मुख्य समाचार: साइबर ठगी के जाल में फंसे दिनेशपुर के युवा, दिल्ली पुलिस ने 5 को दबोचा
रुद्रपुर/दिनेशपुर: उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर जिले के अंतर्गत आने वाले दिनेशपुर क्षेत्र में साइबर अपराध के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर एक संयुक्त ऑपरेशन चलाया, जिसमें पांच युवकों को गिरफ्तार किया गया है। इन युवकों पर आरोप है कि वे अपने बैंक खातों का उपयोग साइबर ठगों को अवैध लेनदेन के लिए करने दे रहे थे। इस छापेमारी के बाद से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है।
कैसे हुआ कार्रवाई का खुलासा?
पिछले कुछ समय से देश के विभिन्न हिस्सों में साइबर ठगी की वारदातों में बढ़ोतरी देखी जा रही थी। दिल्ली पुलिस की साइबर टीम एक ऐसे नेटवर्क की जांच कर रही थी, जो ठगी गई रकम को अलग-अलग बैंक खातों के जरिए ठिकाने लगाता है। डिजिटल फुटप्रिंट्स और ट्रांजैक्शन हिस्ट्री का पीछा करते हुए पुलिस के तार उत्तराखंड के दिनेशपुर क्षेत्र से जुड़े। जांच में पाया गया कि स्थानीय स्तर पर सक्रिय कुछ युवकों के बैंक खातों में संदिग्ध रूप से बड़ी रकम का लेनदेन हो रहा है।
छापेमारी के दौरान मचा हड़कंप
पुख्ता जानकारी मिलने के बाद दिल्ली पुलिस की टीम दिनेशपुर पहुंची और स्थानीय थाना पुलिस के साथ समन्वय स्थापित किया। जैसे ही पुलिस की संयुक्त टीम ने संदिग्ध ठिकानों पर दबिश दी, पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। पुलिस ने मौके से समीर बाछाड़, राज बाछाड़, रोहित राय, रोहित मिस्त्री और हरीश सरकार को हिरासत में लिया। गिरफ्तारी के दौरान परिजनों की चीख-पुकार से माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया, लेकिन पुलिस ने साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई जारी रखी।
‘मनी म्यूल’ के रूप में हो रहा था इस्तेमाल
पुलिस की शुरुआती पूछताछ में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि ये युवक महज चंद हजार रुपयों के लालच में आकर अपने बैंक खाते साइबर अपराधियों को सौंप देते थे। साइबर जगत की भाषा में इन्हें ‘मनी म्यूल’ कहा जाता है। ये ऐसे लोग होते हैं जो साइबर ठगों के लिए उनके काले धन को इधर-उधर करने का जरिया बनते हैं।
ठगों का गिरोह अक्सर बेरोजगार युवाओं या कम पढ़े-लिखे लोगों को निशाना बनाता है और उन्हें कमीशन का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाता है या उनके निजी खातों की पासबुक, चेकबुक और एटीएम कार्ड अपने पास रख लेता है। देश भर में होने वाली ठगी की रकम सबसे पहले इन्हीं खातों में आती है और फिर वहां से अन्य लेयर्स के जरिए गायब कर दी जाती है।
पुलिस अधिकारियों का बयान
दिल्ली पुलिस साइबर सेल के सब-इंस्पेक्टर नरेश कुमार ने बताया कि साइबर अपराधों की जड़ों तक पहुंचने के लिए यह अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि डिजिटल ट्रांजैक्शन की गहन निगरानी की जा रही है और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भी पहचान की जा रही है।
वहीं, दिनेशपुर थाना प्रभारी निरीक्षक रविंद्र सिंह बिष्ट ने स्पष्ट किया कि उत्तराखंड पुलिस बाहरी राज्यों की पुलिस को पूरा सहयोग दे रही है ताकि अपराधियों पर शिकंजा कसा जा सके। उन्होंने स्थानीय युवाओं से अपील की है कि वे अपने बैंक खाते, ओटीपी या अन्य गोपनीय जानकारी किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करें, अन्यथा वे अनजाने में ही किसी बड़े अपराध का हिस्सा बन सकते हैं।
बढ़ता खतरा और बचाव
यह घटना उत्तराखंड के शांत इलाकों में पैर पसारते साइबर अपराधों की ओर इशारा करती है। साइबर अपराधी अब खुद को बचाने के लिए स्थानीय युवाओं को ढाल बना रहे हैं। कानूनी रूप से खाताधारक ही प्राथमिक तौर पर दोषी माना जाता है क्योंकि लेनदेन उसके खाते से होता है। ऐसे में यह गिरफ्तारी उन युवाओं के लिए एक चेतावनी है जो शॉर्टकट से पैसा कमाने की फिराक में रहते हैं।
