रामनगर(उत्तराखंड)।दिल्ली में महिलाओं और बच्चों के साथ कथित पुलिस बल प्रयोग और अमानवीय व्यवहार के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। इस घटना पर कानूनी जानकारों और सामाजिक संगठनों में गहरा आक्रोश देखने को मिल रहा है। रामनगर टैक्स बार एसोसिएशन ने इस पूरे प्रकरण पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे मानवाधिकारों और संवैधानिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन करार दिया है। संगठन ने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
संवैधानिक अधिकारों और मानव गरिमा का हनन
मामले में प्रतिक्रिया देते हुए रामनगर टैक्स बार के अध्यक्ष एडवोकेट डॉ. पूरन चंद्र पांडे ने कहा कि यदि प्रत्यक्षदर्शियों और मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आए आरोप सत्य पाए जाते हैं, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए एक अत्यंत गंभीर विषय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान हर नागरिक को मौलिक अधिकार प्रदान करता है। किसी भी स्थिति में नागरिकों के अधिकारों का हनन नहीं किया जा सकता, विशेषकर तब जब मामला महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा हो।
पूरन चंद्र पांडे ने संविधान के विभिन्न प्रावधानों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह घटना अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), अनुच्छेद 19 (शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने और एकत्र होने की स्वतंत्रता) तथा अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) का स्पष्ट अतिक्रमण है। उन्होंने जोर देकर कहा कि नागरिकों के इन संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना और उन्हें सुरक्षित वातावरण प्रदान करना राज्य की प्राथमिक और सर्वोच्च जिम्मेदारी है।
कानून व्यवस्था के नाम पर बर्बरता स्वीकार्य नहीं
कानून-व्यवस्था के संचालन पर बात करते हुए उन्होंने आगे कहा कि पुलिस का मुख्य दायित्व शांति और सुरक्षा बनाए रखना है। हालांकि, इस प्रक्रिया के दौरान संवैधानिक मर्यादाओं, मानव गरिमा और ‘विधि के शासन’ (Rule of Law) का पालन किया जाना अनिवार्य है। किसी भी शांतिपूर्ण स्थिति या प्रदर्शन के दौरान महिलाओं और बच्चों पर अनुचित बल प्रयोग करना या उनके साथ दुर्व्यवहार करना किसी भी सभ्य और लोकतांत्रिक समाज में तर्कसंगत नहीं ठहराया जा सकता।
टैक्स बार एसोसिएशन ने भारत सरकार, दिल्ली सरकार और संबंधित पुलिस प्रशासन से अपील की है कि इस पूरे मामले की बिना किसी पक्षपात के उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। इसके साथ ही, जांच में दोषी पाए जाने वाले पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कानून के तहत सख्त से सख्त दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
न्याय व्यवस्था पर पड़ता है प्रतिकूल प्रभाव
वहीं, रामनगर टैक्स बार के संयुक्त सचिव एडवोकेट मनु अग्रवाल ने इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह के अमानवीय व्यवहार और पुलिसिया बर्बरता से आम जनता का न्याय प्रणाली और कानून व्यवस्था पर से विश्वास उठने लगता है। जब कानून के रखवाले ही सीमाओं का उल्लंघन करते हैं, तो समाज में भय और असुरक्षा का माहौल पैदा होता है।
मनु अग्रवाल ने राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं को इस गंभीर घटना का स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेना चाहिए और एक स्वतंत्र व निष्पक्ष जांच टीम गठित करनी चाहिए। जांच के बाद सभी वास्तविक तथ्यों को जनता के सामने लाया जाना चाहिए ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
पीड़ितों को न्याय और सुरक्षा देने की अपील
संयुक्त सचिव ने यह भी मांग की कि प्रभावित महिलाओं और बच्चों को तुरंत प्रभाव से विधिक सहायता, न्याय और पूर्ण सुरक्षा उपलब्ध कराई जानी चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि भारतीय संविधान की मूल आत्मा प्रत्येक नागरिक की गरिमा, समानता और स्वतंत्रता को सुरक्षित रखना है। देश की सभी संवैधानिक संस्थाओं और प्रशासनिक निकायों का यह नैतिक और कानूनी कर्तव्य है कि वे हर परिस्थिति में इन लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करें।