देहरादून।उत्तराखंड के सेलाकुई स्थित हेमवती नंदन बहुगुणा उत्तराखण्ड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय परिसर में स्वास्थ्य और शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान 20.55 करोड़ रुपये की कुल पांच विकास योजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण संपन्न हुआ। इसमें 20.21 करोड़ रुपये की लागत वाली तीन प्रमुख योजनाओं की आधारशिला रखी गई, जबकि 34 लाख रुपये की दो पूरी हो चुकी परियोजनाओं का लोकार्पण किया गया।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर में प्रशासनिक भवन, एम्फीथिएटर और नक्षत्र वाटिका के निर्माण कार्य का शिलान्यास किया गया। इसके साथ ही, मुख्य द्वार और दंत चिकित्सालय (डेटा हॉस्पिटल/डेंटल यूनिट) का लोकार्पण जनता और विद्यार्थियों को समर्पित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत में मां सरस्वती की वंदना की गई और स्वतंत्रता सेनानी व जननेता स्वर्गीय हेमवती नंदन बहुगुणा की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई।

चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का महा-विस्तार
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि युवाओं के बीच का यह वातावरण नई ऊर्जा का संचार करता है। हेमवती नंदन बहुगुणा उत्तराखण्ड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय राज्य में मेडिकल एजुकेशन के स्तर को ऊंचा उठाने और युवाओं के करियर को संवारने में अहम भूमिका निभा रहा है। परिसर में नई आधुनिक सुविधाओं के विकसित होने से विद्यार्थियों को उच्चकोटि का शैक्षणिक माहौल मिलेगा, जिससे पूरे क्षेत्र के विकास को भी नई गति मिलेगी।
सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य से चिकित्सा शिक्षा ग्रहण करने वाला हर एक युवा एक कुशल डॉक्टर, नर्सिंग ऑफिसर या अन्य स्वास्थ्य पेशेवर के रूप में देश-विदेश में अपनी सेवाएं दे सके। यहां के विद्यार्थी अपनी कड़ी मेहनत और प्रतिभा के दम पर न केवल विश्वविद्यालय बल्कि पूरे उत्तराखंड का नाम रोशन कर रहे हैं।
सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल और एम्स सैटेलाइट सेंटर का प्लान
चिकित्सा क्षेत्र को और अधिक उन्नत बनाने के लिए विश्वविद्यालय परिसर में एक अत्याधुनिक ‘सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल’ स्थापित करने का प्रस्ताव केंद्र सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजा जा चुका है। केंद्र से हरी झंडी मिलते ही इस पर तेज गति से काम शुरू होगा।
देश के साथ-साथ उत्तराखंड में भी स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा लगातार बढ़ रहा है। वर्तमान में राज्य में पांच राजकीय मेडिकल कॉलेज चालू हालत में हैं, जबकि दो अन्य का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। इसके अलावा, 9 नर्सिंग कॉलेज और 3 नर्सिंग स्कूल सुचारू रूप से संचालित किए जा रहे हैं। देहरादून, हल्द्वानी और श्रीनगर के मेडिकल कॉलेजों में सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है, और हल्द्वानी में एक आधुनिक कैंसर संस्थान भी तैयार किया जा रहा है।
दूरदराज के इलाकों तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के लिए टेलीमेडिसिन और हेली एंबुलेंस जैसी आधुनिक तकनीकों का भी भरपूर उपयोग किया जा रहा है। किच्छा (ऊधमसिंह नगर) में 351 करोड़ रुपये की लागत से बनाए जा रहे एम्स सैटेलाइट सेंटर से स्थानीय आबादी को विश्वस्तरीय मेडिकल सुविधाएं मिलेंगी।
युवाओं के लिए ग्लोबल रोजगार और पारदर्शी व्यवस्था
स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ युवाओं के भविष्य को सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। मेडिकल सेक्टर में डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और पैरामेडिकल कर्मियों की पारदर्शी नियुक्तियों के साथ-साथ युवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोजगार पाने के काबिल बनाया जा रहा है। इसके तहत विदेशी भाषाओं का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिसके परिणामस्वरुप साल 2023 में 60 युवाओं को जापान और 2025 में 13 युवाओं को जर्मनी में रोजगार प्राप्त हुआ है। जर्मन भाषा सीखकर जर्मनी में नौकरी पाने वाली सपना राणा जैसी बेटियां आज ग्लोबल मंच पर राज्य का नाम रोशन कर रही हैं।
युवाओं के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ रोकने के लिए राज्य में कड़े नकल विरोधी कानून लागू किए गए हैं। पिछले पांच वर्षों में पारदर्शी भर्ती प्रक्रियाओं के माध्यम से 35 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां दी गई हैं। राज्य का युवा वर्ग आज देश के प्रतिष्ठित संस्थानों जैसे एम्स, पीजीआई, रेलवे और मिलिट्री नर्सिंग सर्विस में अपनी सेवाएं दे रहा है।
कार्यक्रम के दौरान चिकित्सा शिक्षा के विस्तार, आधुनिक अवस्थापना विकास और गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण को लेकर आगे की रूपरेखा पर भी चर्चा की गई। इस अवसर पर विधायक सहदेव सिंह पुंडीर, विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. (डॉ.) भानु दुग्गल, महानिदेशक यूकॉस्ट प्रो. दुर्गेश पंत, महानिदेशक सूचना बंशीधर तिवारी, चिकित्सा शिक्षा निदेशक डॉ. आशुतोष सयाना सहित तमाम गणमान्य अधिकारी और शिक्षाविद् मौजूद रहे।