भारत के सबसे जहरीले सांप ‘कॉमन करैत’ ने मचाया कोहराम, पानी की टंकी में दिखा खौफनाक मंजर!
नैनीताल(उत्तराखंड)।उत्तराखंड के नैनीताल जिले से एक ऐसी रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया। हल्दूचौड़ क्षेत्र के परमा गांव में शनिवार की सुबह किसी आम दिन की तरह शुरू हुई थी, लेकिन देखते ही देखते वहां दहशत का माहौल बन गया। गांव के रहने वाले मथुरा दत्त अपने घर में बनी अंडरग्राउंड पानी की टंकी की सफाई करने पहुंचे थे। दिनचर्या के हिसाब से उन्होंने जैसे ही भारी-भरकम ढक्कन हटाया, अंदर का नजारा देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई और आंखें फटी की फटी रह गईं।
पानी से लबालब भरी टंकी के अंदर कोई साधारण जीव नहीं, बल्कि भारत का सबसे जहरीला और घातक सांप ‘कॉमन करैत’ (Common Krait) अपने सात नन्हें बच्चों के साथ तैर रहा था। लेकिन खौफ की कहानी सिर्फ इसके मिलने तक सीमित नहीं थी; असली दिल दहला देने वाला सच तो इसके बाद सामने आया। भूख और तड़प से बेहाल वह खूंखार सांप ज़िंदा रहने की जंग में इतना हैवान बन चुका था कि पानी में तैरते हुए अपने ही बच्चों को एक-एक करके निवाला बना रहा था!
साइलेंट किलर ‘कॉमन करैत’: भूख से बेहाल होकर अपने ही बच्चों को ज़िंदा निगला
कॉमन करैत को भारत के सबसे खतरनाक और न्यूरोटॉक्सिक जहर वाले ‘बिग फोर’ सांपों में सबसे ऊपर गिना जाता है। जिस टंकी का पानी परिवार रोजमर्रा के कामों में इस्तेमाल कर रहा था, उसी गहरे पानी में यह खूंखार ‘साइलेंट किलर’ तैर रहा था। मथुरा दत्त ने जब ध्यान से नीचे झांका, तो उनका दिल दहल गया। वह करैत सांप अपनी ही औलाद को पेट की आग बुझाने के लिए ज़िंदा निगल रहा था। देखते ही देखते वह तीन मासूम बच्चों को डकार चुका था और बाकी बचे चार बच्चे पानी की सतह पर किसी तरह अपनी जान बचाने के लिए छटपटा रहे थे।
यदि कुछ मिनट और देरी होती या मथुरा दत्त का ध्यान उस तरफ न जाता, तो शायद कोई भी बच्चा जीवित न बचता और वही जहरीला पानी पूरे परिवार के लिए बेहद घातक साबित हो सकता था। इस दृश्य को देखते ही मथुरा दत्त के रोंगटे खड़े हो गए। उन्होंने बिना एक पल गंवाए तुरंत हिम्मत जुटाई और वन विभाग की स्नेक रेस्क्यू टीम को फोन मिलाया।
मौत के कुएं में उतरी रेस्क्यू टीम, बेहद सावधानी से बची चार मासूमों की जान
सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम दलबल और रेस्क्यू उपकरणों के साथ परमा गांव पहुंची। टंकी के अंदर बेहद खतरनाक ‘कॉमन करैत’ की मौजूदगी के कारण यह ऑपरेशन बेहद नाजुक था, क्योंकि इस सांप का जहर इंसान के नर्वस सिस्टम पर सीधा हमला करता है। करैत का गुस्सा चरम पर था और वह रह-रहकर फुंकार मार रहा था।
वन विभाग के जांबाज सदस्यों ने बेहद सूझबूझ और सावधानी के साथ ऑपरेशन शुरू किया। विशेष रेस्क्यू स्टिक और हुक की मदद से सबसे पहले आक्रामक हो चुके कॉमन करैत को काबू में किया गया। इसके बाद पानी में तैर रहे बचे हुए चार मासूम बच्चों को बेहद संभालकर बाहर निकाला गया। करीब घंटे भर चले इस हाई-वोल्टेज रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद जब सभी जीवों को सुरक्षित कंटेनर में बंद किया गया, तब जाकर ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। बाद में वन टीम ने मां सांप और उसके चारों जीवित बच्चों को गहरे सुरक्षित जंगल में ले जाकर आजाद कर दिया।
गांव में मचा हड़कंप, बाल-बाल बचा पूरा परिवार
टंकी में भारत के सबसे जहरीले सांप के मिलने की खबर जंगल में आग की तरह पूरे परमा गांव और आसपास के हल्दूचौड़ क्षेत्र में फैल गई। देखते ही देखते मथुरा दत्त के घर के बाहर ग्रामीणों का भारी जमावड़ा लग गया। हर कोई इस रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना की चर्चा कर रहा था। लोगों का कहना था कि जिस पानी को लोग रोजाना इस्तेमाल कर रहे थे, उसमें इस कदर कातिल जीव मौजूद था और किसी को कानों-कान खबर तक नहीं हुई। गनीमत यह रही कि मथुरा दत्त ने सफाई के वक्त वक्त रहते ढक्कन खोलकर देख लिया, वरना कोई बहुत बड़ा अनर्थ हो सकता था।
मानसून में बेहद सावधान रहें! ‘कॉमन करैत’ से बचाव के लिए जरूरी बातें
घटना के बाद वन विभाग ने स्थानीय निवासियों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण गाइडलाइन जारी की है। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून और बरसात के सीजन में बिलों में पानी भरने के कारण ‘कॉमन करैत’ जैसे जहरीले सांप सूखी और सुरक्षित जगहों की तलाश में इंसानी बस्तियों की तरफ रुख करते हैं।
यह सांप अक्सर रात के अंधेरे में निकलता है और नमी या सूखी जगह की तलाश में घरों के अंदर छिप जाता है। ऐसे में वन विभाग ने सलाह दी है कि:
- अपनी अंडरग्राउंड और ओवरहेड पानी की टंकियों के ढक्कन हमेशा एयरटाइट बंद रखें और समय-समय पर सफाई के साथ जांच करते रहें।
- घर के आसपास कबाड़, ईंट-पत्थर या सूखी झाड़ियों का ढेर न जमने दें।
- रात में या अंधेरे स्थानों पर जाते समय टॉर्च की रोशनी का इस्तेमाल जरूर करें।
- ’कॉमन करैत’ या किसी भी जहरीले सांप के दिखने पर उसे छेड़ने या खुद पकड़ने की गलती न करें, तुरंत वन विभाग या प्रशिक्षित स्नेक सेवर को सूचित करें।