कन्या पूजन तभी सार्थक जब बेटियों को मिले सुरक्षा और समान अवसर, 149 मेधावी बालिकाओं को मिले स्मार्टफोन
देहरादून। नवरात्र के पावन अवसर और अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के खास संयोग पर राजधानी देहरादून स्थित आईआरटीडी प्रेक्षागृह में ‘बालिका शिक्षा प्रोत्साहन कार्यक्रम’ का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में उत्तराखंड बोर्ड की 149 मेधावी छात्राओं को उनकी शानदार उपलब्धियों के लिए स्मार्टफोन प्रदान कर सम्मानित किया गया।
डिजिटल क्रांति के इस दौर में छात्राओं को तकनीक से जोड़ने और उनकी पढ़ाई को आसान बनाने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है। सम्मान प्राप्त करने वाली बालिकाओं के चेहरे खिल उठे और प्रेक्षागृह तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

कन्या पूजन और नारी शक्ति का वास्तविक स्वरूप
भारतीय संस्कृति में बेटियों को शक्ति का रूप मानकर पूजने की परंपरा रही है। नवरात्र के पहले दिन और बालिका दिवस के संगम पर इस बात पर जोर दिया गया कि कन्या पूजन की असली सार्थकता केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि बेटियों को समाज में बराबरी का हक, भयमुक्त वातावरण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आगे बढ़ने के असीमित अवसर देना ही सच्ची पूजा है।
बेटियां न केवल दो परिवारों का मान बढ़ाती हैं, बल्कि वे सशक्त समाज और एक विकसित राष्ट्र की मजबूत नींव भी रखती हैं।

डिजिटल शिक्षा और तकनीक से सशक्त होतीं उत्तराखंड की बेटियाँ
वर्तमान समय में आधुनिक तकनीक और डिजिटल शिक्षा की भूमिका काफी बढ़ गई है। स्मार्टफोन वितरण योजना का मुख्य ध्येय यही है कि दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाली मेधावी छात्राएं भी इंटरनेट और डिजिटल साधनों के जरिए अपने कौशल और ज्ञान का विकास कर सकें।
इसके साथ ही, राजकीय विद्यालयों के कक्षा 10वीं और 12वीं के छात्र-छात्राओं को भी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से टैबलेट खरीदने के लिए आर्थिक सहायता दी जा रही है। इससे राज्य में डिजिटल डिवाइड को समाप्त करने में बड़ी मदद मिल रही है।

उत्तराखंड में महिला सशक्तिकरण की प्रमुख योजनाएं
राज्य सरकार बेटियों के जन्म से लेकर उनकी उच्च शिक्षा, सुरक्षा और स्वरोजगार तक के लिए कई कल्याणकारी नीतियां चला रही है:
- 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण: राज्य की सरकारी नौकरियों में महिलाओं के लिए 30 फीसदी क्षैतिज आरक्षण की व्यवस्था लागू है।
- नंदा गौरा योजना: बेटी के जन्म पर 11,000 रुपये और 12वीं परीक्षा उत्तीर्ण करने पर 51,000 रुपये की वित्तीय सहायता दी जाती है। अब तक 4 लाख से अधिक बालिकाएं इससे लाभान्वित हो चुकी हैं।
- निःशुल्क शिक्षा एवं साइकिल योजना: कक्षा 1 से 12वीं तक मुफ्त पाठ्य पुस्तकें, साइकिल योजना और दूर-दराज की छात्राओं के लिए महिला छात्रावासों का निर्माण कराया जा रहा है।
- ड्रोन दीदी एवं कौशल विकास: पारंपरिक पढ़ाई से इतर बेटियों को ड्रोन संचालन, आजीविका संवर्धन और नव्या 2.0 जैसे कार्यक्रमों के तहत एंटरप्रेन्योरशिप (उद्यमिता) का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
- सुरक्षा एवं सहायता तंत्र: अनाथ बच्चों को सरकारी सेवाओं में 5 प्रतिशत आरक्षण और पॉक्सो (POCSO) पीड़ितों की सहायता के लिए हर जिले में सपोर्ट पर्सन तैनात किए गए हैं।

कठोर कानून और युवाओं के सपनों की सुरक्षा
उत्तराखंड में युवाओं की मेहनत और प्रतिभा की सुरक्षा के लिए देश का सबसे सख्त ‘नकल विरोधी कानून’ लागू किया गया है। पारदर्शिता के साथ भर्ती प्रक्रिया संचालित होने से पिछले पांच वर्षों में 35,000 से अधिक युवाओं को पारदर्शी तरीके से सरकारी नौकरियां मिली हैं।
आयोजन के दौरान यह संदेश भी दिया गया कि राज्य की हर एक बेटी निडर होकर बड़े सपने देखे, निरंतर परिश्रम करे और अपने आत्मविश्वास के बल पर राज्य व देश का नाम रोशन करे। उत्तराखंड को देश के श्रेष्ठ राज्यों की श्रेणी में खड़ा करने के लिए बालिका शिक्षा और महिला सुरक्षा को सर्वोपरि रखा जा रहा है।