- पूर्व सैनिकों को मिला तोहफा, सीएम ने किया सीएसडी कैंटीन व सैनिक मिलन केन्द्र का लोकार्पण।
- मुख्यमंत्री का रोड शो में जनता व जनप्रतिनिधियों ने पुष्पवर्षा कर भव्य स्वागत किया।

खटीमा (उत्तराखंड)।उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी गुरुवार को अपने गृह क्षेत्र खटीमा के खेतलसंडा पहुँचे, जहाँ उन्होंने सेवा संकल्प धारिणी फाउंडेशन द्वारा आयोजित गौरव सैनिक सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। यह आयोजन मुख्यमंत्री के पिता स्वर्गीय सूबेदार शेर सिंह धामी की छठी पुण्यतिथि के अवसर पर किया गया था। इस भावुक क्षण में मुख्यमंत्री ने न केवल अपने पिता के संघर्षों को याद किया, बल्कि क्षेत्र के विकास के लिए 8.77 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली सीएसडी कैंटीन और सैनिक मिलन केंद्र का लोकार्पण भी किया।

विकास की सौगात: सैनिकों के कल्याण को प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने समारोह के दौरान 715.51 लाख रुपये की लागत से नवनिर्मित सीएसडी कैंटीन और 162.26 लाख रुपये से बने सैनिक मिलन केंद्र का उद्घाटन किया। इन परियोजनाओं का उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्र के पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को बेहतर सुविधाएँ प्रदान करना है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सैनिकों का कल्याण राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर है।

भावुक हुए मुख्यमंत्री: पिता के आदर्शों का उल्लेख
अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अत्यंत भावुक नजर आए। उन्होंने कहा, “आज से 6 वर्ष पूर्व का यह दिन मेरे जीवन का सबसे दुखद क्षण था जब मैंने अपने पिता को खोया। लेकिन उनके विचार, सिद्धांत और संघर्षपूर्ण जीवन आज भी हर कदम पर मेरा मार्गदर्शन करते हैं।” उन्होंने अपने बचपन की यादें साझा करते हुए बताया कि उनके पिता अपनी वर्दी को अत्यंत सम्मान के साथ रखते थे, जिससे उन्हें अनुशासन और जिम्मेदारी की सीख मिली। उन्होंने जोर देकर कहा कि राजनीति उनके लिए पद प्राप्त करने का जरिया नहीं, बल्कि जनसेवा का मार्ग है, जैसा कि उन्हें उनके पिता ने सिखाया था।

वीर नारियों और योद्धाओं का सम्मान
समारोह में मुख्यमंत्री ने शहीदों के चित्रों पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। गौरव सैनिक सम्मान समारोह के तहत उन्होंने 60 वीर नारियों और 80 वीर योद्धाओं को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि भले ही वह स्वयं सेना में नहीं हैं, लेकिन वह सैनिकों को ही अपना आदर्श मानते हैं और उन्हीं के पदचिन्हों पर चलकर राष्ट्र सेवा में संलग्न हैं।

रक्षा क्षेत्र में भारत की बढ़ती शक्ति
मुख्यमंत्री ने सूबेदार शेर सिंह धामी के सैन्य करियर का उल्लेख करते हुए बताया कि उन्होंने 28 वर्षों तक महार रेजिमेंट में सेवा दी और 1962, 1965, 1971 के युद्धों सहित ऑपरेशन ब्लूस्टार और ऑपरेशन रक्षक जैसे चुनौतीपूर्ण अभियानों में हिस्सा लिया। उन्होंने वैश्विक पटल पर भारत की बढ़ती सामरिक शक्ति पर गर्व जताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश रक्षा उत्पादन और निर्यात में आत्मनिर्भर बन रहा है। उन्होंने आंकड़े प्रस्तुत करते हुए बताया कि 2014-15 में रक्षा उत्पादन 46 हजार करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 1.54 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच गया है।

सैनिकों के लिए सरकार के बड़े फैसले
राज्य सरकार की योजनाओं का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि परमवीर चक्र विजेताओं को दी जाने वाली राशि को 50 लाख से बढ़ाकर डेढ़ करोड़ रुपये कर दिया गया है। देहरादून में भव्य सैन्य धाम का निर्माण किया जा रहा है और बलिदानियों के परिवारों के लिए सरकारी नौकरी की आवेदन अवधि को 2 वर्ष से बढ़ाकर 5 वर्ष कर दिया गया है।

समारोह में सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी, मुख्यमंत्री की माता विशना देवी, उनकी पत्नी गीता पुष्कर धामी सहित कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा, राम सिंह कैड़ा और कई अन्य जनप्रतिनिधि व अधिकारी उपस्थित रहे।
