रामनगर। नैनीताल जिले के रामनगर क्षेत्र से एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जहां घनी आबादी के बीच एक गर्भवती गुलदार (लेपर्ड) के पेड़ पर चढ़ जाने से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। हालांकि, वन विभाग की तत्परता और सूझबूझ के चलते इस संभावित खतरे को समय रहते टाल दिया गया और गुलदार का सफल रेस्क्यू कर लिया गया।
घटना रामनगर के लुटाबड़ क्षेत्र की है, जहां सुबह उस समय हड़कंप मच गया जब स्थानीय लोगों ने एक गुलदार को कटहल के पेड़ पर चढ़ा हुआ देखा। यह इलाका आबादी के बेहद करीब होने के कारण देखते ही देखते मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई। लोगों की भीड़ और उत्सुकता के चलते स्थिति और ज्यादा संवेदनशील और खतरनाक बन गई थी।
सूचना मिलते ही तराई पश्चिमी वन प्रभाग की टीम तत्काल मौके पर पहुंची। रेंज अधिकारी पूरन सिंह खनायत के नेतृत्व में वन विभाग की टीम ने स्थिति का जायजा लिया और भीड़ को नियंत्रित करने के प्रयास शुरू किए। हालात की गंभीरता को देखते हुए उच्च अधिकारियों से अनुमति प्राप्त कर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया।
रेंज अधिकारी पूरन सिंह खनायत ने जानकारी देते हुए बताया कि सुबह उन्हें सूचना मिली कि एक गुलदार पेड़ पर चढ़ा हुआ है और आसपास काफी भीड़ जमा हो चुकी है, जिससे किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता था। उन्होंने कहा कि टीम ने तुरंत रणनीति बनाकर ट्रैंक्विलाइज़र गन की मदद से गुलदार को सुरक्षित काबू में करने की योजना बनाई।
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के वरिष्ठ पशु चिकित्साधिकारी डॉ. दुष्यंत शर्मा और उनकी टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी निगरानी में गुलदार को ट्रैंक्विलाइज किया गया और फिर बेहद सावधानीपूर्वक उसे पेड़ से नीचे उतारा गया। पूरी प्रक्रिया के दौरान वन विभाग की टीम ने अत्यंत सतर्कता बरती ताकि न तो गुलदार को कोई नुकसान पहुंचे और न ही आसपास मौजूद लोगों को कोई खतरा हो।
जांच में यह सामने आया कि यह गुलदार मादा है और उसकी उम्र लगभग 4 से 5 वर्ष के बीच है। सबसे अहम बात यह रही कि यह गुलदार गर्भवती भी है, जिससे यह रेस्क्यू ऑपरेशन और भी ज्यादा संवेदनशील बन गया था। वन विभाग के अधिकारियों ने इस स्थिति को देखते हुए विशेष सावधानी बरती और पूरे ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।
वन विभाग के अनुसार, यह गुलदार पिछले कुछ समय से लुटाबड़ क्षेत्र में लगातार देखा जा रहा था और इससे पहले भी यह कई बार पालतू जानवरों का शिकार कर चुका था। इसे पकड़ने के लिए पहले भी पिंजरा लगाया गया था, लेकिन यह उसमें कैद नहीं हो पाया था, जिससे स्थानीय लोगों में डर का माहौल बना हुआ था।
फिलहाल गुलदार को प्राथमिक उपचार और जरूरी मेडिकल जांच के बाद सुरक्षित जंगल में छोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। वन विभाग की इस त्वरित और प्रभावी कार्रवाई से न केवल एक दुर्लभ वन्यजीव की जान बचाई गई, बल्कि एक बड़े हादसे को भी टाल दिया गया।
इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि मानव और वन्यजीवों के बीच संतुलन बनाए रखना कितना जरूरी है। साथ ही यह भी स्पष्ट हुआ कि समय पर की गई सही कार्रवाई से बड़े खतरों को टाला जा सकता है।
