रामनगर के रामदत्त जोशी अस्पताल की हालत जर्जर: डॉक्टरों और उपकरणों की कमी से त्रस्त जनता, 24 अगस्त को अस्पताल में होगा विशाल प्रदर्शन
रामनगर।उत्तराखंड के नैनीताल जिले के अंतर्गत आने वाले रामनगर क्षेत्र में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली को लेकर जन-आक्रोश चरम पर पहुँच गया है। स्थानीय रामदत्त जोशी संयुक्त चिकित्सालय की खस्ताहाल स्थिति और घटती सुविधाओं से परेशान जनता अब सड़कों पर उतरने की तैयारी में है। रामनगर और आसपास के विशाल ग्रामीण व पर्वतीय इलाकों के लिए एकमात्र मुख्य चिकित्सा केंद्र माना जाने वाला यह अस्पताल आज खुद ही इलाज की आस में दिख रहा है।
अस्पताल की बिगड़ी व्यवस्था और लगातार नजरअंदाज की जा रही मांगों को लेकर देवभूमि व्यापार मंडल सभागार में संयुक्त संघर्ष समिति की एक अहम बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में अस्पताल की वर्तमान स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए आंदोलन का बिगुल फूंक दिया गया है। समिति ने निर्णय लिया है कि रामनगर की गरीब जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं दिलाने के लिए 24 अगस्त को सुबह 11 बजे से रामदत्त जोशी संयुक्त चिकित्सालय परिसर में जोरदार धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।
100 बेड के अस्पताल में मानकों की अनदेखी
बैठक में उपस्थित वक्ताओं ने स्वास्थ्य तंत्र की लापरवाही उजागर करते हुए कहा कि रामदत्त जोशी संयुक्त चिकित्सालय 100 बेड की क्षमता वाला अस्पताल है। नियमों और मानकों के अनुसार यहाँ पूर्णकालिक विशेषज्ञ डॉक्टरों और पर्याप्त पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती होनी चाहिए। लेकिन धरातल पर स्थिति बेहद विकट है। निजीकरण और उपेक्षात्मक नीतियों के चलते अस्पताल की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है।
वर्तमान में यहाँ न तो फिजीशियन पर्याप्त संख्या में हैं और न ही सर्जन उपलब्ध हैं। बाल रोग विशेषज्ञ, स्त्री रोग विशेषज्ञ, नाक-कान-गला (ENT) विशेषज्ञ और चर्म रोग विशेषज्ञ जैसे महत्वपूर्ण विभागों में स्वीकृत पदों की तुलना में बेहद कम डॉक्टर तैनात हैं। चिंताजनक बात यह है कि कई महत्वपूर्ण विभागों में एक भी डॉक्टर मौजूद नहीं है, जिससे दूर-दराज से आने वाले मरीजों को बिना इलाज के ही लौटना पड़ता है या मजबूरी में महंगे निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है।
पैरामेडिकल स्टाफ और जांच उपकरणों का भारी अकाल
अस्पताल में केवल डॉक्टरों की ही कमी नहीं है, बल्कि बुनियादी जांच और प्रशासनिक ढांचा भी पंगु हो चुका है। बैठक में यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया कि अस्पताल में आधुनिक और जरूरी जांच मशीनों के साथ-साथ तकनीकी उपकरणों का भारी अभाव है। गंभीर अवस्था में आने वाले मरीजों को सामान्य जांचों के लिए भी बाहर के निजी पैथोलॉजी लैबों पर निर्भर रहना पड़ता है।
इसके अलावा फार्मासिस्ट, नर्सिंग सहायक और लैब तकनीशियन जैसे अति-आवश्यक पदों पर बड़ी संख्या में रिक्तियां पड़ी हुई हैं। कम स्टाफ होने के कारण मौजूद कर्मचारियों पर अत्यधिक दबाव रहता है, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं।
गरीब और पर्वतीय आबादी पर मंडराता संकट
रामनगर का यह सरकारी अस्पताल केवल स्थानीय शहर तक सीमित नहीं है। रामनगर के आसपास फैले दर्जनों गांवों और कुमाऊं के पर्वतीय क्षेत्रों की आर्थिक रूप से कमजोर जनता के लिए यह अस्पताल जीवनरेखा की तरह काम करता है। पहाड़ों से आने वाले मरीजों के लिए यह निकटतम और एकमात्र सहारा होता है। ऐसे में अस्पताल की बदहाली का सबसे सीधा और घातक असर निर्धन परिवारों पर पड़ रहा है, जो निजी अस्पतालों का भारी खर्च उठाने में पूरी तरह असमर्थ हैं।
आंदोलन की रणनीति और जन-भागीदारी
अस्पताल के बुनियादी ढांचे को बचाने और सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए संयुक्त संघर्ष समिति ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान किया है। 24 अगस्त को प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन के माध्यम से शासन-प्रशासन के समक्ष अस्पताल में रिक्त पदों को तुरंत भरने, आधुनिक चिकित्सा उपकरण उपलब्ध कराने और स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारू बनाने की मांग रखी जाएगी।
इस महत्वपूर्ण बैठक में देवभूमि व्यापार मंडल के संरक्षक मनमोहन अग्रवाल और महामंत्री मनिंदर सिंह सेठी, उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के अध्यक्ष प्रभात ध्यानी व मो. आसिफ, इंकलाबी मजदूर केंद्र के महासचिव रोहित रुहेला तथा समाजवादी लोक मंच के गिरीश चंद्र व ललित उप्रेती ने सक्रिय रूप से भाग लिया। सभी संगठनों ने एक स्वर में रामनगर की जनता से 24 अगस्त के प्रदर्शन में अधिक से अधिक संख्या में पहुँचकर इस संघर्ष को मजबूत बनाने की अपील की है।