रामनगर।6 सितंबर 2026 को प्रगतिशील महिला एकता केंद्र के दो दिवसीय चौथे सम्मेलन का सफलतापूर्वक समापन हो गया। सम्मेलन के अंतिम दिन देश और दुनिया में महिलाओं, मजदूरों और आम जनता से जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। इस दौरान संगठन ने महंगाई, साम्राज्यवादी युद्धों और महिला विरोधी नीतियों के खिलाफ एकजुट होकर संघर्ष करने का संकल्प लेते हुए कुल आठ महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए।

मजदूरों और महिलाओं के अधिकारों पर जोर
सम्मेलन के खुले सत्र में विभिन्न जनसंगठनों और ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने चौथे सम्मेलन की सफलता पर बधाई दी और कहा कि आज समाज की आधी आबादी का एक बड़ा हिस्सा, विशेषकर मजदूर और मेहनतकश महिलाएं, गंभीर जीवन संकट का सामना कर रही हैं। वक्ताओं ने रेखांकित किया कि प्रगतिशील महिला एकता केंद्र की यह प्राथमिक जिम्मेदारी है कि वह इन महिलाओं और पूरी मजदूर आबादी के शोषण व उत्पीड़न के खिलाफ एक मजबूत और असरदार आंदोलन खड़ा करे।
वैश्विक संकट और युद्धों का विरोध
सत्र में वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में न केवल भारत, बल्कि पूरा विश्व महंगाई, बेरोजगारी और स्वास्थ्य सेवाओं के संकट से जूझ रहा है। साम्राज्यवादी देशों द्वारा अपने आर्थिक और राजनीतिक वर्चस्व के लिए लड़े जा रहे युद्ध आम जनता की स्थिति को और अधिक बदतर बना रहे हैं। युद्ध और आर्थिक मंदी का सबसे ज्यादा असर महिलाओं और बच्चों के जीवन पर पड़ रहा है, जिससे उनकी बुनियादी जरूरतें भी छीन रही हैं।
फासीवादी ताकतों और नफरत की राजनीति पर चिंता
सम्मेलन में इस बात पर गहरा दुख व्यक्त किया गया कि दुनिया भर में जनता की बदहाली का फायदा उठाकर कट्टरपंथी और फासीवादी ताकतें अपनी जड़ें मजबूत कर रही हैं। ये ताकतें धर्म, नस्ल और उग्र राष्ट्रवाद के नाम पर नफरत की राजनीति फैला रही हैं।
वक्ताओं ने चेतावनी दी कि इन शक्तियों का मुख्य निशाना महिलाएं हैं। उनके पहनावे, जीवनशैली, विचारों और अधिकारों पर नियंत्रण पाने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। इसके साथ ही, जनता के अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाली क्रांतिकारी और प्रगतिशील ताकतों को दबाने की लगातार कोशिशें की जा रही हैं। ऐसे चुनौतीपूर्ण माहौल में प्रगतिशील महिला एकता केंद्र जैसे संगठनों पर संघर्ष को और अधिक धारदार बनाने की बड़ी जवाबदेही आ गई है।
सम्मेलन में पारित आठ प्रमुख प्रस्ताव
सम्मेलन के दूसरे और अंतिम दिन उपस्थित प्रतिनिधियों ने समकालीन सामाजिक और आर्थिक समस्याओं पर केंद्रित आठ प्रस्तावों पर सर्वसम्मति से मुहर लगाई। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
- महंगाई पर रोक: खाद्य पदार्थों और आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों पर तत्काल नियंत्रण लगाने की मांग।
- साम्राज्यवादी युद्धों का विरोध: दुनिया भर में जारी वर्चस्व की जंग और युद्धों को तुरंत बंद करने की अपील।
- मजदूर आंदोलन का समर्थन: मेहनतकश वर्ग के श्रम अधिकारों की रक्षा और न्यायसंगत वेतन की मांग।
- छात्र-युवा उभार को समर्थन: शिक्षा के निजीकरण और बेरोजगारी के खिलाफ उठ रही युवाओं की आवाज का मजबूती से साथ देना।
- महिला विरोधी फैसलों का विरोध: महिलाओं के अधिकारों को सीमित करने वाली नीतियों और सामाजिक पूर्वाग्रहों के खिलाफ एकजुटता।
नया नेतृत्व चयनित
सम्मेलन के संगठनात्मक सत्र के दौरान सर्वसम्मति से नई कार्यकारिणी का गठन भी किया गया। इसमें साथी बिंदु को अध्यक्ष और साथी नीता को महासचिव चुना गया। नए नेतृत्व ने संकल्प लिया कि संगठन महिलाओं के शोषण के खिलाफ और उनके लोकतांत्रिक अधिकारों की प्राप्ति के लिए जमीनी स्तर पर संघर्ष को और तेज करेगा।