रामनगर। मानसून की दस्तक और लगातार हो रही बारिश के साथ ही कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों की सुरक्षा का पैमाना पूरी तरह बदल दिया गया है। बारिश के मौसम में उफनती नदियों, घने जंगलों और दुर्गम रास्तों की आड़ लेकर शिकार और अवैध घुसपैठ जैसी गतिविधियों की आशंका काफी बढ़ जाती है। इसी खतरे से निपटने के लिए कॉर्बेट प्रशासन ने इस बार पारंपरिक फ्लैग मार्च से अलग हटकर एक अभेद्य सुरक्षा चक्र तैयार किया है। इसके तहत बिजरानी रेंज, सर्पदुली रेंज, रामनगर वन प्रभाग की कोसी रेंज, सुरक्षा इकाई, एसटीएफ और स्थानीय पुलिस की टीमों को एक साथ मैदान में उतारा गया है।

इस विशेष सुरक्षा अभियान की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी डॉग स्क्वाड और एसटीएफ की संयुक्त तैनाती है। केवल हाईवे पर गश्त करने के बजाय, यह टीम घने वन क्षेत्रों और संवेदनशील गलियारों में गहराई तक उतरकर कॉम्बिंग कर रही है। धनगढ़ी गेट से शुरू हुआ यह व्यापक अभियान गर्जिया, सुन्दरखाल, और ढिकुली से गुजरते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-309 पर केंद्रित रहा। इसके बाद टीमों ने कोटद्वार रोड, चोरपानी, कानिया, सेमलखलिया और हिम्मतपुर ढोटियाल जैसे आबादी से सटे और संवेदनशील इलाकों को कवर करते हुए सावल्दे वन परिसर तक अपनी पहुंच बनाई।
इस पूरे रूट के दौरान केवल मार्च ही नहीं निकाला गया, बल्कि संदिग्ध अवस्था में घूम रहे व्यक्तियों को रोककर उनसे कड़ी पूछताछ की गई। मानसून के दौरान अक्सर बाहरी लोग या आपराधिक प्रवृत्ति के तत्व जंगलों के आसपास सक्रिय होने की कोशिश करते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए नेशनल हाईवे-309 से गुजरने वाले संदिग्ध वाहनों और वन सीमाओं से सटे रिहायशी इलाकों में चौकसी कई गुना बढ़ा दी गई है।

अभियान का नेतृत्व कर रहे उप प्रभागीय वनाधिकारी बिन्दर पाल और बिजरानी रेंज के वन क्षेत्राधिकारी नवीन चन्द्र पाण्डे ने उपस्थित समस्त स्टाफ को ब्रीफ करते हुए स्पष्ट किया कि मानसून सत्र के दौरान गश्त में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। वन कर्मियों को नियमित कॉम्बिंग के साथ-साथ रात के समय विशेष ‘नाइट एम्बुश’ (छुपकर नजर रखना) लगाने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। रात के अंधेरे और बारिश का फायदा उठाकर जंगल में अवैध रूप से प्रवेश करने वालों पर इस रणनीति से सीधा प्रहार किया जाएगा।
सुरक्षा चक्र का एक दूसरा बड़ा आयाम मानव-वन्यजीव संघर्ष (Human-Wildlife Conflict) को रोकना भी है। बारिश के दिनों में जलभराव और भोजन की तलाश में बाघ, हाथी और अन्य वन्यजीव अक्सर जंगलों से निकलकर सड़कों और पास के गांवों का रुख कर लेते हैं। इसे रोकने के लिए वन विभाग की टीमें उन संभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर रही हैं जहां वन्यजीवों की आवाजाही अधिक रहती है, ताकि ग्रामीणों और वन्यजीवों दोनों को सुरक्षित रखा जा सके।
अभियान के दौरान वन विभाग ने स्थानीय ग्रामीणों और आम जनता के साथ सीधा संवाद स्थापित किया। अधिकारियों ने अपील की है कि मानसून के दौरान सुरक्षा के दृष्टिकोण से कोई भी व्यक्ति जंगल के भीतर प्रवेश न करे। साथ ही, यदि क्षेत्र में कोई भी अनजान या संदिग्ध गतिविधि वाला व्यक्ति दिखाई दे, तो उसकी सूचना तुरंत नजदीकी वन चौकी या पुलिस गार्ड को दें ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।
इस वृहद सुरक्षा अभियान में सर्पदुली रेंज के वन क्षेत्राधिकारी संजय कुमार पाण्डे, वन आरक्षी प्रमोद कुमार सत्यवली, मोहन चन्द्र उप्रेती, प्रमोद डोर्बी, कृष्ण चन्द्र पंत, प्रवेश कुमार, संदीप सिंह, सुरक्षा इकाई से संतोष बिष्ट, महेश बौड़ाई, एसटीएफ से वन दरोगा मुकेश सिंह, नवीन चन्द्र आर्या तथा पुलिस गार्ड से मनोज कुमार और मनोज ध्यानी सहित कॉर्बेट टाइगर रिजर्व और रामनगर वन प्रभाग का पूरा अमला तैनात रहा।