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चारधाम यात्रा 2026 को प्लास्टिक मुक्त बनाने के सख्त निर्देश, यात्रा मार्ग पर वाटर एटीएम और डिजिटल मॉनिटरिंग होगी लागू


  • चारधाम यात्रा 2026 को पूरी तरह प्लास्टिक मुक्त बनाने का ऐतिहासिक पहल ,
  • ड्रोन से होगी कूड़ा और प्लास्टिक वेस्ट की मॉनिटरिंग
  • सीएम धामी के सख्त निर्देश—कूड़ा फैलाने वालों पर होगी कड़ी कार्रवाई,
  • कमांड एंड कंट्रोल सेंटर स्थापित करने के निर्देश,
  • पूरे प्रदेश में लागू होगी “मनी बैक” प्लास्टिक योजना,
  • हर दुकान पर  होगा प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट,
  • जगह-जगह वाटर एटीएम और RO प्लांट लगाने के निर्देश,
  • यात्रा मार्ग पर बड़े स्तर पर सफाई और अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था,
  • चारधाम मार्ग पर स्पेशलाइज्ड मैनपावर की तैनाती,
  • घोड़े-खच्चरों की लीद से बनेगी उपयोगी बायोमास ऊर्जा,
  • जनभागीदारी से चलेगा प्लास्टिक मुक्त अभियान, तकनीक आधारित पारदर्शी और आधुनिक यात्रा प्रबंधन

देहरादून।चारधाम यात्रा 2026 को पूरी तरह स्वच्छ और प्लास्टिक मुक्त बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने बड़े स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसी क्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास में शहरी विकास विभाग, पर्यटन विभाग और वन विभाग के अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए।

बैठक में साफ तौर पर कहा गया कि यात्रा मार्ग पर प्लास्टिक बोतलों के उपयोग को हतोत्साहित करने के लिए जगह-जगह वाटर एटीएम और RO प्लांट स्थापित किए जाएंगे। इसके साथ ही कूड़ा फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। राज्यभर में प्लास्टिक वेस्ट के लिए “मनी बैक” योजना लागू की जाएगी, जिससे लोग प्लास्टिक वापस करने के लिए प्रोत्साहित हों। सभी दुकानों पर प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट को अनिवार्य किया जाएगा।

चारधाम यात्रा मार्ग पर स्थित ग्राम पंचायतों और अन्य संस्थाओं को निर्देश दिए गए हैं कि वे ड्रोन के माध्यम से कूड़े और प्लास्टिक वेस्ट की निगरानी करें। इसके लिए एक अत्याधुनिक कमांड एंड कंट्रोल सेंटर भी स्थापित किया जाएगा, जिससे पूरे यात्रा मार्ग की रियल टाइम मॉनिटरिंग संभव हो सकेगी।

यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए यात्रा मार्ग पर पड़ने वाले 30 नगर निकायों को सशक्त किया गया है। सफाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बड़ी संख्या में पर्यावरण मित्रों की तैनाती की गई है और अतिरिक्त सफाई कर्मियों की भी व्यवस्था की गई है। इसका उद्देश्य यह है कि मार्ग, बाजार, घाट और सार्वजनिक स्थान हर समय स्वच्छ बने रहें।

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के तहत व्यापक इंतजाम किए गए हैं। इसमें 37 एमआरएफ केंद्र, 299 कम्पोस्ट पिट, 38 प्लास्टिक कम्पैक्टर और बेलिंग मशीनें तथा 266 कचरा परिवहन वाहन तैनात किए गए हैं। इससे कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण को सुनिश्चित किया जाएगा और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को कम किया जा सकेगा।श्रद्धालुओं की मूलभूत सुविधाओं को भी प्राथमिकता दी गई है। यात्रा मार्ग पर सार्वजनिक शौचालयों का विस्तार किया गया है, जिसमें महिलाओं, पुरुषों और दिव्यांगजनों के लिए अलग-अलग सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।

