रामनगर में कॉर्बेट साहित्य महोत्सव का शानदार आगाज: प्रकृति, साहित्य और वन्यजीव प्रेमियों का बना महासंगम
रामनगर। कॉर्बेट नेशनल पार्क की अनूठी प्राकृतिक जैव-विविधता और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान देने के उद्देश्य से ‘कॉर्बेट साहित्य महोत्सव 2026’ का औपचारिक उद्घाटन हो गया है। रामनगर (नैनीताल) स्थित ढिकुली के रिवर व्यू रिसॉर्ट में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन और अतिथियों का स्वागत पौधा भेंट कर की गई। 6 अक्टूबर से 9 अक्टूबर 2026 तक चलने वाला यह चार दिवसीय महोत्सव रामनगर के तीन अलग-अलग प्रमुख स्थानों पर आयोजित किया जा रहा है।
महोत्सव के पहले दिन की सभी गतिविधियां कोसी नदी के सुरम्य तट पर “Stories from a living landscape” विषय के तहत आयोजित की गईं। उत्तराखंड वन विभाग, कॉर्बेट टाइगर रिजर्व और उत्तराखंड पर्यटन के संयुक्त सहयोग से आयोजित इस लिटरेचर फेस्टिवल का मुख्य उद्देश्य कॉर्बेट के जंगलों की कहानियों, इतिहास और लोक संस्कृति को दुनिया के कोने-कोने तक पहुंचाना है।

किताबें समाज का दर्पण और भविष्य की दिशा:
समारोह के उद्घाटन अवसर पर उत्तराखंड के वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि किताबें समाज का सच्चा दर्पण होती हैं। इनके जरिए आने वाली पीढ़ियां अपने इतिहास, संस्कृति और समृद्ध विरासत को करीब से समझती हैं, जिससे उनके भविष्य के निर्माण की दिशा तय होती है। उन्होंने कहा कि यह पहला साहित्य महोत्सव दुनिया तक कॉर्बेट की वास्तविक गाथाओं को पहुंचाने में एक मील का पत्थर साबित होगा।
वन मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि लिटरेचर फेस्टिवल के माध्यम से लोग न केवल कॉर्बेट के जंगलों और बाघों को जानेंगे, बल्कि यहां की स्थानीय संस्कृति, जीवनशैली और लोगों की रोजमर्रा की कहानियों को भी रचनात्मकता के साथ समझ सकेंगे। यह मंच साहित्यकारों, गाइडों, वन्यजीव विशेषज्ञों और पर्यटकों के बीच एक नया पुल बनाने का काम करेगा।

अनुभवों को मिलेगा कविता और कहानियों का रूप:
यह आयोजन सिर्फ औपचारिक किताबों या भाषणों तक सीमित नहीं रहने वाला है। इसके माध्यम से कॉर्बेट से जुड़े गाइड, नेचुरलिस्ट, स्थानीय निवासी और वन्यजीव प्रेमी अपने जमीनी अनुभवों को कविता, कहानियों और शब्दों में ढाल सकेंगे। इससे कॉर्बेट की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत को एक ऐतिहासिक और साहित्यिक दस्तावेज के रूप में सहेजने में मदद मिलेगी।
उत्तराखंड शासन के प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु ने कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर डॉ. साकेत बडोला और उनकी टीम की सराहना करते हुए कहा कि वन विभाग, स्थानीय समुदाय और उद्यमियों का यह संयुक्त प्रयास पूरे विश्व के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण स्थापित करेगा। वहीं, मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक एवं प्रमुख वन संरक्षक (वन्यजीव) नीना ग्रेवाल ने कहा कि यह महोत्सव प्रतिभागियों को प्रकृति और जैव विविधता को बहुत करीब से देखने और महसूस करने का अवसर देता है।

दिग्गजों की मौजूदगी ने बढ़ाया मान:
इस ऐतिहासिक अवसर पर उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों सहित राष्ट्रीय स्तर के वन्यजीव लेखक, फोटोग्राफर, इतिहासकार, पारिस्थितिकी विशेषज्ञ, पक्षी विशेषज्ञ और पर्यावरणविद उपस्थित रहे। कार्यक्रम में सी. रविशंकर, संजय कुमार, एस.के. अवस्थी, समीर सिन्हा, कुमारी टी. तेजिस्वनी, नीतीश मणि त्रिपाठी, नीरज शर्मा और राहुल मिश्रा जैसे वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

इसके साथ ही स्थानीय लोक गायक, रंगकर्मी, एंकर, पत्रकार और पद्मश्री से सम्मानित प्रतिष्ठित हस्तियों की उपस्थिति ने इस साहित्यिक कुंभ में चार चांद लगा दिए। चार दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव से कॉर्बेट टाइगर रिजर्व को न केवल वन्यजीव संरक्षण बल्कि साहित्य, कला और सामुदायिक सहभागिता के संगम के रूप में एक नई अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने की पूरी उम्मीद है।