राजकीय सम्मान के साथ पंचतत्व में विलीन हुईं उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन की अग्रणी नेत्री सरोज नेगी
रामनगर। उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन में अपनी मजबूत उपस्थिति और नेतृत्वकारी भूमिका निभाने वाली प्रसिद्ध राज्य आंदोलनकारी सरोज नेगी पंचतत्व में विलीन हो गई हैं। सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 को रामनगर स्थित विश्राम घाट पर उनका अंतिम संस्कार पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ किया गया। उनके निधन से पूरे क्षेत्र और उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों के बीच भारी शोक की लहर है।
दिल्ली में उपचार के दौरान हुआ निधन
कोटद्वार रोड स्थित विपिन बिहार की निवासी सरोज नेगी पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रही थीं। उनका उपचार दिल्ली के एक अस्पताल में किया जा रहा था, जहाँ कल इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। जैसे ही उनके निधन का दुखद समाचार रामनगर पहुंचा, पूरा क्षेत्र गमगीन हो गया। देर रात परिजन उनके पार्थिव शरीर को लेकर रामनगर स्थित उनके निवास स्थान पहुंचे।
निवास स्थान पर लगा श्रद्धांजलि देने वालों का तांता
सोमवार की सुबह से ही उनके निवास स्थान पर शासन-प्रशासन, विभिन्न सामाजिक-राजनीतिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों का तांता लगा रहा। हर किसी ने नम आंखों से उनके पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि दी।
प्रशासनिक और पुलिस दल की ओर से उप जिलाधिकारी रामनगर के प्रतिनिधि बृजेश कुमार (राजस्व निरीक्षक) तथा प्रभारी निरीक्षक कोतवाली रामनगर के प्रतिनिधि हेम चन्द्र राणा एवं संजय सिंह ने पुष्प चक्र अर्पित कर दिवंगत आंदोलनकारी को सम्मान दिया।

’सरोज नेगी अमर रहें’ के नारों से गूंजा परिसर
उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी मंच के प्रतिनिधियों ने अपनी साथी को याद करते हुए भावुक श्रद्धांजलि दी। मंच के संयोजक चंद्रशेखर जोशी, प्रभात ध्यानी, डॉ. धनेश्वरी घिल्डियाल, देवकी असनोड़ा, हरिमोहन, योगेश सती और इंद्र सिंह मनराल सहित बड़ी संख्या में उपस्थित आंदोलनकारियों ने जैसे ही उनके पार्थिव शरीर पर पुष्पांजलि अर्पित की, पूरा परिसर “सरोज नेगी अमर रहें, अमर रहें” के नारों से गूंज उठा।
आंदोलनकारियों ने कहा कि पृथक उत्तराखंड राज्य के निर्माण में सरोज नेगी का निस्वार्थ योगदान और समर्पण हमेशा याद रखा जाएगा। उनका इस तरह से असमय चले जाना केवल उनके परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे आंदोलनकारी समाज और राज्य के लिए एक अपूरणीय क्षति है।
पुत्र अनिल नेगी ने दी मुखाग्नि
घर पर श्रद्धांजलि सभा के बाद रामनगर विश्राम घाट के लिए अंतिम यात्रा निकाली गई, जिसमें सैकड़ों की संख्या में लोग शामिल हुए। विश्राम घाट पर पुलिस बल द्वारा उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया, जिसके पश्चात उनके पुत्र अनिल नेगी ने नम आंखों से पार्थिव शरीर को मुखाग्नि दी।
सरोज नेगी अपने पीछे पति लक्ष्मण सिंह नेगी, पुत्र अनिल नेगी, तथा बेटियों बीना, वर्षा जीना और डिंपल बिष्ट से भरा-पूरा परिवार छोड़ गई हैं।
अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब
इस अंतिम यात्रा और दाह संस्कार के समय गोविंद सिंह बिष्ट, जितेंद्र बिष्ट, ललित रावत, हेम बहुगुणा, मुकुल, रमेश सत्यवाली, लीलाधर असनोड़ा, रमेश चंद्र पांडे, रमेश चंद्र भट्ट, नवीन जोशी सहित बड़ी संख्या में परिजन, रिश्तेदार, स्थानीय जनप्रतिनिधि, राजनीतिक दलों के सदस्य और आम नागरिक मौजूद रहे।