कालाढूंगी: उत्तराखंड के सरकारी स्कूलों में बच्चों का निवाला तैयार करने वाली भोजनमाताओं के सब्र का बांध अब टूटने लगा है। कमरतोड़ महंगाई के इस दौर में महज ₹3,000 महीने के मामूली मानदेय पर काम करने को मजबूर भोजनमाताओं ने अब सरकार के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद कर दी है। प्रगतिशील भोजनमाता संगठन के बैनर तले एकजुट हुई महिलाओं ने अपनी मांगों को लेकर उपजिलाधिकारी के जरिए मुख्यमंत्री को एक मांग पत्र भेजा है, जिसमें मानदेय बढ़ाने और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का दर्जा देने की पुरजोर सिफारिश की गई है।
महंगाई के दौर में ₹3000 की मामूली रकम, वो भी सिर्फ 11 महीने
कालाढूंगी क्षेत्र की भोजनमाताओं का दर्द ज्ञापन के दौरान साफ छलका। उनका कहना है कि आज के दौर में जब रसोई गैस, सरसों का तेल, दालें और हरी सब्जियां आसमान छू रही हैं, तब उन्हें सिर्फ ₹3,000 महीने दिए जाते हैं। हद तो यह है कि यह मामूली रकम भी उन्हें साल के पूरे 12 महीने नहीं, बल्कि सिर्फ 11 महीने ही नसीब होती है। ऐसे में इस महंगाई में परिवार का पालन-पोषण करना उनके लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
काम का भारी बोझ, फिर भी अधिकार से वंचित
स्कूलों में अपनी सेवाएं दे रही भोजनमाताओं का कहना है कि उनसे सुबह से शाम तक कड़ी मेहनत कराई जाती है। भोजन पकाने से लेकर बर्तन धोने, किचन की साफ-सफाई और बच्चों को खाना परोसने तक का पूरा जिम्मा उन्हीं के कंधों पर होता है। इतने भारी काम के बावजूद उन्हें न तो सम्मानजनक मानदेय मिलता है और न ही कोई सामाजिक सुरक्षा।
भोजनमाताओं की मुख्य मांगें:
- मानदेय में तुरंत बढ़ोतरी: बढ़ती महंगाई के अनुपात में भोजनमाताओं के मानदेय में सम्मानजनक इजाफा किया जाए।
- पूरे 12 महीने का भुगतान: मानदेय कटौती बंद कर साल के पूरे 12 महीने का भुगतान सुनिश्चित हो।
- चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का दर्जा: स्कूलों में किए जा रहे काम के आधार पर उन्हें राज्य सरकार के चतुर्थ श्रेणी (Class IV) कर्मचारी के रूप में नियमित किया जाए और उसी अनुरूप वेतन और सुविधाएं दी जाएं।
आंदोलन को मिला महिला संगठनों का साथ
इस मांग पत्र को सौंपने के दौरान प्रगतिशील महिला एकता केंद्र ने भी भोजनमाताओं के समर्थन में आवाज उठाई। ज्ञापन देने वालों में वीना करायत, शांति देवी, मोहनी देवी, सरस्वती, आनंदी देवी, गीता देवी, भावना, मंजू और प्रगतिशील महिला एकता केंद्र की प्रतिनिधि तुलसी समेत बड़ी संख्या में स्थानीय भोजनमाताएं मौजूद रहीं। भोजनमाताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो वे अपने अधिकारों के लिए आंदोलन को और तेज करने के लिए मजबूर होंगी।