स्वच्छता ही सेवा पखवाड़ा 2026: 23वें दिन एनएसएस वालंटियर्स को दिया गया कचरा पृथक्करण और वेस्ट मैनेजमेंट का विशेष प्रशिक्षण
हल्द्वानी (उत्तराखंड)।शहर को स्वच्छ, सुंदर और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए एमबीपीजी कॉलेज हल्द्वानी में विशेष जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। देशभर में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक चलाए जा रहे ‘स्वच्छता ही सेवा पखवाड़ा 2026’ के 23वें दिन राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के छात्र-छात्राओं को कचरा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण के आधुनिक तौर-तरीकों से रूबरू कराया गया।
नगर निगम हल्द्वानी-काठगोदाम के नगर आयुक्त परितोष वर्मा के दिशा-निर्देशन में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं को ‘स्रोत पर ही कचरा पृथक्करण’ (Waste Segregation at Source) और 3R सिद्धांत (Reduce, Reuse, Recycle) की बारीकियों को समझाना रहा, ताकि वे समाज में स्वच्छता के सच्चे ब्रांड एंबेसडर बन सकें।
कचरे का सही निस्तारण: घर से ही करनी होगी शुरुआत
कार्यशाला के दौरान विषय विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए स्पष्ट किया कि एक स्वच्छ शहर की नींव केवल सरकारी तंत्र या सफाई कर्मचारियों के भरोसे नहीं रखी जा सकती, बल्कि इसकी असली शुरुआत हर नागरिक के घर की रसोई से होती है।
प्रभावी कचरा प्रबंधन का सबसे बुनियादी नियम यह है कि कचरे को उसके पैदा होने के स्थान पर ही चार अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जाए:
- गीला कचरा: रसोई के छिलके, बचा हुआ भोजन और जैविक अपशिष्ट।
- सूखा कचरा: कागज, गत्ते, प्लास्टिक और धातु के टुकड़े।
- सेनेटरी वेस्ट: व्यक्तिगत स्वच्छता से जुड़े अपशिष्ट।
- घरेलू हानिकारक कचरा: एक्सपायर्ड दवाइयां, टूटी ट्यूबलाइट्स, सीएफएल और बैटरी।
विशेषज्ञों ने जोर देकर कहा कि यदि नागरिक घर पर ही इन कचरों को अलग-अलग डस्टबिन में रखें और नगर निगम के संग्रहण वाहनों को अलग-अलग ही सौंपें, तो कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण, पुनर्चक्रण (Recycling) और खाद बनाने की प्रक्रिया बेहद आसान हो जाती है।
सिंगल यूज़ प्लास्टिक को कहें ना: 3R फॉर्मूले से समझें पर्यावरण सुरक्षा
आज के समय में प्लास्टिक प्रदूषण पूरी दुनिया के लिए एक विकराल समस्या बन चुका है। कार्यशाला में प्लास्टिक के अंधाधुंध इस्तेमाल से मिट्टी, पानी और आबोहवा पर पड़ रहे घातक प्रभावों पर गंभीर चर्चा हुई।
विद्यार्थियों को दैनिक जीवन में ‘सिंगल यूज़ प्लास्टिक’ (एक बार इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक) का पूरी तरह से बहिष्कार करने का संकल्प दिलाया गया। इसके विकल्प के रूप में जब भी बाजार जाएं, तो अपने साथ कपड़े या जूट का थैला ले जाने की आदत डालने पर बल दिया गया।
पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए दैनिक जीवन में 3R सिद्धांत को अपनाने के सरल उदाहरण प्रस्तुत किए गए:
- Reduce (कम करना): ऐसी वस्तुओं की खपत को कम करना जो पर्यावरण को नुकसान पहुंचाती हैं, खासकर अनावश्यक पैकिंग और सिंगल यूज़ प्लास्टिक।
- Reuse (पुनः उपयोग करना): पुरानी वस्तुओं या डिब्बों को फेंकने के बजाय उन्हें किसी अन्य रचनात्मक या उपयोगी काम में लाना।
- Recycle (पुनर्चक्रण करना): रीसायकल होने वाली सामग्री जैसे प्लास्टिक, कांच और धातु को अलग करके अधिकृत रीसाइक्लिंग नेटवर्क तक पहुंचाना।
युवा बनेंगे स्वच्छता क्रांति के नायक
कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारियों और वक्ताओं ने कॉलेज के एनएसएस विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि युवा किसी भी सामाजिक बदलाव की सबसे मजबूत कड़ी होते हैं। विद्यार्थी अपने घर और कॉलेज परिसर तक सीमित न रहकर अपने आसपास के मोहल्लों और समुदायों में भी लोगों को गीला और सूखा कचरा अलग-अलग करने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। स्वच्छता केवल प्रशासन या नगर निगम की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह हर एक नागरिक का नैतिक कर्तव्य है।
कार्यशाला में रही गणमान्य उपस्थिति
एमबीपीजी कॉलेज में आयोजित इस प्रभावशाली कार्यशाला में कॉलेज के समस्त एनएसएस प्रभारी, बैंणी सेना प्रोजेक्ट मैनेजर मनोज नेगी, स्वच्छ भारत मिशन टीम से मनीष पांडे तथा पीएमयू (PMU) टीम से पंकज द्विवेदी के साथ-साथ नगर निगम और महाविद्यालय परिवार के अनेक सदस्य उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में हल्द्वानी को एक स्वच्छ और प्लास्टिक-मुक्त शहर बनाने का संकल्प दोहराया।