रामनगर में प्रकृति, साहित्य और संस्कृति का महासंगम: कॉर्बेट लिट् फेस्ट के दूसरे दिन गूंजा पर्यावरण संरक्षण का संदेश
रामनगर/नैनीताल।उत्तराखंड के रामनगर में आयोजित तीन दिवसीय ‘कॉर्बेट साहित्य महोत्सव-2026’ के दूसरे दिन प्रकृति प्रेमियों, साहित्यकारों और पर्यावरणविदों का शानदार जमावड़ा देखने को मिला। वन्यजीव सप्ताह के तहत आयोजित इस बहुप्रतीक्षित महोत्सव में हिमालय की संवेदनशीलता, पक्षी विविधता और उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत पर गहन मंथन हुआ।
कार्यक्रम के तकनीकी और वैचारिक सत्रों में देश-विदेश से पहुंचे विशेषज्ञों ने हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के सामने खड़ी चुनौतियों पर प्रकाश डाला। वक्ताओं ने वैज्ञानिक आंकड़ों के आधार पर स्पष्ट किया कि हिमालय सिर्फ बर्फ और चट्टानों का समूह नहीं है, बल्कि यह करोड़ों लोगों की जीवनरेखा है। यदि देश और राज्य के भविष्य को सुरक्षित रखना है, तो स्थानीय समुदायों को साथ लेकर संरक्षण की ठोस रणनीतियां बनानी होंगी।

’Birds of Corbett’ पुस्तक का विमोचन
महोत्सव का मुख्य आकर्षण ‘बर्ड्स ऑफ कॉर्बेट’ (Birds of Corbett) पुस्तक का औपचारिक विमोचन रहा। इस पुस्तक को फील्ड डायरेक्टर डॉ. साकेत बडोला और शोधार्थी मोहम्मद आरिफ अंसारी ने तैयार किया है।
यह पुस्तक विशेष रूप से बच्चों और युवा पाठकों को ध्यान में रखकर रची गई है। इसमें रंगीन चित्रों, बेहद सरल भाषा और जीवंत प्रस्तुति के जरिए कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के अद्भुत पक्षी संसार को उकेरा गया है। इस कृति का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी के भीतर प्रकृति, पक्षियों और वन्यजीव संरक्षण के प्रति गहरी जिज्ञासा और संवेदनशीलता जगाना है। वन विभाग के अधिकारियों और प्रकृति प्रेमियों ने इस प्रकाशन को कॉर्बेट की जैव विविधता को भावी पीढ़ी तक पहुंचाने का एक सराहनीय प्रयास बताया।

पहाड़ी भोजन से बीमारियों से बचाव और रिवर्स माइग्रेशन की राह
महोत्सव के एक विशेष सत्र में उत्तराखंड की पारंपरिक जीवनशैली, जैविक खेती और पहाड़ी व्यंजनों पर बेहद रोचक चर्चा हुई। वक्ताओं ने पारंपरिक पहाड़ी बर्तनों (जैसे भड्डू) और पारंपरिक भोजन पकाने के तरीकों की औषधीय गुणवत्ता को रेखांकित किया।
- मोटे अनाज और दालें: झंगोरा, कौणी, मड़ुआ (रागी), गहत और भट्ट की दालों के पौष्टिक गुणों पर विस्तार से बात की गई।
- स्वास्थ्य लाभ: विशेषज्ञों ने जोर देकर कहा कि पारंपरिक पहाड़ी खान-पान न केवल असाध्य रोगों से शरीर की रक्षा करता है, बल्कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में ऊर्जा बनाए रखने का प्राकृतिक जरिया है।
- रोजगार और पलायन पर रोक: फास्ट फूड के दौर में ऑर्गेनिक फार्मिंग और पारंपरिक खान-पान को बढ़ावा देकर राज्य में ‘रिवर्स माइग्रेशन’ (पलायन रोकने) को गति दी जा सकती है और स्थानीय युवाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं।

वन्यजीव सप्ताह के तहत वाद-विवाद और कठपुतली शो
साहित्यिक सत्रों के साथ-साथ वन्यप्राणी सप्ताह के अंतर्गत जागरूकता गतिविधियों का आयोजन भी तेजी से चल रहा है।
- मानव-वन्यजीव संघर्ष पर वाद-विवाद: कॉर्बेट वन्यजीव प्रशिक्षण केंद्र, कालागढ़ में विद्यार्थियों के लिए एक विचारोत्तेजक वाद-विवाद प्रतियोगिता आयोजित की गई। इसमें छात्र-छात्राओं ने मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ते संघर्ष के कारणों और उसके समाधान के प्रभावी उपायों पर अपने तर्क रखे।
- सांस्कृतिक प्रस्तुतियां एवं कठपुतली शो: रामनगर स्थित वन विश्राम भवन में स्कूली बच्चों द्वारा पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण पर आधारित गीत, नृत्य और नाटक प्रस्तुत किए जा रहे हैं। साथ ही, शाम को पारंपरिक कठपुतली कला के माध्यम से आम जनता को पर्यावरण और वन्यजीवों के साथ सह-अस्तित्व का संदेश बड़े ही सरल और मनोरंजक अंदाज में दिया गया।

इस आयोजन के माध्यम से कॉर्बेट टाइगर रिजर्व ने खुद को केवल एक राष्ट्रीय उद्यान के रूप में नहीं, बल्कि साहित्य, कला, पर्यावरण और सामुदायिक भागीदारी के एक अनूठे केंद्र के रूप में स्थापित किया है। कार्यक्रम में पद्मश्री से सम्मानित हस्तियों, प्रशासनिक अधिकारियों, पत्रकारों और वन्यजीव फोटोग्राफरों की गरिमामयी उपस्थिति रही।