रामनगर (उत्तराखंड)। उत्तराखंड के नैनीताल जिले के मालधन क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली को लेकर जनता का आक्रोश चरम पर पहुंच गया है। महिला एकता मंच ने मालधन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में डॉक्टरों की भारी कमी और बुनियादी चिकित्सा सुविधाओं के अभाव को लेकर मोर्चा खोल दिया है। मंच ने मालधन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा अधीक्षक के माध्यम से मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) नैनीताल को एक ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगों को जल्द पूरा करने की मांग की है। महिलाओं ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों के भीतर अस्पताल की स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो आगामी 5 अगस्त से अस्पताल परिसर के सामने उग्र धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया जाएगा।
40 हजार की आबादी भगवान भरोसे, स्वास्थ्य सेवाएं ठप
मंच द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में मालधन क्षेत्र की दयनीय स्थिति का विस्तार से उल्लेख किया गया है। पदाधिकारियों ने बताया कि मालधन क्षेत्र की आबादी 40 हजार से भी अधिक है। यह पूरा इलाका मुख्य रूप से अनुसूचित जाति (एससी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) बहुल क्षेत्र है, जहां आर्थिक रूप से कमजोर लोग निवास करते हैं। पिछले वर्ष स्थानीय जनता के कड़े संघर्ष और भारी दबाव के बाद इस अस्पताल में बुनियादी स्वास्थ्य सेवाएं मिलनी शुरू हुई थीं, जिन्हें अब विभाग की लापरवाही के कारण दोबारा छीन लिया गया है। अस्पताल अब केवल सफेद हाथी बनकर रह गया है, जिससे स्थानीय निवासियों में सरकार के खिलाफ भारी असंतोष है।

दोपहर 2 बजे के बाद ताला, इमरजेंसी सेवाएं गायब
मामले को लेकर मंच की कार्यकर्ता भगवती आर्य ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। भगवती आर्य का कहना है कि मालधन अस्पताल में दिन के 2 बजे के बाद मरीजों के लिए किसी भी प्रकार के इलाज की व्यवस्था नहीं रहती है। यहां आपातकालीन (इमरजेंसी) सुविधाएं पूरी तरह से गायब हैं। दोपहर बाद यदि कोई आपातकालीन स्थिति पैदा होती है, तो मरीजों को कई किलोमीटर दूर दूसरे बड़े शहरों या निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है, जो गरीब जनता के बजट से बाहर है।
उन्होंने कहा कि मालधन अस्पताल में जो गिने-चुने डॉक्टर तैनात थे, उन्हें भी विभाग ने दूसरी जगहों पर संबद्ध (अटैच) कर दिया है। सरकार की यह कार्रवाई मालधन की जनता के साथ विश्वासघात है। डॉक्टरों को यहां से हटाकर दूसरे अस्पतालों में भेजना यह साबित करता है कि प्रशासन इस ग्रामीण इलाके की स्वास्थ्य समस्याओं के प्रति गंभीर नहीं है। मालधन की जनता इस अन्याय को बर्दाश्त नहीं करेगी।
डिब्बों में बंद है एक्स-रे मशीन, निजी केंद्रों की चांदी
अस्पताल के भीतर चिकित्सा उपकरणों की बर्बादी का खुलासा मंच की कार्यकर्ता पुष्पा ने किया। पुष्पा का आरोप है कि मालधन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक्स-रे मशीन उपलब्ध है, लेकिन जनता को इसका कोई लाभ नहीं मिल रहा है। इस कीमती मशीन को चालू करने के बजाय डब्बों में बंद करके एक कमरे में लॉक कर दिया गया है। अस्पताल आने वाले गरीब मरीजों को एक्स-रे कराने के लिए निजी (प्राइवेट) डायग्नोस्टिक सेंटरों में भेजा जाता है, जहां उनसे मोटी रकम वसूली जाती है। अस्पताल में मशीन होने के बावजूद लोगों का बाहर से महंगा एक्स-रे कराना प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करता है। इसके अलावा अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की सुविधा न होने से गर्भवती महिलाओं को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
महिला एकता मंच की प्रमुख मांगें
महिला एकता मंच ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को भेजे ज्ञापन में अस्पताल की व्यवस्था सुधारने के लिए निम्नलिखित प्रमुख मांगें उठाई हैं:
- विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति: मालधन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मानकों के अनुरूप बाल रोग विशेषज्ञ, सर्जन, प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ तथा एनेस्थेटिस्ट की तुरंत तैनाती की जाए।
- पैरामेडिकल स्टाफ की कमी: अस्पताल में सुचारू कामकाज के लिए आवश्यक पैरामेडिकल स्टाफ के रिक्त पदों को तत्काल भरा जाए।
- एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड सेवा: सालों से धूल फांक रही एक्स-रे मशीन को तत्काल चालू किया जाए और अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की सुविधा सुनिश्चित की जाए।
- 24*7 आपातकालीन सेवा: ग्रामीण क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए अस्पताल में चौबीसों घंटे आपातकालीन सेवाएं बहाल की जाएं।
5 अगस्त से धरने की चेतावनी
ज्ञापन सौंपने के दौरान महिलाओं ने स्पष्ट किया कि प्रशासन को 15 दिनों का समय दिया जा रहा है। यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर इन मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो महिला एकता मंच 5 अगस्त (बुधवार) को दिन में 11 बजे से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मालधन में धरना प्रदर्शन करने के लिए विवश होगा। इस आंदोलन की पूरी जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन की होगी। इस दौरान भगवती आर्य, पुष्पा, विनीता टम्टा, ममता, देवी, सोनी, रजनी, रेखा और सरला आदि महिलाएं मुख्य रूप से मौजूद रहीं।