रामनगर।रामनगर में विभिन्न सामाजिक और मजदूर संगठनों के प्रतिनिधियों ने शुक्रवार को गुड़गांव-मानेसर में चल रहे मजदूर आंदोलन पर हुए लाठीचार्ज और मजदूर नेताओं की गिरफ्तारी के विरोध में उपजिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन किया। इस दौरान हरियाणा के राज्यपाल के नाम ज्ञापन भेजते हुए मजदूरों के दमन को रोकने और उनकी मांगों को पूरा करने की मांग उठाई गई।
गुड़गांव-मानेसर के औद्योगिक क्षेत्र में चल रहे मजदूर आंदोलन की गूंज अब उत्तराखंड के रामनगर तक पहुंच गई है। शुक्रवार को यहां विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने एकजुट होकर आंदोलनरत मजदूरों के समर्थन में जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने उपजिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर हरियाणा के राज्यपाल के नाम ज्ञापन प्रेषित किया और मजदूरों पर हो रहे कथित दमन के खिलाफ कड़ी नाराजगी जताई।
प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि गुड़गांव-मानेसर क्षेत्र में पिछले एक सप्ताह से हजारों मजदूर अपनी मूलभूत मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। इनमें प्रमुख रूप से वेतन बढ़ोतरी और ठेका प्रथा समाप्त करने की मांग शामिल है। आंदोलन में होंडा, मुंजाल शोवा, सत्यम ऑटो, रुप पॉलीमार और रिचा ग्लोबल जैसी बड़ी कंपनियों के मजदूर शामिल हैं, जो लंबे समय से अस्थायी रोजगार और कम वेतन जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं।
वक्ताओं ने आरोप लगाया कि मजदूरों की जायज मांगों को सुनने के बजाय पुलिस और प्रशासन ने दमनात्मक रवैया अपनाया है। उनका कहना था कि 9 अप्रैल को आंदोलनरत मजदूरों पर पुलिस द्वारा लाठीचार्ज किया गया, जिसमें कई मजदूर घायल हुए। इतना ही नहीं, आंदोलन का नेतृत्व कर रहे कई प्रमुख मजदूर नेताओं को गिरफ्तार भी किया गया।
गिरफ्तार किए गए नेताओं में इंकलाबी मजदूर केंद्र से जुड़े श्यामबीर, हरीश और राजू के अलावा बेलसोनिका यूनियन के महासचिव अजीत और मुंजाल शोवा के मजदूर नेता आकाश शामिल थे। हालांकि, मजदूरों के भारी विरोध और जनदबाव के चलते देर रात सभी को रिहा कर दिया गया। प्रदर्शनकारियों ने इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की।
प्रदर्शन के दौरान यह भी कहा गया कि सरकार और प्रशासन का यह रवैया पूंजीपतियों के पक्ष में और मजदूर विरोधी है। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि देशी-विदेशी कंपनियों के दबाव में आकर मजदूरों की आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है, जो कि पूरी तरह से अस्वीकार्य है।
ज्ञापन के माध्यम से प्रदर्शनकारियों ने कई महत्वपूर्ण मांगें रखीं। उन्होंने बढ़ती महंगाई को ध्यान में रखते हुए न्यूनतम वेतन 30 हजार रुपये प्रतिमाह तय करने की मांग की। इसके अलावा ठेका प्रथा को पूरी तरह समाप्त कर सभी स्थायी काम कर रहे मजदूरों को स्थायी दर्जा देने की बात कही गई।
प्रदर्शनकारियों ने यह भी मांग की कि मजदूरों पर हो रहे दमन को तुरंत रोका जाए और हाल ही में लागू किए गए चार नए श्रम कानूनों (लेबर कोड) को रद्द किया जाए, जिन्हें उन्होंने मजदूर विरोधी बताया।
इस विरोध प्रदर्शन में कई संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इनमें प्रगतिशील महिला एकता केंद्र की तुलसी छिंवाल, आनंदी, दीपा रावत और गीता देवी, उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के प्रभात ध्यानी और चिंताराम, इंकलाबी मजदूर केंद्र के भुवन चंद्र और उबैदुल हक, परिवर्तनकामी छात्र संगठन के रवि कुमार और प्रीति, तथा प्रगतिशील जन एकता मंच के लालमणी प्रमुख रूप से शामिल रहे।
प्रदर्शन के अंत में सभी संगठनों ने एक स्वर में चेतावनी दी कि यदि मजदूरों की मांगों पर जल्द ध्यान नहीं दिया गया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। साथ ही उन्होंने देशभर के मजदूर संगठनों से एकजुट होकर इस संघर्ष का समर्थन करने की अपील भी की।
