उत्तरकाशी : उत्तराखंड के प्रसिद्ध ट्रैकिंग स्थल दयारा बुग्याल (Dayara Bugyal) क्षेत्र से लापता हुई महिला ट्रेकर बबिता पांडे की खोज के लिए पुलिस और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों ने अभियान को और अधिक तेज कर दिया है। पिछले कई दिनों से लापता महिला का सुराग लगाने के लिए अब धरातल के साथ-साथ आसमान से भी निगरानी रखी जा रही है। आज दिनांक 07 जून 2026 को उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (UCADA) के हेलीकॉप्टर के माध्यम से दयारा ट्रेक और उसके आसपास के संपूर्ण दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों का गहन हवाई सर्वेक्षण (Aerial Survey) किया गया। शासन और प्रशासन की प्राथमिकता लापता ट्रेकर को जल्द से जल्द सुरक्षित बरामद करने की है।

गोई कैंप एरिया से रहस्यमय तरीके से लापता हुई बबिता पांडे
लापता महिला ट्रेकर 30 वर्षीय बबिता पांडे पुत्री गोपाल पांडे उत्तराखंड के नैनीताल जिले के रामनगर के चिल्किया गाँव निवासी हैं। बबिता एक स्थानीय ट्रेकिंग एजेंसी के माध्यम से 10 सदस्यीय ट्रेकर्स दल के साथ उत्तरकाशी के खूबसूरत और विश्व प्रसिद्ध दयारा बुग्याल की वादियों का दीदार करने आई थीं। यह दल दयारा क्षेत्र में ट्रेकिंग और कैंपिंग के उद्देश्य से पहुंचा हुआ था।

बताया जा रहा है कि 29 मई शुक्रवार की रात को यह 10 सदस्यीय ट्रेकर्स दल गोई कैंप क्षेत्र (Goi Camp Area) में ठहरा हुआ था। रात के समय सभी लोग भोजन करने के बाद अपने-अपने टेंट में सो रहे थे। इसी दौरान देर रात बबिता पांडे अचानक अपने टेंट से बाहर निकलीं, लेकिन उसके बाद वह वापस नहीं लौटीं। सुबह जब काफी देर तक वह दिखाई नहीं दीं, तो पूरे दल में हड़कंप मच गया। खोजबीन करने के बाद जब उनका कुछ पता नहीं चला, तो तुरंत स्थानीय प्रशासन और उत्तरकाशी पुलिस को सूचित किया गया।

NDRF, SDRF और NIM की संयुक्त टीमें खंगाल रही हैं चप्पा-चप्पा
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए उत्तरकाशी पुलिस प्रशासन तुरंत एक्शन में आया। लापता महिला की तलाश के लिए दयारा बुग्याल सहित आसपास के जंगलों, गहरी खाइयों, गदेरों (बरसाती नालों), चट्टानों के बीच स्थित छोटे-छोटे उड्यारों (गुफाओं), झाड़ी-झंखाड़ और अन्य सभी संभावित व संदिग्ध स्थानों पर व्यापक स्तर पर खोज एवं बचाव अभियान (Search and Rescue Operation) चलाया जा रहा है।

इस मेगा रेस्क्यू ऑपरेशन में देश और प्रदेश की सबसे अनुभवी रेस्क्यू एजेंसियां समन्वित रूप से जुटी हुई हैं। रेस्क्यू ऑपरेशन में मुख्य रूप से निम्नलिखित टीमें शामिल हैं:
- उत्तरकाशी स्थानीय पुलिस (Uttarkashi Police)
- राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF)
- राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF)
- नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (NIM) के एक्सपर्ट्स
- राजस्व विभाग (Revenue Department) की टीम
- वन विभाग (Forest Department) के स्थानीय कर्मचारी

पुलिस अधीक्षक कमलेश उपाध्याय खुद कर रही हैं मॉनिटरिंग
उत्तरकाशी की पुलिस अधीक्षक (SP) कमलेश उपाध्याय द्वारा इस पूरे खोज अभियान की निरंतर समीक्षा और पल-पल की निगरानी की जा रही है। उनके सख्त निर्देशन में पुलिस उपाधीक्षक (DSP) उत्तरकाशी, जनक सिंह पंवार घटना की सूचना मिलने के बाद से ही खुद दयारा ट्रेक क्षेत्र में कैंप किए हुए हैं। वह स्वयं इस चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू ऑपरेशन का नेतृत्व कर रहे हैं और प्रत्येक गतिविधि पर सतत नजर बनाए हुए हैं ताकि किसी भी प्रकार की ढिलाई न हो।

पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम के लगातार बदलते मिजाज और घने जंगलों व गहरी खाइयों के कारण रेस्क्यू टीमों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन इसके बावजूद सभी एजेंसियां पूरी मुस्तैदी के साथ अपनी जान जोखिम में डालकर चप्पा-चप्पा खंगाल रही हैं। युकाडा (UCADA) के हेलीकॉप्टर की मदद मिलने से उन खाइयों और चट्टानी इलाकों की भी बारीकी से जांच की जा रही है, जहां पैदल पहुंचना बेहद खतरनाक और असंभव माना जाता है।

ट्रेकर्स की सुरक्षा को लेकर उठे गंभीर सवाल
दयारा बुग्याल जैसे सुरक्षित और लोकप्रिय माने जाने वाले ट्रेकिंग रूट पर इस तरह की घटना होने के बाद स्थानीय स्तर पर ट्रेकर्स की सुरक्षा और ट्रेकिंग एजेंसियों के नियमों के पालन को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। पुलिस प्रशासन का कहना है कि उनकी पहली और सबसे बड़ी प्राथमिकता बबिता पांडे की सकुशल बरामदगी है। लापता युवती की तलाश के लिए सभी संबंधित एजेंसियां हर संभव प्रयास कर रही हैं और यह अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक उनका पता नहीं चल जाता। प्रशासन ने स्थानीय लोगों और अन्य ट्रेकर्स से भी अपील की है कि यदि उन्हें कोई भी सुराग मिले तो तुरंत पुलिस को सूचित करें।