाई: राज्य कर विभाग ब्लॉक कार्यालयों से सूचनाएं और डेटा एकत्र कर रहा है।
- अंधाधुंध नोटिस: इस डेटा के आधार पर संबंधित व्यापारियों को बिना जमीनी हकीकत जाने कर निर्धारण (Tax Assessment) और भारी पेनल्टी के नोटिस जारी किए जा रहे हैं।
- आर्थिक मानसिक उत्पीड़न: इन एकतरफा नोटिसों के कारण छोटे व्यापारियों का मानसिक और आर्थिक उत्पीड़न हो रहा है।
ब्याज चुकाने के बाद भी नहीं मिली राहत
रामनगर टैक्स बार एसोसिएशन ने ज्ञापन में इस बात का भी विशेष उल्लेख किया है कि कई छोटे व्यापारियों ने कानून का सम्मान करते हुए और अपने अधिवक्ताओं (Tax Consultants) की सलाह पर अपनी जमा-पूंजी से कर और उस पर लगे ब्याज का भुगतान भी कर दिया है। यह सब तब किया गया जब उन्हें खुद सरकारी महकमों से उनके काम का बकाया पैसा नहीं मिला था।
ऐसी अत्यंत विपरीत परिस्थितियों में भी विभाग द्वारा पेनल्टी (जुर्माना) वसूलने की जिद करना छोटे व्यापारियों की कमर तोड़ने जैसा है। यह अतिरिक्त आर्थिक बोझ छोटे उद्योगों और स्थानीय व्यापार को पूरी तरह बर्बाद कर देगा।
टैक्स बार एसोसिएशन की मुख्य मांगें
व्यापारियों के हितों की रक्षा के लिए रामनगर टैक्स बार एसोसिएशन ने संयुक्त आयुक्त रोशन लाल के माध्यम से राज्य सरकार और कर विभाग के सम्मुख निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखी हैं:
- पेनल्टी कार्रवाई पर तुरंत रोक: समाधान योजना के अंतर्गत आने वाले सभी छोटे व्यापारियों के खिलाफ शुरू की गई पेनल्टी संबंधी कार्यवाहियों को तत्काल समाप्त किया जाए।
- एमनेस्टी स्कीम का लाभ: सरकार द्वारा समय-समय पर लागू की जाने वाली ब्याज एवं पेनल्टी माफी योजनाओं (Amnesty Schemes) का लाभ इन कंपोजिशन स्कीम वाले व्यापारियों को भी अनिवार्य रूप से दिया जाए।
- रुके भुगतान का त्वरित निस्तारण: मनरेगा और अन्य विकास योजनाओं के तहत व्यापारियों के फंसे हुए शत-प्रतिशत भुगतान को जल्द से जल्द रिलीज कराने के लिए संबंधित विभागों को निर्देशित किया जाए।
उग्र आंदोलन की चेतावनी
ज्ञापन के अंत में एसोसिएशन ने कर विभाग और प्रदेश सरकार को दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है। एसोसिएशन का कहना है कि यदि व्यापारियों की इन जायज समस्याओं का शीघ्र और सकारात्मक समाधान नहीं निकाला गया, तो क्षेत्र का व्यापारी वर्ग गंभीर आर्थिक संकट के दलदल में फंस जाएगा। ऐसी स्थिति में टैक्स बार एसोसिएशन व्यापारियों के साथ मिलकर सड़क पर उतरने और उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।