रामनगर।रामनगर में तराई पश्चिमी वन प्रभाग के फाटो जोन में करीब एक हफ्ते पहले गंभीर रूप से घायल एक बाघिन को वन विभाग की टीम ने रेस्क्यू किया. डीएफओ प्रकाश आर्य के निर्देशन में डॉक्टर दुष्यंत शर्मा की टीम ने रात करीब 8 बजे ट्रैंक्यूलाइज कर जंगल में ही उसका इलाज किया. बाघिन के गले और सिर पर गहरे घाव थे, लेकिन समय रहते उपचार मिलने से अब उसकी हालत स्थिर है।
रामनगर क्षेत्र से एक राहत भरी खबर सामने आई है, जहां तराई पश्चिमी वन प्रभाग के अंतर्गत आने वाले फाटो जोन में गंभीर रूप से घायल एक बाघिन का सफल रेस्क्यू किया गया है। इस पूरे ऑपरेशन को वन विभाग की टीम ने बेहद सावधानी और रणनीति के साथ अंजाम दिया, जिससे बाघिन की जान बचाई जा सकी।
जानकारी के अनुसार, करीब एक सप्ताह पहले फाटो जोन में घूमने आए कुछ पर्यटकों की नजर एक घायल बाघिन पर पड़ी। बाघिन के गले और सिर पर गहरे घाव दिखाई दे रहे थे, जिससे उसकी हालत काफी नाजुक लग रही थी। पर्यटकों ने बिना देर किए इस मामले की सूचना वन विभाग को दी, जिसके बाद विभाग तुरंत सक्रिय हो गया।
वन विभाग ने मामले की गंभीरता को समझते हुए रेस्क्यू ऑपरेशन की योजना बनाई। डीएफओ प्रकाश आर्य के निर्देशन में कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के वरिष्ठ चिकित्साधिकारी डॉक्टर दुष्यंत शर्मा के नेतृत्व में एक विशेषज्ञ टीम गठित की गई। टीम ने मौके पर पहुंचकर बाघिन की स्थिति का आंकलन किया और उसे सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू करने की रणनीति बनाई।
दो दिन पहले रात करीब 8 बजे टीम ने ऑपरेशन को अंजाम देते हुए बाघिन को सफलतापूर्वक ट्रैंक्यूलाइज किया। यह प्रक्रिया बेहद संवेदनशील होती है, क्योंकि जरा सी चूक जानवर और टीम दोनों के लिए खतरा बन सकती है। लेकिन टीम के अनुभव और सतर्कता के चलते यह ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा।
डॉक्टर दुष्यंत शर्मा के अनुसार, बाघिन की उम्र लगभग 8 वर्ष आंकी गई है और उसके गले के पास गंभीर चोटें थीं। रेस्क्यू के तुरंत बाद टीम ने मौके पर ही उसका उपचार शुरू कर दिया। विशेषज्ञों ने निर्णय लिया कि बाघिन को रेस्क्यू सेंटर ले जाने के बजाय जंगल में ही इलाज किया जाए, ताकि उसे अनावश्यक तनाव से बचाया जा सके।
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि घायल जानवरों को ट्रांसपोर्ट करना कई बार उनके लिए खतरनाक साबित हो सकता है। ऐसे में प्राकृतिक वातावरण में ही उपचार करना बेहतर विकल्प होता है। इसी को ध्यान में रखते हुए टीम ने जंगल में ही बाघिन के इलाज का फैसला लिया।
पिछले दो दिनों से बाघिन का लगातार मौके पर इलाज किया जा रहा था। उसे आवश्यक दवाइयां दी गईं और उसकी स्थिति पर बारीकी से नजर रखी गई। डॉक्टरों के अनुसार, बाघिन दवाओं पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दे रही है, जिससे उसकी हालत में तेजी से सुधार हुआ है।
रेस्क्यू टीम ने रात 8 बजे से लेकर देर रात तक लगातार उपचार किया और अब बाघिन की स्थिति स्थिर बताई जा रही है। फिलहाल वन विभाग की टीम बाघिन की लगातार निगरानी कर रही है, ताकि उसके स्वास्थ्य में किसी भी तरह की गिरावट न आए।
इस पूरे घटनाक्रम पर तराई पश्चिम क्षेत्र में टूरिज्म से जुड़े नेचर गाइड मनमोहन सिंह बिष्ट ने भी संतोष जताया है। उन्होंने कहा कि वन विभाग की तत्परता और सही फैसले की वजह से बाघिन अब स्वस्थ हो रही है और वह क्षेत्र में लगातार दिखाई भी दे रही है।
यह रेस्क्यू ऑपरेशन वन विभाग की कार्यकुशलता और वन्यजीव संरक्षण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का एक बेहतरीन उदाहरण है। समय पर की गई कार्रवाई ने एक दुर्लभ और महत्वपूर्ण वन्यजीव की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई है।
