पिथौरागढ़ में मेडिकल शिक्षा का नया दौर: एमबीबीएस की 44 सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया पूरी, बची सीटों पर भी जल्द दाखिले की उम्मीद
पिथौरागढ़: उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ के लिए चिकित्सा और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक नया इतिहास रचा जा रहा है। पिथौरागढ़ स्थित मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस पाठ्यक्रम में दाखिले की प्रक्रिया काफी तेजी से आगे बढ़ रही है। तृतीय चरण की काउंसलिंग समाप्त होने तक कॉलेज में कुल 50 एमबीबीएस सीटों में से 44 सीटों पर विद्यार्थियों ने अपना प्रवेश पक्का कर लिया है। अब सबकी निगाहें चौथे चरण की काउंसलिंग पर टिकी हैं, जो इस महीने के अंत तक संपन्न होने जा रही है।
चिकित्सा शिक्षा विभाग और कॉलेज प्रबंधन से मिली जानकारी के अनुसार, इस बार छात्रों में इस नए मेडिकल कॉलेज को लेकर जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। प्रवेश प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और निर्धारित सरकारी नियमों व दिशा-निर्देशों के तहत ही संचालित किया जा रहा है।
स्टेट और ऑल इंडिया कोटा: जानिए सीटों का पूरा गणित
पिथौरागढ़ मेडिकल कॉलेज में कुल 50 एमबीबीएस सीटों के लिए काउंसलिंग का दौर जारी है। इसमें ऑल इंडिया कोटा और उत्तराखंड राज्य कोटा, दोनों ही श्रेणियों के तहत विद्यार्थियों को दाखिला दिया जा रहा है।
तृण चरण तक के प्रवेश आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति कुछ इस प्रकार है:
- राज्य कोटा (State Quota): राज्य कोटे की कुल 43 निर्धारित सीटों में से 41 सीटों पर योग्य छात्रों ने दाखिला ले लिया है। स्थानीय और राज्य स्तर के छात्रों ने इस संस्थान को अपनी प्राथमिकता में रखा है।
- ऑल इंडिया कोटा (All India Quota): ऑल इंडिया कोटे के अंतर्गत कुल 7 सीटें आरक्षित रखी गई हैं, जिनमें से अब तक 3 सीटों पर विद्यार्थियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए प्रवेश प्रक्रिया पूरी कर ली है।
- कुल प्रवेश: दोनों कोटा श्रेणियों को मिलाकर अब तक कुल 44 छात्र-छात्राएं पिथौरागढ़ मेडिकल कॉलेज के एमबीबीएस बैच का हिस्सा बन चुके हैं।
26 अक्टूबर को समाप्त होगी चौथे चरण की काउंसलिंग, सभी सीटें भरने की उम्मीद
कॉलेज प्रशासन के अनुसार, तीन चरणों के सफल संचालन के बाद अब चौथे चरण की काउंसलिंग प्रक्रिया पर काम चल रहा है। चौथे चरण की यह काउंसलिंग प्रक्रिया 26 अक्टूबर तक पूरी तरह से संपन्न कर ली जाएगी।
फिलहाल मेडिकल कॉलेज में सिर्फ 6 सीटें रिक्त रह गई हैं। अधिकारियों और शैक्षणिक टीम को पूरी उम्मीद है कि 26 अक्टूबर को काउंसलिंग का अंतिम चरण पूरा होते ही ये बची हुई 6 सीटें भी भर जाएंगी। इसके साथ ही पिथौरागढ़ मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की सभी 50 सीटों पर शत-प्रतिशत दाखिले का लक्ष्य हासिल हो जाएगा।
सीमांत क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि: कैसे बदलेगी पिथौरागढ़ की तस्वीर?
पिथौरागढ़ जैसे पर्वतीय और सीमांत जनपद में मेडिकल कॉलेज की शुरुआत और उसमें एमबीबीएस पाठ्यक्रम का सफलतापूर्वक संचालित होना बेहद मायने रखता है। लंबे समय से इस क्षेत्र के युवाओं को डॉक्टरी की पढ़ाई के लिए दूसरे बड़े शहरों या राज्यों का रुख करना पड़ता था।
इस मेडिकल कॉलेज के पूरी तरह सक्रिय होने से क्षेत्र को कई बड़े फायदे मिलने वाले हैं:
- स्थानीय स्तर पर मेडिकल शिक्षा: क्षेत्र के मेधावी युवाओं को अब अपने ही जिले में रहकर डॉक्टरी की पढ़ाई करने का विश्वस्तरीय अवसर मिल रहा है।
- कुशल डॉक्टरों की उपलब्धता: आने वाले समय में जब इस कॉलेज से एमबीबीएस के बैच पास आउट होंगे, तो उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों को कुशल और युवा डॉक्टरों की नई फौज मिलेगी। इससे राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिलेगी।
- बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं: मेडिकल कॉलेज से संबद्ध अस्पताल के कारण पिथौरागढ़ और आसपास के ग्रामीण इलाकों की आम जनता को भी आधुनिक और बेहतर इलाज के लिए दूर नहीं भागना पड़ेगा।
भविष्य की राह और आगे की तैयारी
26 अक्टूबर को चौथे चरण की काउंसलिंग समाप्त होने के बाद नए सत्र की नियमित कक्षाओं की तैयारी भी तेजी से पूरी की जाएगी। नए मेडिकल छात्रों के स्वागत और उनकी पढ़ाई के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर, लैब और हॉस्टल सुविधाओं को भी दुरुस्त रखा गया है।
पिथौरागढ़ में एमबीबीएस सीटों का तेजी से भरना यह साबित करता है कि यह संस्थान आने वाले समय में उत्तराखंड में मेडिकल शिक्षा का एक प्रमुख केंद्र बनने जा रहा है। बची हुई 6 सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया पूरी होते ही इस सत्र का पहला मील का पत्थर सफलतापूर्वक हासिल कर लिया जाएगा।