कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में धूमधाम से मना विश्व बाघ दिवस, स्कूली बच्चों ने जंगल सफारी का उठाया आनंद
रामनगर।विश्व स्तर पर बाघों के संरक्षण और उनके प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के मकसद से कार्बेट टाइगर रिजर्व में अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस बड़े उत्साह और जन-सहभागिता के साथ मनाया गया। कार्बेट प्रशासन के निर्देशन में ढेला रेंज, सर्पदुली रेंज और कालागढ़ वन्यजीव प्रशिक्षण केंद्र में कई जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन आयोजनों में विद्यार्थियों, स्थानीय निवासियों, पर्यटकों, जिप्सी चालकों और वन विभाग के कर्मियों ने मिलकर हिस्सा लिया।

ढेला रेंज में मुख्य समारोह और जन-जागरूकता रैली
ढेला स्वागत द्वार पर आयोजित मुख्य कार्यक्रम की अगुवाई पार्क वार्डन बिन्दर पाल ने की। इस मौके पर बाघ रक्षक विद्यालय ढेला, ढिकुली और कालागढ़ के विद्यार्थियों, शिक्षकों, होटल एसोसिएशन के सदस्यों, स्थानीय ग्रामीणों, पर्यटकों और नेचर गाइडों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत में सभी उपस्थित लोगों ने बाघ संरक्षण, जैव-विविधता संवर्धन और पर्यावरण सुरक्षा का सामूहिक संकल्प लिया।

बाघ: स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र का प्रतीक
पार्क वार्डन बिन्दर पाल ने वन पारिस्थितिकी तंत्र में बाघ की भूमिका और उनके सामने मौजूद चुनौतियों पर विस्तार से बात रखी।
”बाघ केवल एक वन्यजीव नहीं है, बल्कि यह हमारे स्वस्थ और संतुलित वन पारिस्थितिकी तंत्र का मुख्य संकेतक है। बाघों की सुरक्षा सीधे तौर पर हमारे वनों, जल स्रोतों और मानव जीवन के सुरक्षित भविष्य से जुड़ी हुई है।”
— बिन्दर पाल, पार्क वार्डन
क्षेत्र पंचायत सदस्य सुनील नैवाल और ग्राम प्रधान प्रतिनिधि प्रहलाद सिंह ने भी विद्यार्थियों को प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाने और भविष्य में संरक्षण कार्यों में योगदान देने के लिए प्रेरित किया।

बच्चों की वेशभूषा रैली और मुफ़्त जंगल सफारी
जागरूकता कार्यक्रम के दौरान स्कूली बच्चों ने विभिन्न वन्यजीवों की आकर्षक वेशभूषा पहनकर और हाथों में स्लोगन लिखी तख्तियां लेकर एक रैली निकाली। इस प्रस्तुति ने सभी का ध्यान वन्यजीव संरक्षण की ओर आकर्षित किया।
कार्यक्रम के समापन के बाद बाघ रक्षक विद्यालयों से आए छात्र-छात्राओं को कार्बेट के घने जंगलों में मुफ़्त जंगल सफारी कराई गई। प्राकृतिक आवास में वन्यजीवों को देखने और जैव-विविधता को समझने का यह अनुभव बच्चों के लिए बेहद रोमांचक रहा।

सर्पदुली और कालागढ़ में विशेष जागरूकता कार्यक्रम
सर्पदुली रेंज के धनगढ़ी इंटरप्रिटेशन सेंटर में वन क्षेत्राधिकारी संजय पाण्डे के नेतृत्व में राजकीय इंटर कॉलेज ढिकुली के विद्यार्थियों के लिए विशेष सत्र आयोजित किया गया। युवाओं को कार्बेट की जैव-विविधता, बाघों के पदचिह्नों की पहचान और मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने के तरीकों की जानकारी दी गई।
अंत में सभी ने वनों में अवैध गतिविधियों को रोकने और प्लास्टिक-मुक्त पर्यावरण बनाने की शपथ ली।
वहीं, कालागढ़ वन्यजीव प्रशिक्षण केंद्र में वन क्षेत्राधिकारी इन्द्र सिंह बिष्ट की अध्यक्षता में विचार-गोष्ठी का आयोजन हुआ। यहाँ स्थानीय लोगों को संरक्षण में उनकी भूमिका समझाई गई और प्रशिक्षु वन आरक्षियों ने अपने अनुभव साझा किए। गोष्ठी के बाद परिसर में विशेष स्वच्छता अभियान चलाकर प्लास्टिक कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण किया गया।

विश्व के 70% बाघ भारत में: एक बड़ी उपलब्धि
कार्यक्रमों के दौरान विद्यार्थियों को बताया गया कि वर्तमान में भारत में लगभग 3,682 बाघ मौजूद हैं, जो दुनिया की कुल बाघ आबादी का लगभग 70 प्रतिशत है। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि यह उपलब्धि भारत की मजबूत संरक्षण नीति, वन विभाग की तत्परता और स्थानीय समुदायों के सहयोग का सुखद परिणाम है।
क्षेत्रीय निदेशकों और अधिकारियों ने अपना संदेश देते हुए कहा कि बाघ संरक्षण केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह हर नागरिक का नैतिक दायित्व है।
इस अवसर पर नवीन चन्द्र पाण्डे, अभय जोशी, इन्द्र सिंह बिष्ट, ललित आर्या, प्रमोद त्रिपाठी, मुख्य प्रकृतिविद् मोहन चन्द्र जोशी, वरिष्ठ प्रकृतिविद गौरव धोतरे, जीवन रौतेला, लवकुश सैनी, बब्लू पाण्डेय, देवेन्द्र कार्की, प्रधानाचार्य मनोज जोशी, प्रवक्ता नवेन्दु मठपाल और दीपक सिंह नेगी समेत बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण, पर्यटक और प्रकृति प्रेमी मौजूद रहे।