रुद्रपुर: 13 करोड़ नागरिकों के वोटिंग अधिकार छीनने का आरोप, श्रमिक संयुक्त मोर्चा ने राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने, मुख्य चुनाव आयुक्त को बर्खास्त करने और आपराधिक मुकदमा चलाने की मांग को लेकर अपर जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन।
रुद्रपुर (उत्तराखंड)। देश में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। रुद्रपुर में श्रमिक संयुक्त मोर्चा के तत्वावधान में विभिन्न जनसंगठनों और श्रमिक प्रतिनिधियों ने एक विशाल प्रदर्शन कर देश के राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन अपर जिलाधिकारी को सौंपा। मोर्चे ने आरोप लगाया है कि असंवैधानिक और मनमाने तरीके से किए गए विशेष गहन पुनरीक्षण के जरिए देश के 13 करोड़ से अधिक नागरिकों का मताधिकार छीन लिया गया है।
ज्ञापन सौंपने के दौरान प्रतिनिधियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए और उन्हें तत्काल पद से बर्खास्त कर कानूनी कार्रवाई की मांग की।

मताधिकार पर हमला और संवैधानिक संस्थाओं का दुरूपयोग
प्रदर्शन के दौरान आयोजित सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि भारत का संविधान हर नागरिक को—चाहे वह देश का प्रधानमंत्री हो, उद्योगपति हो, प्रशासनिक अधिकारी हो या फिर एक गरीब मजदूर—समान रूप से वोट देने का अधिकार प्रदान करता है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में यह मताधिकार ही आम जनता की सबसे बड़ी ताकत है।
वक्ताओं का आरोप है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के माध्यम से देश भर में करोड़ों पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूचियों से हटा दिए गए हैं। यह कार्रवाई निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव की नींव पर सीधा प्रहार करती है। वक्ताओं ने दावा किया कि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को निष्पक्षता से कार्य करना चाहिए, लेकिन इस प्रक्रिया में संवैधानिक मानकों और नियमों की अनदेखी की गई है।
फॉर्म 6 और फॉर्म 7 में बदलाव पर उठाए सवाल
मोर्चे के नेताओं ने हालिया घटनाक्रमों का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव आयोग द्वारा फॉर्म 6 और फॉर्म 7 की शर्तों और नियमों में किए गए बदलावों पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रक्रियागत आपत्तियों और असहमति के बावजूद मनमाने ढंग से दिशा-निर्देश तय किए गए, जिससे बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां हुईं।
वक्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों का उल्लेख करते हुए कहा कि बिना अनुमति और उचित संवैधानिक प्रक्रिया के किए गए बदलाव पूरी चुनाव प्रणाली की साख पर प्रश्नचिह्न लगाते हैं। 13 करोड़ से अधिक नागरिकों को मतदाता सूची से बाहर करना एक बेहद गंभीर मामला है और इसके जिम्मेदार लोगों पर सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
श्रमिक संयुक्त मोर्चा की मुख्य मांगें
अपर जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को भेजे गए ज्ञापन में श्रमिक संयुक्त मोर्चा ने निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखी हैं:
- SIR प्रक्रिया पर तुरंत रोक: देश भर में चलाई जा रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए और जिन नागरिकों के नाम हटाए गए हैं, उनके वोटिंग अधिकार बहाल किए जाएं।
- मुख्य चुनाव आयुक्त की बर्खास्तगी: 13 करोड़ नागरिकों का मताधिकार प्रभावित होने की जिम्मेदारी तय करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से बर्खास्त किया जाए और उन पर आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाए।
- गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच: फॉर्म 6 और फॉर्म 7 में असंवैधानिक बदलावों तथा मतदाता सूचियों में मनमर्जी से नाम जोड़ने/हटाने की पूरी साजिश की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और दोषियों को जेल भेजा जाए।
- नियुक्ति नियमों की बहाली: चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया के नियमों को पूर्ववत (पहले की तरह) किया जाए ताकि आयोग की स्वायत्तता और निष्पक्षता बनी रहे।
विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि रहे मौजूद
इस विरोध प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने के दौरान क्षेत्र के प्रमुख सामाजिक और मजदूर संगठनों से जुड़े प्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। इनमें मोर्चा अध्यक्ष दिनेश तिवारी, भाकपा (माले) के जिला सचिव ललित मटियाली, सीएसटीयू के केंद्रीय सचिव मुकुल, इंकलाबी मजदूर केंद्र के शहर सचिव कैलाश भट्ट, प्रगतिशील महिला एकता केंद्र की रविन्द्र कौर, कार्लोस से राजेश सिंह, विजय कुमार, संदीप बजाज, भरत जोशी, मदन लाल, दिनेश कुमार, दीवान सिंह, प्रदीप और हरीश प्रमुख रूप से शामिल थे।
सभी वक्ताओं ने एक सुर में चेतावनी दी कि यदि आम नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों को बहाल नहीं किया गया और इस असंवैधानिक प्रक्रिया को नहीं रोका गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।