काशीपुर में बुजुर्ग से 29 लाख की साइबर ठगी, फर्जी बैंक ऐप डाउनलोड कराकर खाते से उड़ाए पैसे
Kashipur Cyber Crime: बैंक अधिकारी बनकर किया फोन, व्हाट्सएप पर भेजा लिंक और 2 दिनों में किए 9 ट्रांजैक्शन
रुद्रपुर/काशीपुर:उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जिले से ऑनलाइन ठगी का एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा मामला सामने आया है। काशीपुर में शातिर साइबर ठगों ने एक बुजुर्ग को अपना निशाना बनाते हुए उनके बैंक खाते से महज दो दिनों के भीतर ₹29 लाख से अधिक की रकम उड़ा दी। ठगों ने खुद को बैंक का सीनियर अधिकारी बताकर बुजुर्ग को झांसे में लिया और व्हाट्सएप (WhatsApp) के जरिए एक फर्जी बैंकिंग एप्लीकेशन भेजकर उनके खाते की गोपनीय जानकारी हासिल कर ली। पीड़ित की शिकायत पर साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन कुमाऊं परिक्षेत्र, रुद्रपुर में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और पुलिस मामले की गहन जांच में जुट गई है।
बैंक अधिकारी बनकर किया फोन, ऐसे बिछाया जाल
यह सनसनीखेज मामला काशीपुर के जसपुर खुर्द, गढ़वाल सभा क्षेत्र का है। यहाँ के निवासी सुधेश कुमार का अपनी स्थानीय बैंक शाखा में एक संयुक्त खाता (Joint Account) है। जानकारी के अनुसार, बीते 6 जून को शाम करीब 4:30 बजे सुधेश कुमार के मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से फोन आया। कॉल करने वाले शख्स ने बेहद पेशेवर अंदाज में बात करते हुए खुद को बैंक का अधिकारी बताया।
फर्जी बैंक अधिकारी ने बुजुर्ग से कहा कि उनके खाते की ऑनलाइन बैंकिंग सेवाओं को बिना किसी रुकावट के सुचारु रूप से चालू रखने के लिए एक नए ई-बैंकिंग ऐप का इस्तेमाल करना अनिवार्य है। बुजुर्ग उसकी बातों में आ गए और उसकी हर बात को सच मान बैठे।
व्हाट्सएप पर भेजा फर्जी ऐप, फॉर्म भरते ही हैक हुआ फोन
ठग ने बुजुर्ग का विश्वास जीतने के बाद उनके व्हाट्सएप नंबर पर एक फाइल (.apk या अनवेरिफाइड लिंक) भेजी। उसने सुधेश कुमार से कहा कि इस फाइल को डाउनलोड कर इसके अंदर दिए गए ऑनलाइन फॉर्म में अपनी पूरी जानकारी भर दें। सुधेश कुमार ने जैसे ही फाइल को ओपन किया और उसमें अपनी बैंकिंग डिटेल्स दर्ज कीं, ऐप ने ठीक से काम करना बंद कर दिया।
ऐप के काम न करने पर बुजुर्ग को कुछ संदेह हुआ, जिसके बाद उन्होंने तुरंत उस एप्लीकेशन को बंद कर दिया। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और ठगों के पास उनके खाते का पूरा एक्सेस और पासवर्ड जा चुका था।
2 दिनों में किए 9 ट्रांजैक्शन, उड़ गए ₹29,00,022
साइबर अपराधियों ने बुजुर्ग की गोपनीयता भंग करते ही उनके खाते में सेंध लगा दी। अगले दिन यानी 7 जून को जब सुधेश कुमार ने अपने मोबाइल फोन पर आए बैंक के मैसेज (SMS Alerts) देखे, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। 6 और 7 जून के बीच, यानी महज 48 घंटों के भीतर अपराधियों ने उनके खाते से अलग-अलग 9 ट्रांजैक्शन किए थे। इन नौ ट्रांजैक्शनों के जरिए शातिर चोरों ने कुल 29,00,022 रुपये पार कर दिए थे।
पीड़ित ने तुरंत कराया खाता सीज, पुलिस जांच शुरू
खाते से जीवनभर की गाढ़ी कमाई साफ होने की जानकारी मिलते ही पीड़ित सुधेश कुमार तुरंत हरकत में आए। उन्होंने सबसे पहले राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर (1930) पर कॉल कर अपनी शिकायत दर्ज कराई और संबंधित बैंक को मामले की सूचना देकर अपना खाता तुरंत सीज (Freeze) करवाया ताकि और नुकसान न हो। इसके बाद उन्होंने रुद्रपुर स्थित साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में लिखित तहरीर दी।
रुद्रपुर साइबर इंस्पेक्टर धीरेंद्र पंत ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि पीड़ित की शिकायत के आधार पर अज्ञात साइबर ठगों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि मामला बेहद गंभीर है, इसलिए पुलिस की टेक्निकल टीम ट्रांजैक्शन हिस्ट्री और आईपी एड्रेस को खंगाल रही है। पुलिस का मुख्य उद्देश्य ठगी गई धनराशि की रिकवरी करना और आरोपियों को जल्द से जल्द सलाखों के पीछे भेजना है।
साइबर एक्सपर्ट्स की सलाह: फर्जी ऐप से कैसे बचें?
काशीपुर की इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि साइबर अपराधी अब बुजुर्गों को सॉफ्ट टारगेट बना रहे हैं। इस तरह के फ्रॉड से बचने के लिए उत्तराखंड साइबर पुलिस ने कुछ जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए हैं:
- कभी भी अज्ञात ऐप डाउनलोड न करें: बैंक कभी भी व्हाट्सएप, एसएमएस या किसी अन्य चैटिंग ऐप पर कोई फाइल या ऐप डाउनलोड करने के लिए नहीं कहता। हमेशा आधिकारिक गूगल प्ले स्टोर या एप्पल ऐप स्टोर से ही बैंक का ऑथेंटिक ऐप डाउनलोड करें।
- फोन कॉल पर न दें जानकारी: यदि कोई व्यक्ति खुद को बैंक मैनेजर या अधिकारी बताकर पासवर्ड, ओटीपी, सीवीवी या पिन मांगता है, तो तुरंत फोन काट दें।
- लिंक पर क्लिक करने से बचें: लॉटरी, केवाईसी (KYC) अपडेट या अकाउंट ब्लॉक होने के डर वाले किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें।
- ठगी होने पर तुरंत करें यह काम: यदि आप साइबर ठगी के शिकार हो जाते हैं, तो बिना देर किए गोल्डन ऑवर (शुरुआती 1-2 घंटे) के भीतर राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। इससे पैसे वापस मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती है।