रामनगर में बेगारी और शोषण के खिलाफ मुखर हुईं भोजनमाताएं, मानदेय बढ़ाने की उठी पुरजोर मांग
रामनगर:सरकारी स्कूलों में नौनिहालों के लिए भोजन पकाने वाली भोजनमाताओं के सब्र का बांध अब टूटने लगा है। बेहद मामूली मानदेय पर दिन-रात मेहनत करने के बावजूद मिल रही उपेक्षा से परेशान होकर भोजनमाताओं ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। 5 अक्टूबर को प्रगतिशील भोजनमाता संगठन के बैनर तले रामनगर क्षेत्र की दर्जनों भोजनमाताओं ने एकजुट होकर क्षेत्रीय विधायक दीवान सिंह बिष्ट से मुलाकात की और अपनी लंबे समय से लंबित समस्याओं के समाधान के लिए एक ज्ञापन सौंपा।
महंगाई के दौर में 3 हजार का मानदेय बेगारी के समान
बैठक के दौरान प्रगतिशील भोजनमाता संगठन की ब्लॉक अध्यक्ष बिमला देवी ने भोजनमाताओं की दयनीय स्थिति को प्रमुखता से रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में जब महंगाई चरम पर है, तब भोजनमाताओं को प्रति माह मात्र 3 हजार रुपये का मानदेय दिया जा रहा है। इतने कम पैसों में परिवार चलाना तो दूर, अपनी मूलभूत जरूरतों को पूरा करना भी नामुमकिन हो गया है। इसे सीधे तौर पर श्रम का शोषण और बेगारी ही कहा जा सकता है। सरकार को तुरंत संज्ञान लेते हुए मानदेय में सम्मानजनक बढ़ोतरी करनी चाहिए।

चौथ श्रेणी का पूरा काम, पर अधिकार शून्य
स्कूलों में कार्य परिस्थितियों की पोल खोलते हुए संगठन के प्रतिनिधियों ने बताया कि भोजनमाताओं की जिम्मेदारी केवल खाना बनाने और बर्तन धोने तक सीमित नहीं रह गई है। स्कूलों में उनसे सफाई कर्मचारी, माली, चौकीदार और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी वाले सभी काम जबरन करवाए जाते हैं। इतना ही नहीं, परीक्षाओं के आयोजन, शिक्षकों के प्रशिक्षण और चुनावों के समय भी भोजनमाताओं से अतिरिक्त काम लिया जाता है।
अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि इस अतिरिक्त मेहनत का कोई अतिरिक्त भुगतान या भत्ता नहीं दिया जाता। कई विद्यालयों में भोजनमाताओं को स्कूल खुलने के आधिकारिक समय से काफी पहले बुला लिया जाता है और छुट्टी के काफी बाद तक रोक कर रखा जाता है। जब कोई भोजनमाता इस अतिरिक्त काम या बेगारी का विरोध करती है, तो उन्हें नौकरी से बाहर निकालने की धमकी दी जाती है।
स्थायी करने और चतुर्थ श्रेणी दर्जा देने की मांग
इस दौरान प्रगतिशील महिला एकता केंद्र की प्रतिनिधि तुलसी छिंवाल ने सरकार की नीतियों पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि एक ओर तो सरकार मंचों से महिला सशक्तिकरण की बड़ी-बड़ी बातें करती है, वहीं दूसरी ओर अपनी ही व्यवस्था के तहत काम कर रही भोजनमाताओं का जमकर शोषण कर रही है। जब भोजनमाताओं से नियमित चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की तरह पूरा काम लिया जा रहा है, तो उन्हें कागजों पर भी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का दर्जा क्यों नहीं दिया जाता?
संगठन ने स्पष्ट मांग रखी कि सरकार सभी भोजनमाताओं को सेवा में पक्का करे और उसी के अनुरूप चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का वेतनमान व अन्य सभी सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं प्रदान करे।
मुहिम में शामिल प्रमुख चेहरे
मांग पत्र सौंपने वाले प्रतिनिधिमंडल में भारी संख्या में स्थानीय भोजनमाताएं मौजूद रहीं। इस दौरान सुनीता देवी, गीता देवी, आनंदी देवी, फिरदौस, शबाना, दीपा रावत, बिमला देवी, सुमन देवी, आशा देवी, रेवती देवी, कलावती देवी और प्रगतिशील महिला एकता केंद्र की तुलसी छिंवाल प्रमुख रूप से शामिल रहीं। भोजनमाताओं ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी जायज मांगों पर जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो वे अपने अधिकारों के लिए आंदोलन को और तेज करने के लिए बाध्य होंगी।