लगातार बारिश और नदियों के उफान ने बदले हालात, गांवों में घुसा पानी, हजारों परिवारों पर टूटा संकट
गुवाहाटी। असम में मानसून के दौरान आई भीषण बाढ़ ने एक बार फिर राज्य के सामने बड़ी मानवीय और प्राकृतिक चुनौती खड़ी कर दी है। जून–जुलाई 2026 में लगातार हुई भारी बारिश और कई नदियों के जलस्तर बढ़ने के कारण राज्य के कई जिले बाढ़ की चपेट में आ गए। देखते ही देखते कई गांव जलमग्न हो गए, लोगों का सामान्य जीवन प्रभावित हुआ और बड़ी संख्या में परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा।
इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 82 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 1.93 लाख लोग अभी भी प्रभावित बताए जा रहे हैं। हालांकि कई इलाकों में बाढ़ का पानी धीरे-धीरे कम हो रहा है, लेकिन प्रभावित परिवारों के सामने घरों की मरम्मत, फसल नुकसान और आजीविका वापस पटरी पर लाने की बड़ी चुनौती बनी हुई है।

कैसे शुरू हुई असम में बाढ़ की स्थिति?
असम में हर साल मानसून के दौरान बाढ़ की समस्या सामने आती है, लेकिन इस बार लगातार बारिश ने हालात को गंभीर बना दिया। जून महीने से ही कई इलाकों में भारी बारिश शुरू हो गई थी। बारिश बढ़ने के साथ ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों का जलस्तर बढ़ने लगा और निचले इलाकों में पानी भरना शुरू हो गया।
शुरुआत में स्थानीय स्तर पर जलभराव की समस्या सामने आई, लेकिन लगातार बारिश के कारण बाढ़ का दायरा बढ़ता चला गया। कई गांवों का संपर्क टूट गया और प्रशासन को राहत एवं बचाव अभियान शुरू करना पड़ा।

बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित जनजीवन
बाढ़ का सबसे ज्यादा असर ग्रामीण इलाकों पर पड़ा। कई परिवारों के घरों में पानी घुस गया। लोगों को जरूरी सामान लेकर सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों में जाना पड़ा।
प्रभावित लोगों के सामने कई तरह की समस्याएं खड़ी हुईं—
- रहने के लिए सुरक्षित जगह की कमी
- पीने के पानी की समस्या
- भोजन और दवाइयों की जरूरत
- पशुधन को बचाने की चुनौती
- खेतों और फसलों का नुकसान
कई किसानों के लिए यह बाढ़ आर्थिक नुकसान का कारण बनी है, क्योंकि पानी भरने से कृषि भूमि प्रभावित हुई और तैयार फसलें खराब हुईं।

राहत और बचाव अभियान
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राज्य सरकार, जिला प्रशासन, NDRF और SDRF की टीमें लगातार राहत और बचाव कार्यों में जुटी रहीं। नावों के माध्यम से लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया और राहत शिविरों में भोजन, पानी तथा चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं।
अब जब कई क्षेत्रों में पानी उतर रहा है, प्रशासन का ध्यान राहत के साथ-साथ पुनर्वास पर भी केंद्रित हो गया है।

केंद्र सरकार ने दी आर्थिक सहायता
असम में बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने सहायता राशि मंजूर की है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने असम के लिए SDRF के तहत करीब 379 करोड़ रुपये की सहायता को मंजूरी दी है। यह राशि राहत, पुनर्वास और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे की मरम्मत में उपयोग की जाएगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी राज्य सरकार को केंद्र की ओर से हरसंभव मदद का भरोसा दिया है।

सरकार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती: पुनर्वास
बाढ़ का पानी कम होने के बाद सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित लोगों को दोबारा सामान्य जीवन में लौटाना है।
कई परिवारों के मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कें, पुल और अन्य सुविधाएं प्रभावित हुई हैं। ऐसे में सरकार के सामने राहत सामग्री पहुंचाने के साथ-साथ स्थायी समाधान की चुनौती भी है।
असम सरकार ने भी कहा है कि फिलहाल प्राथमिकता राहत और पुनर्वास है। इसके बाद बाढ़ के मूल कारणों और भविष्य में ऐसी आपदाओं से निपटने की रणनीति पर विचार किया जाएगा।

क्यों हर साल आती है असम में बाढ़?
असम भौगोलिक रूप से बाढ़ प्रभावित राज्य है। ब्रह्मपुत्र नदी और उसकी कई सहायक नदियां मानसून के दौरान तेजी से बढ़ती हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बारिश का असर भी मैदानी इलाकों में दिखाई देता है।
नदी कटाव, बदलता मौसम चक्र, लगातार बारिश और नदी क्षेत्रों में बढ़ता दबाव बाढ़ की समस्या को और गंभीर बनाते हैं।

वन्यजीवन पर भी असर
असम के कई जंगल और संरक्षित क्षेत्र भी बाढ़ की चपेट में आते हैं। पानी बढ़ने से वन्यजीवों के सामने भी खतरा पैदा हो जाता है। ऐसे समय में वन विभाग की टीमें जानवरों की सुरक्षा और निगरानी में जुटती हैं।
मौसम विभाग की चेतावनी
मानसून सक्रिय रहने के कारण प्रशासन अभी भी सतर्क है। भारी बारिश की संभावना वाले क्षेत्रों में लोगों से सावधानी बरतने की अपील की गई है। नदियों के किनारे रहने वाले लोगों को जलस्तर पर नजर रखने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने को कहा गया है।

अब आगे क्या?
असम की इस बाढ़ ने एक बार फिर दिखाया है कि केवल राहत कार्य पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि लंबे समय के लिए बाढ़ प्रबंधन की जरूरत है।
विशेषज्ञों के अनुसार, नदी प्रबंधन, मजबूत तटबंध, बेहतर चेतावनी प्रणाली और आपदा तैयारी को मजबूत करके भविष्य के नुकसान को कम किया जा सकता है।
फिलहाल प्रशासन के सामने दोहरी जिम्मेदारी है—एक ओर प्रभावित लोगों को तत्काल राहत देना और दूसरी ओर उन्हें दोबारा सुरक्षित और स्थायी जीवन की ओर लौटाना।
असम की बाढ़ अब केवल एक प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि हजारों परिवारों के पुनर्निर्माण की बड़ी चुनौती बन चुकी है।