देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड में आधी रात को अचानक आई एक खौफनाक आहट ने हजारों लोगों की नींद उड़ा दी। राज्य के कई हिस्सों में भूकंप के तेज और झटके महसूस किए गए, जिससे अफरा-तफरी मच गई। पौड़ी, रुद्रप्रयाग, चमोली, नैनीताल, अल्मोड़ा,उधमसिंह नगरसमेत आसपास के पहाड़ी इलाकों में जैसे ही धरती थरायी, लोग अपने घरों से बदहवास होकर बाहर की ओर भागे। खौफ का आलम यह था कि कड़कड़ाती ठंड और अंधेरे के बीच लोग घंटों खुले मैदानों में चीखते-चिल्लाते नजर आए।
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के आंकड़ों के मुताबिक, इस भूकंप का मुख्य केंद्र चमोली जिला रहा। भू-गर्भीय हलचल धरती की सतह से महज 13 किलोमीटर की गहराई पर दर्ज की गई। रिक्टर पैमाने पर भूकंप की तीव्रता 4.9 मापी गई। यद्यपि झटके काफी जोरदार थे, लेकिन राहत की बात यह रही कि अब तक किसी भी क्षेत्र से जान-माल के बड़े नुकसान की खबर नहीं मिली है। प्रशासन लगातार प्रभावित जिलों से संपर्क बनाए हुए है और स्थिति पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

दिल्ली से लेकर शिमला तक कांप उठी धरती
इस भूकंप का असर सिर्फ उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों तक ही सीमित नहीं रहा। इसके झटके उत्तर भारत के एक विशाल हिस्से में दर्ज किए गए। देश की राजधानी नई दिल्ली, नोएडा, चंडीगढ़, कुरुक्षेत्र और शिमला तक लोगों ने पंखे, झूमर और खिड़कियों को हिलते हुए महसूस किया। कई बहुमंजिला इमारतों में रहने वाले लोग दहशत के मारे लिफ्ट का इस्तेमाल छोड़कर सीढ़ियों से नीचे भागे। सोशल मीडिया पर भी आधी रात को ही भूकंप के वीडियो और लोगों के अनुभव ट्रेंड करने लगे।
आखिर क्यों बार-बार कांपता है उत्तराखंड?
हिमालय की गोद में बसा उत्तराखंड रणनीतिक और प्राकृतिक रूप से बेहद खूबसूरत होने के साथ-साथ भू-गर्भीय दृष्टि से अत्यधिक संवेदनशील माना जाता है। भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों के बीच लगातार हो रहे टकराव और दबाव के कारण इस क्षेत्र में ऊर्जा जमा होती रहती है। यही वजह है कि देवभूमि में आए दिन छोटे और मध्यम तीव्रता के भूकंपीय झटके महसूस किए जाते हैं।
संवेदनशील जोन में हुआ बदलाव: अब ‘जोन 6’ में आता है उत्तराखंड
उत्तराखंड की संवेदनशीलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि देश में भूकंप जोखिम के नक्शे में बड़ा बदलाव किया गया है। भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने देशभर में भूकंपीय खतरों का पुनर्मूल्यांकन करते हुए नया नक्शा जारी किया।
इस नए वर्गीकरण के तहत उत्तराखंड को पुराने संवेदनशील ‘जोन 4’ और ‘जोन 5’ से हटाकर सबसे खतरनाक और उच्च जोखिम वाले ‘जोन 6’ में शामिल कर दिया गया है। इसका साफ मतलब है कि राज्य में भविष्य में बड़े भूकंपीय खतरों की संभावना बनी रहती है। भू-वैज्ञानिकों का मानना है कि ऐसे लगातार आने वाले छोटे-छोटे झटके किसी बड़ी भू-गर्भीय हलचल का संकेत भी हो सकते हैं, इसलिए स्थानीय निवासियों को हमेशा सतर्क और जागरूक रहने की जरूरत है।