गुरुग्राम। गुरुग्राम-मानेसर क्षेत्र में पुलिस द्वारा मजदूर संगठनों से जुड़े कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इंक़लाबी मजदूर केंद्र ने इस कार्रवाई को साजिश और दमन चक्र करार देते हुए इसके खिलाफ व्यापक एकजुटता की अपील की है। संगठन का कहना है कि यह कदम मजदूर आंदोलनों को दबाने की कोशिश है और इसकी निष्पक्ष न्यायिक जांच होनी चाहिए।
गिरफ्तारी को बताया साजिश
संगठन के अनुसार, पुलिस ने कार्यकर्ताओं—श्यामवीर, हरीश, राजू, बेलासोनिका के अजीत, पिंटू यादव और गुंजन शौका—को गिरफ्तार किया है। इन सभी पर 9 अप्रैल को हुई तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाओं में शामिल होने का आरोप लगाया गया है।
इंकलाबी मजदूर केंद्र ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि गिरफ्तार किए गए लोग मजदूर अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले कार्यकर्ता हैं और उन्हें झूठे मामलों में फंसाया जा रहा है।
घटना की न्यायिक जांच की मांग
संगठन का कहना है कि 9 अप्रैल की घटना के लिए मजदूर या उनके संगठन जिम्मेदार नहीं हैं। इसके बजाय विभिन्न फैक्ट्री प्रबंधन से जुड़े लोग और प्रशासनिक तंत्र इस घटना के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं।
इसलिए संगठन ने पूरे मामले की न्यायिक जांच की मांग की है, ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों पर उचित कार्रवाई हो सके।
सरकार और पूंजीपतियों पर आरोप
प्रेस नोट में यह भी आरोप लगाया गया है कि देशी-विदेशी पूंजीपतियों के दबाव में मजदूर आंदोलनों को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। संगठन का कहना है कि केंद्र और राज्य सरकारें इस दबाव के आगे झुककर मजदूर विरोधी नीतियां लागू कर रही हैं।
संगठन के अनुसार, मजदूर नेताओं की गिरफ्तारी इसी रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य मजदूरों की एकता को तोड़ना और उनके अधिकारों की आवाज को दबाना है।
मजदूर संगठनों से एकजुट होने की अपील
इंकलाबी मजदूर केंद्र ने सभी मजदूर संगठनों, फैक्ट्री यूनियनों, जनपक्षधर संगठनों और आम मजदूरों से अपील की है कि वे इस कार्रवाई के खिलाफ एकजुट होकर विरोध करें।
संगठन ने मांग की है कि गिरफ्तार सभी कार्यकर्ताओं को तुरंत रिहा किया जाए और उनके खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लिया जाए।
आंदोलन जारी रखने का ऐलान
संगठन ने स्पष्ट किया है कि वह इस मुद्दे पर कानूनी लड़ाई के साथ-साथ आंदोलन को भी आगे बढ़ाएगा। साथ ही मजदूरों के न्यायपूर्ण संघर्षों को तेज करने का संकल्प दोहराया गया है।
इसके अलावा, संगठन ने नए श्रम कानूनों का भी विरोध जताया और कहा कि ये कानून मजदूर विरोधी हैं तथा पूंजीपतियों के हित में बनाए गए हैं।
गुरुग्राम-मानेसर में मजदूर नेताओं की गिरफ्तारी ने श्रमिक संगठनों और प्रशासन के बीच टकराव को तेज कर दिया है। जहां एक ओर पुलिस कार्रवाई को कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर मजदूर संगठन इसे दमनात्मक कदम मान रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और बड़ा रूप ले सकता है, खासकर यदि व्यापक स्तर पर आंदोलन शुरू होता है