इसके अलावा 74 मोबाइल शौचालय इकाइयां भी संचालित की जाएंगी। वाहनों की बढ़ती संख्या को देखते हुए बड़े स्तर पर पार्किंग व्यवस्था विकसित की गई है, जिसमें हजारों पार्किंग स्थल चिन्हित किए गए हैं और वैकल्पिक पार्किंग की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है।
श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए होटल, लॉज, धर्मशालाओं और आश्रमों में लगभग 28,395 कमरे और 67,278 बिस्तरों की व्यवस्था की गई है। सुरक्षा के लिहाज से प्रमुख मार्गों पर 19,604 स्ट्रीट लाइटें स्थापित की गई हैं, जिससे रात्रिकालीन यात्रा सुरक्षित हो सके।

सरकार ने सिंगल यूज प्लास्टिक को पूरी तरह समाप्त करने पर विशेष जोर दिया है। वर्ष 2025 में प्लास्टिक के खिलाफ सख्त कार्रवाई के बाद अब 2026 में इसे जनभागीदारी के माध्यम से बड़े अभियान के रूप में चलाया जाएगा। यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत और हरित, सतत विकास के विजन से प्रेरित है। उद्देश्य यह है कि चारधाम यात्रा को पूरी तरह स्वच्छ, प्लास्टिक मुक्त और पर्यावरण अनुकूल बनाया जा सके।

यात्रा को तकनीकी रूप से सुदृढ़ बनाने के लिए QR कोड आधारित फीडबैक सिस्टम, क्विक रिस्पॉन्स टीम, कंट्रोल रूम और आधुनिक मशीनों की सहायता ली जाएगी। साथ ही प्लास्टिक बोतलों के प्रबंधन के लिए डिजिटल डिपॉजिट रिफंड सिस्टम लागू किया जाएगा, जिसे जिलाधिकारी और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा क्रियान्वित किया जाएगा।

इसके अलावा एक अभिनव पहल के तहत यात्रा मार्ग पर घोड़े-खच्चरों की लीद का उपयोग पिरूल के साथ मिलाकर बायोमास पैलेट बनाने में किया जाएगा। इससे कचरे के निस्तारण के साथ ऊर्जा उत्पादन भी संभव होगा। इसी के तहत केदारनाथ धाम में श्रद्धालुओं को पहली बार 24 घंटे मुफ्त गर्म पानी उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है। यह सुविधा बायोमास पैलेट से संचालित गीज़रों के माध्यम से दी जाएगी, जो एक अनूठा प्रयोग माना जा रहा है।

यात्रा मार्ग पर जागरूकता अभियान भी चलाए जाएंगे, जिनमें स्वयंसेवी संस्थाएं, एनसीसी कैडेट्स, महिला मंगल दल और ग्राम पंचायतों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। इसके साथ ही कूड़ा प्रबंधन के लिए विशेष प्रशिक्षित मैनपावर की तैनाती भी की जाएगी।

बैठक में राम सिंह कैड़ा, मंत्री, उत्तराखण्ड सरकार (वर्चुअल), नितेश झा, सचिव, उत्तराखण्ड शासन, धीरज गर्ब्याल, सचिव, उत्तराखण्ड शासन, मधुकर पराग धकाते, सचिव, पर्यावरण / प्रदूषण नियंत्रण, विशाल मिश्रा, जिलाधिकारी, रुद्रप्रयाग (वर्चुअल), गौरव कुमार, जिलाधिकारी, चमोली (वर्चुअल), प्रशांत आर्य, जिलाधिकारी, उत्तरकाशी (वर्चुअल), मयूर दीक्षित, जिलाधिकारी, हरिद्वार (वर्चुअल), तथा सविन बंसल, जिलाधिकारी, देहरादून (वर्चुअल) / मुख्य विकास अधिकारी, देहरादून उपस्थित रहे।

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