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उत्तराखंड स्वगणना 2026 शुरू: जानें प्रक्रिया, नियम और जरूरी सावधानियां


देहरादून। 10 अप्रैल 2026 से उत्तराखंड में जनगणना -2027 के तहत स्वगणना (Self Enumeration) की प्रक्रिया शुरू हो गई है। राज्यपाल गुरमीत सिंह ने लोक भवन में खुद स्वगणना कर इसकी शुरुआत की। यह प्रक्रिया 24 अप्रैल 2026 तक चलेगी, जिसमें नागरिक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपनी जानकारी स्वयं दर्ज कर सकते हैं। पहली बार देश में डिजिटल जनगणना के तहत यह सुविधा दी गई है, लेकिन सही जानकारी भरने के लिए कई जरूरी सावधानियां भी बताई गई हैं।

डिजिटल जनगणना का नया दौर
उत्तराखंड में शुरू हुई यह स्वगणना प्रक्रिया देश की पहली पूरी तरह डिजिटल जनगणना का हिस्सा है। इसमें डेटा संग्रहण डिजिटल उपकरणों और वेब-आधारित सिस्टम के जरिए किया जा रहा है। नागरिक अब घर बैठे आधिकारिक पोर्टल se.census.gov.in पर जाकर अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं।
राज्यपाल गुरमीत सिंह ने इस मौके पर प्रदेशवासियों से अपील की कि वे इस राष्ट्रीय अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें और सटीक जानकारी देकर जनगणना को सफल बनाएं।

24 अप्रैल तक मिलेगा मौका
राज्य में स्वगणना की प्रक्रिया 10 अप्रैल से शुरू होकर 24 अप्रैल 2026 तक चलेगी। इसके बाद 25 अप्रैल से 24 मई 2026 तक मकान सूचीकरण और मकानों की गणना का कार्य किया जाएगा।
इस दौरान यदि लोग खुद स्वगणना कर लेते हैं, तो घर-घर आने वाले प्रगणकों (Enumerators) को भी काम में आसानी होगी और समय की बचत होगी।

16 भाषाओं में उपलब्ध सुविधा
सरकार ने आम लोगों की सुविधा के लिए स्वगणना पोर्टल पर 16 भाषाओं का विकल्प दिया है। इससे नागरिक अपनी सुविधा के अनुसार भाषा चुनकर आसानी से फॉर्म भर सकते हैं।


एक मोबाइल नंबर–एक परिवार का नियम
स्वगणना के दौरान सबसे महत्वपूर्ण नियमों में से एक है कि एक मोबाइल नंबर का उपयोग केवल एक ही परिवार के लिए किया जाए। एक बार मोबाइल नंबर रजिस्टर होने के बाद इसे बदला नहीं जा सकता।
इसी तरह परिवार के मुखिया का नाम भी सावधानी से भरना जरूरी है, क्योंकि बाद में इसमें बदलाव संभव नहीं होगा।

स्वगणना के दौरान इन बातों का रखें खास ध्यान
स्वगणना करते समय छोटी-सी गलती आपकी पूरी मेहनत खराब कर सकती है। इसलिए इन सावधानियों का पालन जरूर करें:
एक परिवार के लिए केवल एक ही मोबाइल नंबर का इस्तेमाल करें।
परिवार के मुखिया का नाम सोच-समझकर भरें।
अपनी सुविधा के अनुसार सही भाषा का चयन करें।
कोशिश करें कि घर से ही स्वगणना करें, ताकि गूगल मैप पर सही जियो-टैगिंग हो सके।
अगर घर से दूर हैं तो मैप पर लोकेशन सही तरीके से सेट करें।
सभी जानकारी भरने के बाद एक बार जरूर जांच करें।
फॉर्म सबमिट होने के बाद केवल प्रगणक ही बदलाव कर सकता है।
स्वगणना के बाद मिलने वाली SE ID को सुरक्षित रखें।
SE ID खोने पर पूरी जानकारी दोबारा भरनी पड़ सकती है।

SE ID क्यों है जरूरी?
स्वगणना पूरी होने के बाद नागरिकों को एक एसई आईडी (SE ID) प्राप्त होती है, जो भविष्य में सत्यापन और संशोधन के लिए बेहद जरूरी होती है। अगर यह आईडी खो जाती है, तो प्रगणक को दोबारा सारी जानकारी भरनी पड़ सकती है, जिससे समय और मेहनत दोनों बर्बाद होंगे।

क्यों खास है यह स्वगणना?
यह पहली बार है जब देश में जनगणना के लिए लोगों को खुद अपनी जानकारी दर्ज करने का विकल्प दिया गया है। इससे प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी, तेज और सुविधाजनक बनने की उम्मीद है।

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