केदारनाथ: हिमालय की गोद में बसे विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम के कपाट आज विधि-विधान के साथ श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। कपाट खुलते ही पूरा धाम “हर हर महादेव” के जयकारों से गूंज उठा। मंदिर को इस खास अवसर पर 51 क्विंटल ताजे गेंदे के फूलों से भव्य रूप से सजाया गया, जिसने श्रद्धालुओं की आस्था को और भी प्रगाढ़ बना दिया।

राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने। देश-विदेश से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। कपाट खुलने के साथ ही 2026 की चारधाम यात्रा ने पूरी रफ्तार पकड़ ली है।
11वां ज्योतिर्लिंग है केदारनाथ
केदारनाथ धाम भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में ग्यारहवां ज्योतिर्लिंग माना जाता है। यह उत्तराखंड के चारधामों में प्रमुख स्थान रखता है और पंच केदार में प्रथम केदार के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि यहां छह माह ‘नर पूजा’ और शीतकाल में छह माह ‘देव पूजा’ होती है।
शीतकाल में भारी बर्फबारी के चलते मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और पूजा-अर्चना ओंकारेश्वर मंदिर में संपन्न होती है।

पौराणिक मान्यताएं और इतिहास
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, द्वापर युग में पांडवों ने अपने पापों से मुक्ति पाने के लिए भगवान शिव की आराधना की थी। भगवान शिव ने उन्हें महिष (बैल) रूप में दर्शन दिए, जिसके बाद इस पवित्र ज्योतिर्लिंग की स्थापना हुई। मंदिर के गर्भगृह में त्रिकोणीय आकार का शिवलिंग स्थित है, जिसे विशेष रूप से पूजनीय माना जाता है।
कपाट खुलने की विशेष पूजा परंपराएं
कपाट खुलने के अवसर पर सदियों पुरानी परंपराओं का पालन किया गया—
पंचमुखी डोली की भव्य पूजा
वैदिक मंत्रोच्चार और शंख ध्वनि के साथ द्वार उद्घाटन
मुख्य पुजारी द्वारा हवन, यज्ञ और अभिषेक
पहली विशेष आरती में सैकड़ों श्रद्धालुओं की सहभागिता
भगवान केदार को पहला भोग और प्रसाद वितरण
इन सभी अनुष्ठानों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

2013 आपदा के बाद बदली तस्वीर
2013 केदारनाथ आपदा ने इस क्षेत्र को गहरा नुकसान पहुंचाया था। हालांकि, इसके बाद हुए व्यापक पुनर्निर्माण और आधुनिक सुविधाओं के विकास ने केदारनाथ यात्रा को पहले से कहीं अधिक सुरक्षित और सुगम बना दिया है। अब यहां बेहतर सड़क, पैदल मार्ग, हेलीकॉप्टर सेवा और सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध है।
हर साल बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या
पिछले कुछ वर्षों में केदारनाथ आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई है। लाखों की संख्या में भक्त हर साल बाबा केदार के दर्शन करने पहुंचते हैं। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर भी मिल रहे हैं और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।

भैरव बाबा का विशेष महत्व
केदारनाथ धाम में भुकुंट भैरव मंदिर को क्षेत्ररक्षक देवता माना जाता है। मान्यता है कि शीतकाल में जब मंदिर बंद रहता है, तब भैरव बाबा ही पूरे केदारपुरी की रक्षा करते हैं। श्रद्धालु केदारनाथ दर्शन के साथ भैरव बाबा के दर्शन भी अवश्य करते हैं।
चारधाम यात्रा ने पकड़ी रफ्तार
गौरतलब है कि 19 अप्रैल को गंगोत्री धाम और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ चारधाम यात्रा शुरू हो चुकी है। आज केदारनाथ के कपाट खुलने के बाद यात्रा को और गति मिली है, जबकि कल बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ यात्रा पूरी तरह संचालित हो जाएगी।
