रामनगर: देश में मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण के लिए चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ जन-आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। संयुक्त संघर्ष समिति के तत्वावधान में लखनपुर चौक पर एक विशाल धरना-प्रदर्शन का आयोजन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया को पूरी तरह रद्द करने तथा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से बर्खास्त कर तुरंत गिरफ्तार करने की पुरजोर मांग उठाई। इस दौरान चौक पर जोरदार नारेबाजी के बाद स्थानीय प्रशासन और उपजिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को एक विस्तृत मांग पत्र और ज्ञापन प्रेषित किया गया।

नागरिक अधिकारों पर हमला और लोकतंत्र का हनन
लखनपुर चौक पर आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने वर्तमान चुनाव सुधार प्रक्रियाओं और चुनावी नीतियों पर तीखे सवाल खड़े किए। वक्ताओं का आरोप था कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की आड़ में अब तक देश भर से 13 करोड़ से अधिक वैध नागरिकों के नाम मनमाने और असंवैधानिक तरीके से मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। यह प्रक्रिया सीधे तौर पर लोकतंत्र की आत्मा और नागरिकों के मौलिक अधिकारों पर सीधा प्रहार है।
सभा में कहा गया कि यह पूरी कवायद असल में पिछले दरवाजे से राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (NRC) लागू करने का ही एक जरिया बन चुकी है। इस प्रक्रिया ने देश के सामान्य नागरिकों की नागरिकता पर ही संदेह के बादल खड़े कर दिए हैं। अपनी नागरिकता और पहचान साबित करने का भारी बोझ खुद जनता पर डाल दिया गया है, जिससे पूरे समाज में भय, असुरक्षा और अनिश्चितता का माहौल पैदा हो गया है।

कमजोर वर्गों और अल्पसंख्यकों के वोट काटने का आरोप
आंदोलनकारियों का दावा है कि इस पुनरीक्षण अभियान के तहत मुख्य रूप से गरीब, मजदूर, मेहनतकश वर्ग, दलितों और धार्मिक अल्पसंख्यकों के मताधिकार को निशाना बनाया जा रहा है। सभा में आरोप लगाया गया कि शासन-सत्ता जनता के मत को निष्पक्ष रूप से स्वीकार करने के बजाय अपनी सुविधा के अनुसार मतदाता तय करने की कोशिश कर रही है।
इतना ही नहीं, चुनाव आयोग के भीतर की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए। वक्ताओं ने कहा कि SIR की जटिल और विवादित प्रक्रिया को लेकर आयोग के अन्य सदस्यों की आपत्तियां और मतभेद भी सामने आ चुके हैं, जिससे यह साफ होता है कि शीर्ष प्रशासनिक स्तर पर निष्पक्षता का अभाव है।

दिल्ली में दमनकारी नीतियों की निंदा
रामनगर में हुए इस प्रदर्शन के दौरान राजधानी दिल्ली में जारी विरोध-प्रदर्शनों पर पुलिसिया कार्रवाई की सख्त शब्दों में निंदा की गई। वक्ताओं ने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रख रहे छात्रों, महिलाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं पर बल प्रयोग किया जा रहा है। आंदोलन को दबाने के लिए दमनकारी रास्ते अपनाए जा रहे हैं, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के बिल्कुल विपरीत है।
राष्ट्रपति से की गई मुख्य मांगें
धरना-प्रदर्शन के बाद प्रशासनिक प्रतिनिधि के माध्यम से राष्ट्रपति को भेजे गए ज्ञापन में निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखी गईं:
- SIR की तुरंत समाप्ति: विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की संपूर्ण प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए।
- मुख्य चुनाव आयुक्त पर कार्रवाई: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से बर्खास्त कर उन पर आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाए और तुरंत गिरफ्तारी की जाए।
- फॉर्म-6 और फॉर्म-7 के दुरुपयोग की जांच: फॉर्म-6 में अवैध बदलाव करके नए नाम जोड़ने और फॉर्म-7 के गलत इस्तेमाल से वैध मतदाताओं के नाम काटने के पीछे की साजिश की गहन जांच हो। इसमें शामिल दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
- संसद कानून 2023 की समीक्षा: चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के संसद कानून को निरस्त कर सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ द्वारा 2023 में दिए गए ऐतिहासिक आदेश को पुनः लागू किया जाए।
- संरक्षण संबंधी प्रावधान निरस्त हों: कार्यकाल के दौरान या सेवानिवृत्ति के बाद चुनाव आयुक्तों को आपराधिक मुकदमों से छूट देने वाले दंडात्मक और असंवैधानिक नियमों को समाप्त किया जाए।
- पुनः चुनाव की मांग: SIR लागू होने के बाद संपन्न हुए सभी विधानसभा चुनावों को रद्द कर, सभी छूटे हुए मतदाताओं को मतदान का अधिकार देते हुए निष्पक्ष रूप से दोबारा चुनाव कराए जाएं।

प्रदर्शन में कई संगठनों की सहभागिता
लखनपुर चौक पर हुए इस विरोध प्रदर्शन में क्षेत्र के विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक, छात्र और श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी से प्रभात ध्यानी, आसिफ, सुनील पर्नवाल, किरण आर्य और लालमणि शामिल रहे। वहीं, महिला एकता मंच से ललिता रावत, सरस्वती जोशी व कौशल्या चुन्याल तथा प्रगतिशील महिला एकता मंच की ओर से तुलसी छिंवाल और चम्पा देवी ने सहभागिता की।
व्यापारिक व छात्र वर्ग से देवभूमि व्यापार मंडल के संरक्षक मनमोहन अग्रवाल और परिवर्तनकामी छात्र संगठन के रवि कुमार पहुंचे। इसके अलावा समाजवादी लोक मंच के संयोजक मुनीष कुमार, गिरीश चंद्र, जमन राम, जगमोहन रावत, बी डी नैनवाल तथा इंकलाबी मजदूर केंद्र के महासचिव रोहित रुहेला और उबैदुल हक ने भी अपने विचार रखे। इस पूरे विरोध प्रदर्शन और सभा का सफल संचालन संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक ललित उप्रेती द्वारा किया गया।