रामनगर (नैनीताल)।सीमा पार वन्यजीव प्रबंधन और पर्यावरण संतुलन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल हुई है। 23 जुलाई 2026 को कार्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक सभागार में भारत और नेपाल के वन अधिकारियों की एक उच्चस्तरीय समन्वय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य भारत और नेपाल के बीच सीमा पार समन्वय को सुदृढ़ बनाकर जैव विविधता संरक्षण को नया आयाम देना था।
बैठक में नेपाल के सुदूरपश्चिम प्रांत, शुक्लाफाँटा राष्ट्रीय उद्यान, कैलाली-पहलमानपुर, कैलाली-धनगढ़ी, डडेलधुरा, बैतड़ी, धारचूला, तराई ए०आर०सी० लैंडस्केप कार्यक्रम और डब्ल्यू डब्ल्यू एफ (WWF) नेपाल सहित विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस आयोजन के दौरान सीमा पार वन्यजीव संरक्षण, वैज्ञानिक प्रबंधन, अनुसंधान, निगरानी और मानव-वन्यजीव संघर्ष के प्रभावी समाधान के लिए अनुभवों और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों का आदान-प्रदान किया गया।

कार्बेट के सफल संरक्षण मॉडल पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण
कार्यक्रम के दौरान कार्बेट टाइगर रिजर्व के उप निदेशक राहुल मिश्रा (IFS) और पार्क वार्डन बिन्दर पाल ने एक विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। इसके माध्यम से कार्बेट टाइगर रिजर्व की कार्यप्रणाली, समृद्ध जैव विविधता, बाघों की संख्या, संरक्षण संबंधी उद्देश्यों और प्रबंधन रणनीतियों की जानकारी साझा की गई।
प्रस्तुतीकरण में वन एवं वन्यजीव सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं को शामिल किया गया, जिनमें शामिल हैं:
- सुरक्षा एवं तकनीक: एम-स्ट्राइप्स पेट्रोलिंग विश्लेषण, ई-सर्विलांस, ड्रोन तकनीक, खुफिया सूचना तंत्र और अवैध शिकार निरोधक कार्रवाई।
- पर्यावास प्रबंधन: घास के मैदानों का प्रबंधन एवं पुनर्स्थापन, लैंटाना उन्मूलन, जल स्रोत संरक्षण और रामगंगा नदी में प्लास्टिक उन्मूलन।
- वैज्ञानिक तकनीक व गणना: वन्यजीव गणना, साइन सर्वे, कैमरा ट्रैपिंग, लाइन ट्रांसेक्ट और कैमरा ट्रैप ग्रिड कवरेज।
- संरक्षण योजनाएं: टाइगर सेल की कार्यप्रणाली, स्वैच्छिक पुनर्वास, बाघ रक्षक योजना, साइलेंस ज़ोन और घड़ियाल, होंग डियर व हाथियों की पहचान की वैज्ञानिक विधियां।
- समुदाय व पर्यटन: पर्यटन प्रबंधन से प्राप्त निधि का उपयोग, मानव-वन्यजीव संघर्ष न्यूनीकरण, बी-हाइव फेंसिंग, स्थानीय समुदायों के लिए वैकल्पिक आजीविका और कालागढ़ स्थित वन्यजीव प्रशिक्षण केंद्र की गतिविधियां।

नेपाल के प्रतिनिधियों ने की सराहना
बैठक में दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच संरक्षण से जुड़ी चुनौतियों और नवाचारों पर सार्थक विचार-विमर्श हुआ। नेपाल से आए अधिकारियों ने कार्बेट टाइगर रिजर्व में अपनाई जा रही आधुनिक तकनीकों, वैज्ञानिक वन्यजीव प्रबंधन, गश्ती व्यवस्था और सामुदायिक सहभागिता आधारित मॉडल की सराहना की तथा इसे अत्यंत अनुकरणीय बताया।
भविष्य की रणनीतियों पर चर्चा करते हुए दोनों देशों के बीच नियमित संवाद, तकनीकी सहयोग, संयुक्त प्रशिक्षण और सूचनाओं के त्वरित आदान-प्रदान को और अधिक मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की गई।

बैठक में उपस्थित प्रमुख प्रतिनिधि
इस महत्वपूर्ण समन्वय बैठक में भारतीय और नेपाली वन विभागों के कई वरिष्ठ अधिकारी व विशेषज्ञ मौजूद रहे। भारत की ओर से उप निदेशक राहुल मिश्रा, पार्क वार्डन बिन्दर पाल, वन क्षेत्राधिकारी प्रमोद चन्द्र त्रिपाठी (शोध एवं अनुश्रवण रेंज), वन क्षेत्राधिकारी ललित मोहन आर्या (ईको टूरिज्म यूनिट), वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी पंकज मंदोलिया, प्रशासनिक अधिकारी मोहित सिंह राठौर, मीडिया प्रभारी प्रेमा तिवारी, डॉ. शिवांकर विश्वास, डॉ. आई.पी. नोपन्ना और सुश्री सोहिनी शॉ उपस्थित रहे।
वहीं नेपाल की तरफ से प्रांतीय वन निदेशक (सुदूरपश्चिम प्रांत) हेम राज बिष्ट, वरिष्ठ संरक्षण अधिकारी (शुक्लाफाँटा राष्ट्रीय उद्यान) चंद्रशेखर चौधरी, प्रांतीय वन मंत्रालय के सचिव भोज राज पाठक व जैपी राज ओझा के अलावा जनक पाध्याय, डॉ. राम बिचारी ठाकुर, भीम प्रसाद, भक्त राज गिरी, परमानन्द कुँवर, भरत प्रसाद भट्टा, पुरुषोत्तम वागले, लव कुमार बिष्टा, डॉ. अनंता राम भण्डारी, राजन रिजाल और प्रमोद शामिल हुए।
बैठक के अंत में सभी प्रतिभागियों ने एक स्वर में कहा कि इस प्रकार के सीमा पार समन्वय कार्यक्रम जैव विविधता संरक्षण और वन्यजीव प्रबंधन की दृष्टि से बेहद उपयोगी हैं। भविष्य में भी ऐसे संयुक्त प्रयास और निरंतर संवाद जारी रखे जाएंगे।