पिथौरागढ़ में भूस्खलन और नहर टूटने से बड़ा सड़क हादसा, यातायात ठप
पिथौरागढ़।उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ अंतर्गत थल-उडियारी बैंड-बेरीनाग मोटर मार्ग पर चुनी पातल के समीप एक बड़ी प्रशासनिक व विभागीय लापरवाही उजागर हुई है। क्षेत्र में माइक्रोहाइडिल परियोजना को पानी आपूर्ति करने वाली नहर अचानक क्षतिग्रस्त हो गई। नहर टूटने के कारण पानी के तेज बहाव से पूरी पहाड़ी दरक गई और भारी-भरकम मलबा व विशालकाय बोल्डर मुख्य मोटर मार्ग पर आ गिरे। इस घटना के बाद मार्ग पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई, जिससे क्षेत्रीय यात्रियों और पर्यटकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

लोनिवि की लचर कार्यशैली: 1 घंटे बाद भेजी मशीन, वह भी मौके पर हुई खराब
मार्ग बंद होने की सूचना तुरंत लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) और स्थानीय प्रशासन को दी गई। आरोप है कि सूचना मिलने के करीब एक घंटे बाद विभाग ने मलबा हटाने के लिए महज एक जेसीबी मशीन मौके पर भेजी। लापरवाही का आलम यह रहा कि कुछ ही समय काम करने के बाद वह जेसीबी मशीन भी तकनीकी खराबी के कारण बंद हो गई।
पहाड़ी से गिरे विशाल बोल्डरों को हटाने के लिए जहां कई भारी मशीनों की आवश्यकता थी, वहां सिर्फ एक खराब मशीन भेजने से मौके पर मौजूद वाहन चालकों और यात्रियों में गहरा आक्रोश फैल गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि आपदा काल और संवेदनशील मौसम को देखते हुए लोनिवि को तत्परता दिखानी चाहिए थी, लेकिन मौके पर कोई भी जिम्मेदार अधिकारी स्थिति का जायजा लेने नहीं पहुंचा।
गर्मी और उमस में 5 घंटे तड़पे भूखे-प्यासे यात्री, शव यात्रा भी फंसी
मार्ग बाधित होने के कारण सड़क के दोनों ओर गाड़ियों की लंबी कतारें लग गईं। इस मुख्य मार्ग से दिल्ली, हल्द्वानी, बागेश्वर, अल्मोड़ा, डीडीहाट, मुनस्यारी, धारचूला, बेरीनाग और पिथौरागढ़ जाने वाली दर्जनों राज्य परिवहन निगम की बसें और सैकड़ों निजी व टैक्सी वाहन लंबे समय तक फंसे रहे।
चिलचिलाती गर्मी और उमस के बीच बसों व छोटे वाहनों में सवार बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग और मरीज भूखे-प्यासे लगभग पांच घंटे तक सड़क खुलने का इंतजार करते रहे। इतना ही नहीं, अंतिम संस्कार के लिए थल की ओर जा रही शव यात्रा के वाहन भी इस जाम में घंटों फंसे रहे, जिससे परिजनों को भारी परेशानी उठानी पड़ी।

पहले दी गई थी चेतावनी, जन-सुनवाई में शिकायत के बावजूद सोता रहा प्रशासन
स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह दुर्घटना टाली जा सकती थी। पिछले सप्ताह ही थल में आयोजित ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ कार्यक्रम के दौरान विभिन्न जनसंगठनों ने शासन-प्रशासन के समक्ष इस माइक्रोहाइडिल नहर के क्षतिग्रस्त होने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था।
जनता ने लिखित और मौखिक चेतावनी दी थी कि नहर की जर्जर हालत के कारण कभी भी बड़ा भूस्खलन हो सकता है और मुख्य सड़क बंद हो सकती है। इसके बावजूद संबंधित विभागों ने इस चेतावनी को गंभीरता से नहीं लिया और मरम्मत कार्य शुरू नहीं कराया। समय रहते ठोस कदम न उठाए जाने का खामियाजा आज आम जनता को भुगतना पड़ा।
जनप्रतिनिधियों ने अतिरिक्त जेसीबी मशीनों की मांग की
व्यापार संघ अध्यक्ष बबलू सामंत और सामाजिक कार्यकर्ता मुन्ना जंगपागी ने विभागीय सुस्ती पर कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने बताया कि मार्ग बाधित होते ही प्रशासनिक और विभागीय अधिकारियों को फोन पर घटना की जानकारी दे दी गई थी। इसके बाद भी कार्य में भारी देरी की गई।
जनप्रतिनिधियों ने कहा कि इतनी महत्वपूर्ण सड़क पर एक मशीन से काम चलाना जनहित के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने आपदा प्रबंधन नीति के तहत तुरंत अतिरिक्त जेसीबी मशीनें और पोकलैंड तैनात कर युद्धस्तर पर मार्ग सुचारू करने की मांग की। समाचार लिखे जाने तक मार्ग खोलने का प्रयास जारी था और सड़क पर आवाजाही पूरी तरह बहाल नहीं हो सकी थी।
पिथौरागढ़ जिले में बारिश से बिगड़े हालात, 15 अन्य सड़कें भी बंद
उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में हो रही लगातार बारिश के कारण पिथौरागढ़ जिले में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। थल-बेरीनाग मोटर मार्ग के अलावा जिले की 15 अन्य ग्रामीण व मुख्य सड़कें भी मलबा आने और भूस्खलन के कारण बंद पड़ी हैं। इससे कई दूरस्थ गांवों का संपर्क जिला मुख्यालय से कट गया है।
प्रशासनिक वक्तव्य
मामले पर बेरीनाग के तहसीलदार दयाल चंद्र मिश्रा ने बताया कि सड़क बंद होने की सूचना मिलते ही लोनिवि को जेसीबी मशीन मौके पर रवाना करने के निर्देश जारी कर दिए गए थे। पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा और बड़े बोल्डर गिरने के कारण मार्ग साफ करने में समय लग रहा है। प्रशासन का दावा है कि जल्द ही मलबा हटाकर यातायात पूरी तरह सुचारू कर दिया जाएगा।