रामनगर (उत्तराखंड): कर निर्धारण वर्ष 2026-27 के लिए आयकर रिटर्न (ITR) का प्रारूप अब तक जारी न होने के कारण करदाताओं और अधिवक्ताओं में भारी रोष व्याप्त है। वित्तीय वर्ष की शुरुआत हुए एक महीने से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन विभाग की ओर से स्पष्टता न होने के कारण बैंकिंग और वित्तीय कार्यों पर इसका सीधा असर पड़ रहा है।
समय पर फॉर्म न आने से रुके जरूरी काम
आमतौर पर आयकर विभाग एक अप्रैल तक रिटर्न फॉर्म जारी कर देता है। इस बार 30 दिन से अधिक की देरी हो चुकी है, जिससे उन लोगों को सबसे अधिक परेशानी हो रही है जिन्हें लोन प्रोसेसिंग, वीजा आवेदन या आय प्रमाण के लिए आईटीआर की आवश्यकता होती है। सरकारी और निजी क्षेत्रों के कर्मचारी अपने कर नियोजन (Tax Planning) को लेकर भी असमंजस में हैं।
टैक्स बार एसोसिएशन ने जताई चिंता
टैक्स बार एसोसिएशन, रामनगर के अध्यक्ष पूरन पांडे ने कहा कि रिटर्न फॉर्म समय पर जारी न होने से करदाताओं में अनिश्चितता का माहौल है। लोग प्रतिदिन कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन फॉर्म उपलब्ध न होने के कारण अधिवक्ता भी उनकी मदद करने में असमर्थ हैं। उन्होंने बताया कि विभाग की ओर से स्पष्ट दिशा-निर्देशों का अभाव स्थिति को और गंभीर बना रहा है।
वहीं, एसोसिएशन के उपसचिव मनु अग्रवाल ने तकनीकी पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही का टीडीएस रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 मई निर्धारित है। टीडीएस डेटा के समय पर अपडेट न होने और आईटीआर फॉर्म में देरी के कारण रिफंड मिलने और टैक्स की सही गणना करने में बाधा आ रही है।
तिथि बढ़ाने की मांग और विरोध प्रदर्शन
आयकर रिटर्न में हो रही इस देरी को लेकर टैक्स बार एसोसिएशन, रामनगर ने अपनी कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। अधिवक्ताओं का कहना है कि नियमानुसार फॉर्म 1 अप्रैल 2026 तक उपलब्ध हो जाने चाहिए थे। विभाग की इस लापरवाही का खामियाजा आम करदाताओं को भुगतना पड़ रहा है। वर्तमान में सरकार ने रिटर्न भरने के लिए 31 जुलाई तक का समय दिया है, लेकिन जब फॉर्म ही उपलब्ध नहीं हैं, तो करदाता प्रक्रिया शुरू कैसे करें?
इसी समस्या के समाधान हेतु एसोसिएशन ने मांग की है कि आयकर रिटर्न भरने की अंतिम तिथि 31 जुलाई से बढ़ाकर 30 सितंबर 2026 की जाए। अधिवक्ताओं का तर्क है कि जितना समय विभाग ने फॉर्म जारी करने में गंवाया है, उतना ही अतिरिक्त समय करदाताओं को मिलना चाहिए ताकि वे बिना किसी पेनल्टी या जल्दबाजी के अपना रिटर्न दाखिल कर सकें।
बैठक में रणनीति पर चर्चा
इस गंभीर मुद्दे को लेकर अधिवक्ताओं की एक विशेष बैठक आयोजित की गई। बैठक में उपस्थित विशेषज्ञों ने एक सुर में कहा कि यदि शीघ्र ही प्रारूप जारी नहीं किया जाता, तो करदाताओं पर अंतिम समय में भारी दबाव पड़ेगा।
इस अवसर पर प्रबल बंसल, भूपाल रावत, फिरोज अंसारी, मनोज अग्रवाल, लईक अहमद, नावेद सैफी और गुलरेज़ रज़ा समेत कई प्रमुख अधिवक्ता उपस्थित रहे। सभी ने विभाग से जल्द से जल्द पोर्टल अपडेट करने और सुचारू रूप से फॉर्म उपलब्ध कराने की अपील की है।
